ड्रग कार्टेल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के प्रहार के बारे में पिछले सप्ताह लिखे कॉलम में मैंने मैक्सिको के ड्रग माफिया का भी जिक्र किया था। तब कल्पना भी नहीं थी कि दुनिया के सबसे बड़े ड्रग्स सौदागर एल मेंचो को मैक्सिको की सेना मार गिराएगी। वो वर्षों से मैक्सिको की सत्ता को तो चुनौती दे ही रहा था, अमेरिका की नाक में भी दम कर रखा था। उसकी हैसियत का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका ने उसे पकड़ने के लिए करीब 136 करोड़ रुपए का इनाम रखा था। अब सवाल है कि मेंचो की मौत से क्या बदलेगा? क्या ड्रग्स के कारोबार पर फर्क पड़ेगा?
इस सवाल पर चर्चा से पहले मैं बताऊं कि मैंने मैक्सिको की यात्रा की है। वहां ड्रग्स सौदागरों का बेलगाम और खूंखार असर सभी ओर दिखता है। ड्रग्स की होम डिलिवरी तक होती है। वैसे संदर्भवश बता दें कि यूरोप के कई देशों के मेन्यू में ड्रग्स शामिल रहता है। कोपेनहेगन और कनाडा में भी मैंने इसे महसूस किया। जहां तक मैक्सिको में ड्रग माफिया के जंगलराज का सवाल है तो वहां कई गिरोह हैं लेकिन एल मेंचो का गिरोह सबसे बड़ा और सबसे बेरहम है। वैसे उसका असली नाम था नेमेसियो ओसेगुएरा सर्वेंटेस. मैक्सिको के ऐसे बीहड़ और पहाड़ों में स्थित एक गांव में उसका जन्म हुआ जहां कानून था ही नहीं।
वहां एवोकाडो, अफीम तथा मारिजुआना की खेती होती थी, लेकिन उसके सपने बड़े थे। किस्मत आजमाने के लिए वह अवैध तरीके से अमेरिका पहुंच गया। वहां हेरोइन की तस्करी के मामले में पकड़ा गया। सजा काटी और डिपोर्ट होकर फिर से मैक्सिको पहुंच गया।
पुलिस की कार्यप्रणाली की गहन जानकारी लेने के लिए वह पुलिस में भर्ती हुआ। कुछ दिन बाद पुलिस की वर्दी उतार फेंकी और ड्रग माफिया के मिलेनियो कार्टेल के लिए हत्यारे के तौर पर काम करने लगा, मगर उसकी नजर तो बॉस की कुर्सी पर थी। उसने मिलेनियो कार्टेल पर कब्जा करने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया।
फिर उसने स्थानीय मनी लॉन्डरर्स गिरोह के साथ मिलकर जेलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल की स्थापना की और दूसरे गिरोहों के खिलाफ खुली जंग छेड़ दी। इतना ही नहीं उसने जबरन उगाही से लेकर अपहरण तक का कारोबार शुरू कर दिया। उसने राजनेताओं से लेकर पुलिस अधिकारियों तक को खूब रिश्वत दी और जो रिश्वत से नहीं माने, उन्हें बड़ी बेरहमी से ठिकाने लगाया। वह सिर कलम करता और पुल पर टांग देता ताकि लोगों में उसके नाम का खौफ बैठ जाए। 2015 में केवल डेढ़ माह में मेंचो के गिरोह ने 12 ईमानदार पुलिसकर्मियों का गला काट दिया था। 2020 में उसके गिरोह ने मैक्सिको सिटी के तत्कालीन पुलिस प्रमुख उमर गार्सिया हारफुच को मारने की कोशिश की थी।
