एक तरफ अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो टैरिफ मुद्दे पर भारत-अमेरिका संबंधों में आए तनाव को कम करने और खराब रिश्तों की फिर से मुरम्मत करने के लिए भारत आए हुए हैं। मार्को रूबियो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें अमेरिका आने का निमंत्रण दिया है और भविष्य में दोनों देशों के मिलजुल कर काम करने का संकल्प लिया। मार्को रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ भी मुलाकात कर रक्षा, व्यापार, हिन्द प्रशांत और पश्चिम एशिया तनाव मुद्दे पर बातचीत की। यह बैठकें केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के उद्देश्य से ही नहीं बल्कि दो बड़ी शक्तियों के फिर से समीकरण बनाने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण समझी जा रही हैं। अमेरिकियों के बारे में मशहूर है कि वे खुद को दुनिया में सर्वश्रेष्ठ नागरिक मानते हैं और अपने िहतों को सर्वोपरि रखते हैं। इसी बीच अमेरिका ने अपनी इमिग्रेशन पॉलिसी में जबरदस्त बदलाव किया है जिससे लाखों भारतीय प्रभावित होंगे।
नई नीति के मुताबिक ग्रीन कार्ड की इच्छा रखने वाले ज्यादातर अप्रवासियों को अमेरिका छोेड़कर अपने देश में स्थित अमेरिकी दूतावास या वाणिज्य दूतावास में आवेदन करना होगा। अब स्थायी निवास यानि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले अधिकांश प्रवासियों को अपने देश लौटकर वहीं से आवेदन करना होगा। पहले कई लोग अमेरिका में रहते हुए ही ‘एडजस्टमेंट ऑफ स्टेटस’ प्रक्रिया पूरी कर लेते थे। यूएससीआईएस के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा, ‘अब से अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहा कोई भी विदेशी नागरिक जो ग्रीन कार्ड चाहता है, उसे सामान्य तौर पर अपने देश लौटकर आवेदन करना होगा, सिवाय असाधारण परिस्थितियों के।’ एजेंसी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका के भीतर रहकर स्टेटस एडजस्टमेंट अब एक अपवाद माना जाएगा और हर आवेदन की व्यक्तिगत स्तर पर सख्ती से जांच होगी। यूएससीआईएस ने अपने पॉलिसी डॉक्यूमेंट में कहा कि छात्र, अस्थायी कर्मचारी और पर्यटक सीमित अवधि और विशेष उद्देश्य के लिए अमेरिका आते हैं। उनका अमेरिका आना ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का पहला कदम नहीं माना जाना चाहिए। नई नीति का सबसे ज्यादा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका में एच-1बी वीजा धारकों और रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड आवेदकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है।
वित्त वर्ष 2026 में भारत के आवेदकों के लिए उपलब्ध सभी ईबी-2 वीजा का उपयोग हो चुका है। अब वित्तीय वर्ष के शेष भाग के लिए भारतीय आवेदकों को कोई और ग्रीन कार्ड जारी नहीं किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि वित्त वर्ष 2026 के लिए उच्च डिग्री प्राप्त भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड के दरवाजे अब बंद हो गए हैं। अमेरिका में 12 लाख लोग ऐसे हैं जो अभी स्थायी निवासी बनने का इंतजार कर रहे हैं। इनमें वह छात्र भी शामिल हैं जो वहां अब नौकरियां कर रहे हैं। अमेरिका में पढ़ने गए भारतीय छात्रों और पहले से ही वहां रह रहे प्रवासी भारतीयों का सपना होता है कि उन्हें किसी न किसी तरह से ग्रीन कार्ड मिल जाए लेकिन अब उनका सपना चूर-चूर हो गया है। हाल ही के वर्षों में अमेरिका में 2 करोड़ से ज्यादा अवैध प्रवासी दाखिल हुए हैं और ग्रीन कार्ड सिस्टम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है। छात्र, अस्थाई कर्मचारी या टूरिस्ट वीजा पर आने वाले गैर प्रवासी थोड़े समय के लिए या