भारतीय राजनीति के विस्तृत आकाश में अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे नक्षत्र थे, जिनकी चमक केवल सत्ता तक सीमित नहीं थी, बल्कि वह जनमानस के हृदय में गहराई तक समाई हुई थी। उनकी राजनीति में विचार था, शब्दों में संवेदना थी और निर्णयों में राष्ट्रहित सर्वोपरि था। 312 पृष्ठ की मेरी नई कॉफी टेबल बुक “अटल बिहारी वाजपेयी: द इंटरनल स्टेट्समैन” इसी बहुआयामी व्यक्तित्व को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास है।
अटल जी को केवल एक प्रधानमंत्री के रूप में देखना उनके व्यक्तित्व के साथ न्याय नहीं होगा। वे एक ऐसे “इंटरनल स्टेट्समैन” थे जिनकी असली ताकत उनके भीतर के संतुलन, नैतिकता और आत्मचिंतन में निहित थी। वे राजनीति को केवल नीतियों और निर्णयों का खेल नहीं मानते थे, बल्कि इसे राष्ट्र निर्माण की एक सतत् साधना समझते थे। उनकी सबसे बड़ी विशेषता थी—विचारों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की गरिमा। संसद में जब वे बोलते थे तो शब्दों के साथ एक गहरी जिम्मेदारी भी झलकती थी। उनके भाषणों में आक्रोश नहीं, बल्कि तर्क और संवाद की शक्ति होती थी।
वे विरोध को शत्रुता में नहीं बदलते थे, बल्कि उसे लोकतंत्र का आवश्यक अंग मानते थे। अटल जी का जीवन हमें यह भी सिखाता है कि दृढ़ता और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं। एक ओर उन्होंने देश की सुरक्षा के लिए कठोर निर्णय लिए, वहीं दूसरी ओर शांति और संवाद के द्वार हमेशा खुले रखे। यह संतुलन ही उन्हें अन्य नेताओं से अलग करता है। उनकी कविताओं में झलकता भाव उनके राजनीतिक जीवन में भी दिखाई देता था। वे शब्दों के शिल्पी थे,चाहे वह कविता हो या कूटनीति। यही कारण है कि उनके निर्णयों में मानवीयता की झलक मिलती थी। वे केवल नीतियां नहीं बनाते थे, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाने की चिंता करते थे।
इस पुस्तक के माध्यम से मेरा प्रयास रहा है कि पाठक अटल जी के उस पक्ष को समझ सकें जो अक्सर राजनीतिक विश्लेषण में छूट जाता है—उनका आंतरिक व्यक्तित्व, उनका आत्मसंवाद और उनका वह मानवीय पक्ष जिसने उन्हें “जननायक” बनाया। आज जब राजनीति में संवाद की कमी और विचारों की कठोरता बढ़ती दिखाई देती है, तब अटल जी का जीवन और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। वे हमें याद दिलाते हैं कि सच्चा नेतृत्व केवल सत्ता प्राप्त करने में नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और दिशा देने में होता है। अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित इस कॉफी टेबल बुक को तैयार करना अपने आप में एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण, लेकिन भावनात्मक रूप से समृद्ध अनुभव रहा।
सबसे बड़ी चुनौती थी—उनकी पुरानी तस्वीरों को संकलित करना और उन चित्रों में दिखाई दे रहे कार्यकर्ताओं, नेताओं और घटनाओं की सटीक पहचान करना। कई बार यह पता लगाना भी कठिन था कि कोई विशेष चित्र किस अवसर पर लिया गया था और उसमें उपस्थित व्यक्तियों का अटल जी से क्या संबंध था। इस पुस्तक को केवल चित्रों का संग्रह न बनाकर, उसे जीवंत और रोचक बनाने का प्रयास किया गया है। हर तस्वीर के साथ न केवल उस घटना का विवरण दिया गया है, बल्कि उसमें मौजूद व्यक्तियों के साथ अटल जी के संबंधों और उनसे जुड़ी यादों को भी साझा किया गया है।
