गणपति बप्पा मोरया…

Summary :

गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया। आजकल देशभर में गणपति उत्सव मनाया जा रहा है। गणेश जी को हम विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और मंगल करने वाले भगवान के रूप में पूजते हैं। गणपति उत्सव केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं है बल्कि यह हमें बुद्धि, संस्कार, एकता, सेवा और अच्छे कर्मों का संदेश भी देता है। भगवान गणेश जी को किसी भी शुभ कार्य से पहले याद किया जाता है। क्योंकि गणेश जी बुद्धि, विवेक और शुभ शुरूआत के प्रतीक माने जाते हैं। हम सभी चाहते हैं कि हमारे जीवन में सुख-शांति हो, परिवार में प्रेम हो और…

गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया। आजकल देशभर में गणपति उत्सव मनाया जा रहा है। गणेश जी को हम विघ्नहर्ता, बुद्धि के देवता और मंगल करने वाले भगवान के रूप में पूजते हैं। गणपति उत्सव केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं है बल्कि यह हमें बुद्धि, संस्कार, एकता, सेवा और अच्छे कर्मों का संदेश भी देता है।
भगवान गणेश जी को किसी भी शुभ कार्य से पहले याद किया जाता है। क्योंकि गणेश जी बुद्धि, विवेक और शुभ शुरूआत के प्रतीक माने जाते हैं। हम सभी चाहते हैं कि हमारे जीवन में सुख-शांति हो, परिवार में प्रेम हो और हमारे काम में आने वाली बाधाएं दूर हों।
गणेश जी की पूजा केवल हाथ जोड़ना नहीं है, बल्कि उनके गुणों को अपने जीवन में उतारना भी है। जैसे कि उनके स्वरूप में कई सुन्दर संदेश छिपे हैं। बड़ा सिर का संदेश है बड़ी सोच रखें, छोटी-छोटी बातों में उलझने के बजाय जीवन में सकारात्मक सोच रखें, बड़े कान संदेश देते हैं कि दूसरों की बात ध्यान से सुनें। हर समय अपनी बात मनवाने की कोशिश न करें। छोटी आंखें संदेश देती हैं अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करें। बड़ा पेट-सहनशीलता, जीवन में समझदारी और धैर्य से कुछ बातें पेट में रखें। हर बात का जवाब न दें। मूषक वाहन-इच्छाओं पर नियंत्रण रखें। हर मनुष्य को अपनी इच्छाओं और अहंकार पर नियंत्रण रखना सीखना चाहिए।
गणपति पूजा श्रद्धा और विश्वास से करनी चाहिए। क्योंकि इससे मन को शांति, परिवार में एकता, अच्छे संस्कार, समाज में भाईचारा बढ़ता है। इन दिनों 3-4 गणपति पूजा में जाने का अवसर मिल रहा है। जिसकी शुरूआत पियूष गोयल-सीमा के घर से हर साल की तरह हुई। रोज किसी न किसी मित्र के घर हो रही है। सबको भावनाओं के साथ मिलने का अवसर भी मिलता है।
आजकल दिल्ली में घर-घर गणपति का आगमन है। अपने घर गणेश जी को जो किसी ने सोच रखा है, उतने दिन के लिए अर्थात 1, 3, 5, 7, 10 दिन। सुबह-शाम भगवान गणेश जी की पूजा करते हैं। इसके बाद भगवान गणेश की विदाई का समय आता है, जिसे प्रतिमा विसर्जन कहा जाता है। विसर्जन के दौरान यह प्रार्थना की जाती है कि गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ अर्थात हे गणेश जी हर साल इसी तरह आते रहो।
यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि नदियों में जल प्रदूषण के चलते व्यवस्थाएं बदल रही हैं। भगवान गणेश की विशाल प्रतिमाएं जो रबड़ या प्लास्टिक की भी बनी होती हैं उन्हें लाया जाता है, पूजा की जाती है, फिर विसर्जित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में मिट्टी की प्रतिमा घर लाने से जुड़ी हुई है और विसर्जन यह बताता है आगमन और विदाई मिट्टी से ही होती है। हम हर सुख-दुःख में मिट्टी की तरह रहें। इसी अवधारणा के साथ आगमन और विसर्जन बताया गया है। भगवान कृष्ण ने गीता के उपदेश में अर्जुन को शरीर के मिट्टी में मिल जाने की बात कही है। इसीलिए जीवन में सुख-दुःख को समान माना जाता है।
मेरा मानना है कि जब नदियों की पवित्रता की हम बात करते हैं तो नदी जल को चाहे वह गंगा हो या यमुना हो प्रदूषण से बचाने के लिए कैमिकल युक्त प्रतिमाएं विसर्जित न की जाएं। मिट्टी की प्रतिमाएं ही विसर्जित की जाएं तो अच्छा है। हालांकि अनेक पंडित और आचार्य गणेश चतुर्थी के मौके पर छोटी प्रतिमा स्थापित करने की बात कहते हैं और फिर इसे अपने घर के तुलसी उगाए हुए गमले में रखने की बात करते हैं, ताकि सब कुछ मिट्टी में समा जाए और सब कुछ हरा-भरा और खुशहाल रहे। कुल मिलाकर गणपति पूजा, विसर्जन और शोभा यात्रा सब कुछ मर्यादित और विधिपूर्वक होना चा​हिए। यही गणपति की पूजा का संदेश है जो हर किसी को अपने जीवन में उतारना चाहिए। मानव-मानव के लिए जिये, सुखों की कामना करे, यही गणपति पूजन और विसर्जन का संदेश माना जाना चाहिए।

Kiran Chopra