उस हमले में पुलिस प्रमुख तो बच गए थे लेकिन उनके दो अंगरक्षकों की जान चली गई थी। एक और घटना से उसकी ताकत और प्रशासन में उसकी पैठ का अंदाजा लगा सकते हैं। मई 2015 में मैक्सिको की सेना को उसके छिपने के स्थान की जानकारी मिल गई थी। सेना उसे घेरने के लिए पहुंच चुकी थी, तभी उसके मुखबिरों ने जानकारी दे दी। उसके गिरोह ने रॉकेट से सेना के हेलिकॉप्टर को मार गिराया और एल मेंचो को भागने का समय मिल गया। उसका खुफिया तंत्र इतना मजबूत था कि पलक झपकते ही उसे जानकारी मिल जाती थी, मगर इस बार उसकी किस्मत उतनी अच्छी नहीं थी।
एक पुरानी कहावत है कि कई बार प्रेमिका जानलेवा साबित होती है। एल मेंचो के साथ ऐसा ही हुआ है। उसकी प्रेमिका के एक सहयोगी पर खुफिया तंत्र नजर रख रहा था। उस व्यक्ति ने मेंचो की गर्लफ्रेंड को एक खास स्थान पर पहुंचाया जहां मेंचो उससे मिलने आया। दूसरे दिन गर्लफ्रेंड चली गई लेकिन मेंचो वहीं रहा। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने जैसे ही कन्फर्मेशन दिया, सेना ने हमला बोला और घायल मेंचो ने एयर एंबुलेंस में दम तोड़ दिया।
मगर उसकी मौत के बाद जिस तरह से मैक्सिको में खून-खराबा हुआ है वह बताता है कि उसकी ताकत क्या है। उसके कार्टेल ने मैक्सिको में जिस तरह का कोहराम मचाया है और जिस तरह से पुलिस पर हमले किए हैं, वह पूरे देश को खौफजदा करने वाला है। पुलिस के कई अधिकारी मारे गए हैं। ठीक-ठीक यह बता पाना तो बहुत मुश्किल है कि एल मेंचो के गिरोह में कितने सदस्य हैं लेकिन एक आकलन है कि मैक्सिको में सभी ड्रग कार्टेल के सदस्यों की संख्या पौने दो लाख से लेकर दो लाख तक हो सकती है। मैक्सिकन कार्टेल का कारोबार पूरी दुनिया में फैला हुआ है और केवल अमेरिका में इस कार्टेल की रोजाना कमाई पांच से छह सौ करोड़ रुपए है।
पूरी दुनिया में उसके कारोबार का हिसाब इतने अंकों में है कि सामान्य व्यक्ति के लिए पढ़ना भी मुश्किल हो जाए। ड्रग्स के कारोबार से मेंचो का कार्टेल अकूत पैसा कमाता है। आपने प्रसिद्ध उपन्यास गाॅडफादर पढ़ा होगा या फिल्म देखी होगी। समझ लीजिए कि एल मेंचो उससे भी ज्यादा खतरनाक था। उसका गिरोह केवल ड्रग्स की सप्लाई ही नहीं करता था बल्कि वह दुनियाभर में लड़कियों के अपहरण का धंधा भी चलाता था। उसके पास हथियारों का जखीरा है।
मैक्सिको की सेना ने कुछ बख्तरबंद गाड़ियां और रॉकेट लॉन्चर जब्त किए हैं मगर ये तो केवल बानगी है। एल मेंचो की मौत के ठीक बाद कैलिफोर्निया में जन्मे जुआन कार्लोस वैलेंसिया गोंजालेज ने खुद को नया माफिया घोषित कर दिया है। अब सवाल यही है कि ऐसे पुख्ता हमलावर तंत्र से क्या मैक्सिको निपट पाएगा? मुझे लगता है कि यह केवल मैक्सिको की लड़ाई नहीं है। मैक्सिको ड्रग्स का उद्गम स्थल है। शिकार तो पूरी दुनिया है। जिस तरह से अमेरिका ने मैक्सिको का साथ दिया है, पूरी दुनिया को मैक्सिको के साथ आना चाहिए।
हर देश में नाकाबंदी होनी चाहिए और ड्रग कार्टेल पर विश्वव्यापी ऐसा करारा प्रहार होना चाहिए कि वह नेस्तनाबूद हो जाए। यदि हमने ड्रग्स को खत्म नहीं किया तो भावी पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना होगा। इस धंधे में लगे लोगों को समझना चाहिए कि उनका लालच पूरी दुनिया को तबाह कर रहा है।


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