यही इस पुस्तक की विशेषता है—यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि संबंधों और संवेदनाओं की कहानी भी कहती है। अटल जी के साथ मेरे लगभग 50 वर्षों के संबंधों की स्मृतियां जब भी मन में आती हैं, आंखें नम हो जाती हैं। मेरी शादी का एक चित्र इस पुस्तक में है, जिसमें अटल जी बारात में घोड़ी के साथ-साथ चलते दिखाई देते हैं। एक अन्य रोचक प्रसंग उस समय का है जब मुरली मनोहर जोशी अध्यक्ष बने थे—एक अनौपचारिक पार्टी में उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, “नेताजी, आइए हमारे आगे-आगे बैठिए,” और वह क्षण एक सुंदर तस्वीर में कैद हो गया। प्रधानमंत्री निवास पर एक पारिवारिक मुलाकात के दौरान अटल जी ने जिस आत्मीयता से मेरे पूरे परिवार के साथ तस्वीरें खिंचवाईं, वह अनुभव किसी दादाजी के स्नेह जैसा था—सहज, स्नेहपूर्ण और अपनापन भरा।
यह पुस्तक 1924 से 2018 तक के अटल जी के जीवन के हर महत्वपूर्ण पड़ाव को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में उनकी शुरुआत, भारतीय जनसंघ की स्थापना, संसद में उनके प्रवेश, पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका, चुनावों में जीत-हार और यूनाइटेड नेशन में दिया गया उनका ऐतिहासिक भाषण। प्रधानमंत्री के रूप में 1996 से 2004 तक का उनका कार्यकाल, पोखरण 2 न्यूक्लियर टेस्ट, लाहौर बस डिप्लोमेसी, आगरा समिट की असफलता और 2004 के चुनावों में हार,इन सभी क्षणों को भी चित्रों के माध्यम से सजीव किया गया है।
साथ ही, भारत रत्न से सम्मानित होने तक की यात्रा भी इसमें समाहित है। इस पुस्तक में अटल जी के व्यक्तित्व के विविध रंग दिखाई देते हैं—कभी वे लिखते हुए, पढ़ते हुए, कविताएं रचते हुए नजर आते हैं तो कभी आंदोलनों में धरना देते, मार्च करते या जेल जाते हुए। उनकी प्रसिद्ध काव्य कृति “मेरी 51 कविताएं” के विमोचन के समय पी.वी. नरसिम्हा राव के साथ उनकी प्रसन्न मुद्रा भी इसमें संजोई गई है। अटल जी के चेहरे पर सदैव एक अद्भुत शांति, सम्मोहन और मुस्कान रहती थी। उनकी ठहाकों से भरी हंसी और सहज व्यक्तित्व को देखकर इस पुस्तक का नाम “मुस्कुराते अटल” भी रखा जा सकता था—एक ऐसा भाव जो आज के समय में दुर्लभ होता जा रहा है।
इस पुस्तक में लगभग हर उस प्रमुख नेता के साथ अटल जी के चित्र शामिल करने का प्रयास किया गया है जो उनके समय में सक्रिय थे,चाहे वे चौधरी चरण सिंह, जॉर्ज फर्नांडीस, देवी लाल, जगजीवन राम, चंद्रशेखर या राज नारायण हों। नरेंद्र मोदी के साथ भी अटल जी के अनेक दुर्लभ चित्र इस पुस्तक में हैं। एक चित्र में वे होली के अवसर पर हाथ में हाथ डालकर झूमते हुए दिखाई देते हैं। विदेशी नेताओं, कलाकारों, खिलाड़ियों और अन्य क्षेत्रों की प्रसिद्ध हस्तियों के साथ भी उनके चित्र इस पुस्तक में समाहित हैं। एक विशेष चित्र में वे अपने परिवार के साथ मनाली में अत्यंत सहज और प्रसन्न दिखाई देते हैं।
सोशल मीडिया के अभाव के समय में लिखे गए उनके व्यक्तिगत पत्र, जैसे मेरे पिता श्री चरतीलाल गोयल जी को लिखा गया उनका हस्तलिखित पत्र, इस पुस्तक को और भी मूल्यवान बनाते हैं। हमारे देश में राजनीतिक नेताओं पर आधारित कॉफी टेबल बुक्स बहुत कम हैं, और जो हैं उनमें यह पुस्तक विशेष स्थान प्राप्त कर सकती है। इसे तैयार करने में चार वर्षों की अथक मेहनत लगी है। देश के विभिन्न हिस्सों से चित्र एकत्र किए गए, अनेक लोगों को पत्र लिखे गए, पत्र-पत्रिकाओं का सहारा लिया गया और आधुनिक समय में सोशल मीडिया से भी महत्वपूर्ण सहयोग मिला। यह पुस्तक केवल अटल जी के जीवन का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि एक युग, एक विचारधारा और एक संवेदनशील व्यक्तित्व का जीवंत चित्रण है।


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