पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में बालाकोट के जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी शिविर को भारतीय वायुसेना के वीर लड़ाके पायलटों ने जिस तरह उसकी सीमा में घुसकर नेस्तनाबूद किया है उससे पाकिस्तान के होश ठिकाने आ जाने चाहिएं। भारत सरकार ने इस कार्रवाई को असैनिक बताते हुए स्पष्ट किया है कि उसका यह कदम आत्मरक्षार्थ की गई अग्रिम कार्रवाई के रूप में देखा जाना चाहिए। जाहिर है कि यह पाकिस्तान पर हमला नहीं था बल्कि आतंकवाद पर हमला था जो पाकिस्तानी फौजों की निगरानी में ही इस मुल्क में फलफूल रहा है।
भारत ने यह कार्रवाई उस पुलवामा हमले के जवाब में की है जिसे विगत 14 फरवरी को कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद ने ही अंजाम देकर इसका जिम्मा पूरी अकड़ के साथ लिया था मगर भारत की कार्रवाई ने उसकी सारी हेकड़ी निकालते हुए पैगाम दे दिया है कि केवल उसे ही सजा नहीं मिलेगी बल्कि उसके आकाओं का भी कद नाप दिया जायेगा। जाहिर है कि पाकिस्तान की सीमाओं के भीतर ही दहशतगर्द जिस तरह फलफूल रहे हैं उसके पीछे इस मुल्क की फौज का हाथ इस तरह है कि पाकिस्तान ने अपनी विदेश नीति का ही एक हिस्सा आतंकवाद को बना कर रख लिया है।
मोदी सरकार की यह कार्रवाई कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों ही मोर्चों पर इस कदर मुफीद है कि पाकिस्तान के सामने अब किसी प्रकार की सैनिक कार्रवाई की मार्फत इसका जवाब देने का रास्ता नहीं बचा है मगर इसके साथ यह भी ध्यान रखना होगा कि जैश-ए-मोहम्मद का सरगना वही मौलाना मसूद अजहर है जिसे नई दिल्ली में भाजपा की सरकार के रहते ही खुद तत्कालीन विदेश मन्त्री जसवंत सिंह जम्मू जेल से रिहा करके हवाई जहाज में बैठाकर काबुल छोड़ने गये थे मगर हकीकत यह भी है कि भारत की फौजों ने हमेशा ही पाकिस्तान को उसकी असलियत बताने में कभी कोई कसर नहीं रखी।
हर बार यही सन्देश दिया कि वह अपनी हदों में रहते हुए भारत से रंजिश रखने का ख्याल दिल से निकाल दे लेकिन सिर्फ नफरत के बूते पर तामीर में आये पाकिस्तान के हुक्मरानों ने भारत से दुश्मनी को ही अपने वजूद की शर्त बना डाला और इस तरह बना डाला कि 1971 में दो टुकड़े हो जाने के बाद इसने आतंकवाद के जरिये भारत को हजार जख्म देने की नीति पर चलना शुरू कर दिया मगर आज सवाल दूसरा है कि कश्मीर मसले के बहाने पाकिस्तान ने जिस तरह अपने साये में ही दहशतगर्दों की पूरी फौज खड़ी करके भारत को लहूलुहान करने की तरकीब निकाल रखी है उसका खात्मा होना चाहिए।
मोदी सरकार ने जिस तरह पुलवामा कांड का बदला लेकर सिद्ध किया है कि बिना युद्ध छेड़े ही इस समस्या का हल निकालने की तरकीब निकाली जा सकती है उससे अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत की शान्तिप्रिय देश होने की प्रतिष्ठा बरकरार रहने से कोई नहीं रोक सकता। मानवीयता के विरुद्ध अपराध करने वाले दहशतगर्दों को अपनी सैरगाह बनाने वाले पाकिस्तान को यह सोचना ही होगा कि उसके एक जायज मुल्क होने के लिए भी ऐसी तंजीमों का खात्मा जरूरी है।
पाकिस्तान का यह कहना कि भारत आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए यह सारी कवायद कर रहा है, पूरी तरह भारत के लोगों का ही अपमान है क्योंकि इस देश के लोग यह अच्छी तरह जानते हैं कि चुनावों के मुद्दे क्या होते हैं और क्या नहीं। भारत के सभी विपक्षी दल एक राय से पुलवामा कांड का जवाब देने के लिए प्रधानमन्त्री मोदी की सरकार को अपना सम्पूर्ण समर्थन पहले दिन ही दे चुके थे। अतः दुश्मन के खिलाफ पूरे देश का एक इकाई के रूप में उठकर खड़ा होना पाकिस्तान के लिए हैरत की बात हो सकती है मगर हिन्दोस्तान में इस मुद्दे पर कोई शक नहीं है।
यह लड़ाई किसी राजनैतिक दल की नहीं है बल्कि भारत की है और भारत सभी का है जिनमें भाजपा, कांग्रेस से लेकर कम्युनिस्ट तक शामिल हैं। मुद्दा राजनैतिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय है और पाकिस्तान के होश ठिकाने लगाने का है जो भारत से दुश्मनी के साथ-साथ आतंकवाद को अपना हमराज बनाकर पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में ऐसी ताकतों की तर्जुमानी करने पर आमादा है जिनका पेशा इंसानियत को खूंगर बनाने का है। अगर ऐसा न होता तो क्यों पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे आतंकवादी शिविरों के बारे में भारत द्वारा बार-बार दिये गये पक्के सबूतों के बावजूद कोई कार्रवाई न करता ? मगर इसने तो हद ही तोड़ डाली जब पुलवामा हमले के बारे में भी इसने भारत से सबूत तब देने को कहा जब खुद जैश-ए-मोहम्मद ने इसकी जिम्मेदारी का ऐलान कर दिया?
जरा कोई पूछे इमरान खान से दीपक तले अंधेरा और किसे कहते हैं कि उनके ही सूबे खैबर पख्तूनख्वा में मौलाना मसूद और उसका जीजा बालाकोट में आतंकवादी शिविर चला रहे थे! इसीलिए भारत ने इस शिविर को निशाना बनाकर पैगाम दिया है कि पाकिस्तान निगाहें चुराना बन्द करे और अपने मुल्क होने का सबूत पेश करे वरना यह नाजायज मुल्क ही कहलाया जायेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहले ही सेना को कार्रवाई के लिये फ्री हैंड दे दिया था। भारतीय वायुसेना की कार्रवाई से नरेन्द्र मोदी ने न केवल 56 इंच का सीना दिखा दिया बल्कि साहसिक फैसला लेकर देशवासियों को भरोसा दिला दिया कि देश सुरक्षित हाथों में है। देश की जनता कह रही है- नरेन्द्र मोदी की जय हो, भारत माता की जय हो।


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