किसी खास मकसद से अमेरिका आते हैं। सिस्टम यही कहता है कि जब उनका दौरा खत्म हो जाए तो वह वापिस चले जाएं लेकिन वे अवैध रूप से रहना शुुरू कर देते हैं और फिर वे ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में देखा गया कि एच-1बी वीजा पर गए लोग किसी अमेरिकी युवती से शादी कर लेते हैं और ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर देते हैं। अमेरिका में काम करने वाले अप्रवासी युवाओं के जीवन साथी विजटर वीजा पर अमेरिका आते हैं और फिर ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की कोशिश करते हैं। डंकी रूट से अमेरिका पहुंचने वालों के भी अनेक मामले सामने आए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि भारतीयों में विदेशों में रहकर अपना भविष्य स्वर्णिम बनाने की ललक बहुत ज्यादा है।
डोनाल्ड ट्रम्प का शुुरू से ही अप्रवासियों के मामले में बहुत सख्त रुख रहा है। अवैध अप्रवासन को कम करना उनका चुनावी मुद्दा रहा है। ट्रम्प प्रशासन लगातार अप्रवासियों की संख्या कम करने की कोिशश कर रहा है। अनेक अवैध अप्रवासी भारतीयों को जंजीरों में जकड़ कर भारत भेजा जा चुका है। अब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव आ रहे हैं। टैरिफ वॉर और पश्चिम एशिया संकट को लेकर ट्रम्प और उनकी पार्टी की लोकप्रियता लगातार कम हो रही है। उनकी पार्टी के भीतर आैर देश में युद्ध विरोधी भावनाएं जोर पकड़ रही हैं। इसीलिए ट्रम्प ईरान से सम्मानजनक समझौते के मार्ग तलाश रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन ने इमिग्रेशन के मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकियों को यह दिखाने की कोिशश की है कि वे अप्रवासियों को नहीं आने दे रहे और ऐसी प्रक्रिया बना रहे हैं जिससे लोगों का आना मुश्किल हो जाए। इसमें कोई संदेह नहीं कि अप्रवासी भारतीयों ने अमेरिका के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे अमेरिका के सरकारी खजाने में अरबों डॉलर का योगदान देते हैं लेकिन नई नीति ने पेशेवरों और छात्रों को अनिश्चितता में डाल दिया है। नई नीति को लेकर बहुत सारी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ का मानना है कि नई नीति अमेरिका को खुद चोट पहुंचाने वाली है। अप्रवासी भारतीयों का कहना है कि अमेरिकी सरकार को अपने इस फैसले पर िफर से विचार करना चाहिए। क्योंकि भारतीयों समेत दुनियाभर के हजारों लोगों ने अमेरिका की अर्थव्यवस्था और समाज में बहुत बड़ा योगदान दिया है।
ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने के लिए अनुमति प्रदान करने वाला दस्तावेज़ है। यह दस्तावेज़ किसी भी व्यक्ति को अमेरिकी नागरिकों की तरह ही लाभ और अधिकार देता है। ग्रीन कार्ड धारक को वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया है लेकिन देश में कहीं भी भ्रमण करने से लेकर काम करने तक का बराबर अवसर मिलता है। इस कार्ड के मिलने के बाद अमेरिका की स्थायी नागरिकता का रास्ता खुल जाता है। यूएससीआईएस के अनुसार इसे परमानेंट रेज़िडेंट कार्ड (स्थायी निवासी कार्ड) के रूप में जाना जाता है। नई नीति से अमेरिका में अप्रवासियों के लिए जिन्दगी मुश्किल हो जाएगी। जो छात्र वहां पढ़ने गए हैं या िफर वहां नौकरी करने गए हैं उनकी परेशानी बढ़ जाएगी। अगर उन्हें ग्रीन कार्ड अप्लाई करने के लिए भारत वापिस आना पड़ेगा तो उन्हें िनराशा ही होगी। यद्यपि विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने भारतीयों के वीजा चुनौतियों के मुद्दे को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के समक्ष उठाया है। फिलहाल अमेरिका ने प्रवासियों को रेड कार्ड दिखा दिया है।























