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स्वदेशी हथियारों से लड़ेगी सेना

आत्मनिर्भर भारत के नारे का परिणाम अब जमीन पर दिखने लगा है। वैसे तो भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है लेकिन रक्षा क्षेत्र में उसकी उपलब्धियां लगातार बढ़ रही हैं।

आत्मनिर्भर भारत के नारे का परिणाम अब जमीन पर दिखने लगा है। वैसे तो भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो रहा है लेकिन रक्षा क्षेत्र में उसकी उपलब्धियां लगातार बढ़ रही हैं। भारत आज रक्षा उत्पादन में लगातार आत्मनिर्भरता हासिल करने की ओर अग्रसर है और आज हमारी सेनाएं जितनी सक्षम हैं उतनी पहले कभी नहीं रहीं। राष्ट्रीय स्तर पर बड़े प्रोजैक्ट बनाए जा रहे हैं। रक्षा क्षेत्र की भारतीय कम्पनियां स्वदेशी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर सम्भव प्रयास कर रही हैं। हमारा देश उत्पादन की क्षमता में पिछले तीन वर्षों में रक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई विभिन्न परियोजनाओं पर लगातार आगे बढ़ रहा है। भारत रक्षा क्षेत्र में लगभग सभी उत्पादों, ह​थियारों एवं उपकरणों का भारी मात्रा में आयात करता था। और भारत पूरे विश्व में रक्षा उपकरणों का सबसे बड़ा आयातक था। आज भारत 84 से अधिक देशों को रक्षा उपकरणों का निर्यात कर रहा है। आज देश की कई सरकारी एवं निजी क्षेत्र की कम्पनियां विश्व स्तर के उपकरण बना रही हैं और उनके लिए विदेशी बाजारों के दरवाजे खुल चुके हैं। 
30 दिसम्बर, 2020 को आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत केन्द्र सरकार ने स्वदेशी मिसाइल आकाश के निर्यात को मंजूरी प्रदान की थी। आकाश मिसाइल अब भारत की पहचान बन गई है। कई देशों ने आकाश मिसाइल खरीदने में अपनी रुचि दिखाई है। आकाश मिसाइल के साथ-साथ कई अन्य देशों ने तटीय निगरानी प्रणाली, रडार और एयर प्लेटफार्मों को खरीदने में रुचि दिखाई है। भारत अब फिलिपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया आदि ब्रह्मोष मिसाइल भी निर्यात करने की तैयारी कर रहा है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात एवं दक्षिण अफ्रीका आदि ने भी भारत से ब्रह्मोष मिसाइल खरीदने में अपनी रुचि दिखाई है। जब से नरेन्द्र मोदी सरकार ने भारतीय सेना के ​लिए जरूरी उपकरण एवं सैन्य सामग्री भारत में ही बनाने का फैसला किया है तब से आयात किए जाने वाले उपकरणों को बारी-बारी से सूची से बाहर किया जा रहा है। भारत रक्षा उपकरणों के निर्यात  के मामले में दुनिया के शीर्ष 25 देशों की सूची में शामिल हो चुका है। 
1990 के दशक में भारत हथियारों का पता लगाने वाले रडार को अमेरिका और इस्राइल से पाने के ​लिए संघर्ष कर रहा था वहीं उसने यही रडार अर्मोनिया को बेचने में सफलता प्राप्त कर ली है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई बार इस बात के संकेत दे चुके हैं कि भारतीय सेना भविष्य में स्वदेशी हथियारों से ही जंग लड़ेगी। यह घोषणा अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्वदेशी के पक्ष में एक बड़ा फैसला लेते हुए घरेलू उद्योगों से 76,390 करोड़ रुपए के सैन्य उपकरण और अन्य साजो-सामान खरीदने को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद ने 36000 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से अगली पीढ़ी के कॉरवेट्स की खरीद को भी मंजूरी दी थी। कारवेट्स एक तरह का छोटा जहाज होता है जो निगरानी और हमले सहित विभिन्न भूमिकाओं के लिए काफी उपयोगी है। कारवेट्स का निर्माण भारतीय नौसेना के लिए इनहाउस डिजाइन के आधार पर किया जाएगा और इसके लिए पोत निर्माण की नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।  स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के मकसद के साथ रक्षा खरीद परिषद ने हिन्दुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड द्वारा डोनियर विमान और एसयू-30, एमकेआई एयरो इंजन के निर्माण के प्रस्ताव की भी मंजूरी दे दी है। रक्षा खरीद परिषद ने भारतीय थलसेना के लिए दुर्गम क्षेत्रों के अनुकूल ट्रक, विशेष टैंक आदि के साथ टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल और अन्य हथियारों की घरेलू स्रोतों से खरीद के ​लिए 
 नई मंजूरी दे दी है। 
भारत की यह भी बड़ी उपलब्धि है कि सोमवार को ही इंटरमीडिएट रेंज बैकिमटिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप ओडिशा में किया गया। लांच ने सभी परिचालक मानको के साथ सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी खरा उतरा। डिफैंस सैक्टर मेक इन इंडिया की धूम मची हुई है। डिफैंस इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 में रक्षा मंत्रालय ने देशी कम्पनियों से 64 फीसदी खरीद का लक्ष्य तय किया था। रक्षा मंत्रालय ने इस लक्ष्य को न सिर्फ पूरा किया बल्कि उससे ज्यादा खरीद की। रक्षा मंत्रालय ने वित्त वर्ष की समाप्ति पर अपने कुल बजट के 65.50 फीसदी खरीद भारतीय उद्योगों से की गई। इस बात की उम्मीद है कि भारत के डिफैंस क्षेत्र से जुड़ी तकनीक जल्द अब ग्लोबल होने जा रही है। भारतीय डिफैंस उद्योग अब मेक इन इंडिया फॉर ही वर्ल्ड को आगे बढ़ाने में सक्षम है। इसी वर्ष 7 अप्रैल को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 101 से अधिक सैन्य प्रणालियों और हथियारों की तीसरी सूची जारी की थी, जिनके आयात पर अगले पांच वर्षों तक प्रतिबंध होगा और इन्हें स्वदेशी तौर पर विकसित किया जाएगा। केन्द्र सरकार का लक्ष्य भारत को एक रक्षा विनिर्माण केन्द्र के रूप में ​विकसित करना है। सेना प्रमुख कई बार यह दोहरा चुके हैं कि भविष्य में युद्ध भारत स्वदेशी हथियारों से लड़ेगा और जीतेगा भी।

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