बदलेगी देश की तस्वीर

Summary :

नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन) और आधुनिक राजमार्गों (एक्सप्रेसवे/हाईवे) के निर्माण से देश के आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे में कई बड़े लाभ हो रहे हैं। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बड़े महानगरों और प्रमुख शहरों के बीच का सफर कुछ ही घंटों में सिमट जाएगा जैसे मुंबई-हैदराबाद या दिल्ली-अमृतसर या दिल्ली-लखनऊ जैसी यात्राएं बहुत तेज हो जाएंगी। यह आईटी उद्योग, स्टार्टअप्स, फार्मा और व्यापारिक यात्रा को सीधा बढ़ावा देता है। भारत में सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2001 में देश के चार प्रमुख महानगरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई) को जोड़ने वाली 5,846 किलोमीटर लंबी मूल…

नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (बुलेट ट्रेन) और आधुनिक राजमार्गों (एक्सप्रेसवे/हाईवे) के निर्माण से देश के आर्थिक, सामाजिक और बुनियादी ढांचे में कई बड़े लाभ हो रहे हैं। हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बड़े महानगरों और प्रमुख शहरों के बीच का सफर कुछ ही घंटों में सिमट जाएगा जैसे मुंबई-हैदराबाद या दिल्ली-अमृतसर या दिल्ली-लखनऊ जैसी यात्राएं बहुत तेज हो जाएंगी। यह आईटी उद्योग, स्टार्टअप्स, फार्मा और व्यापारिक यात्रा को सीधा बढ़ावा देता है। भारत में सबसे पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2001 में देश के चार प्रमुख महानगरों (दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई) को जोड़ने वाली 5,846 किलोमीटर लंबी मूल ‘स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना’ की शुरुआत की थी, जो 2012 में पूरी हुई थी। अब वर्तमान में मोदी सरकार स्वर्णिम चतुर्भुज योजना-2 के तहत इसी बुनियादी ढांचे को आधुनिक एक्सप्रेस-वे और बेहतर कनेक्टिविटी के साथ अगले स्तर पर ले जाने की दिशा में काम कर रही है। इन परियोनाओं से रेलवे स्टेशनों के आसपास शहरी केंद्रों और डाउनटाउन क्षेत्रों का पुनर्जीवन होता है। इन कॉरिडोर्स से छोटे और मझोले शहर मुख्य आर्थिक केंद्रों से बेहतर ढंग से जुड़ते हैं जिससे संतुलित क्षेत्रीय विकास होता है। सड़कों और पारंपरिक रेल नेटवर्क पर दबाव घटने के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन और प्रदूषण में कमी आती है जो हरित एवं टिकाऊ विकास में मददगार है। आधुनिक राजमार्गों से ट्रकों और कमर्शियल वाहनों की आवाजाही तेज होती है जिससे लॉजिस्टिक्स लागत (सामान पहुंचाने का खर्च) कम होती है। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलों के तहत भारतीय रेल स्वदेशी हाई-स्‍पीड रेल विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है। इसका उद्देश्य आयातित प्रणालियों और पुर्ज़ों पर निर्भरता कम करना है। इंटीग्रल कोच फैक्‍ट्री (आईसीएफ), भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमए) के सहयोग से 280 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार वाले स्वदेशी हाई-स्‍पीड ट्रेन सैटों का डिज़ाइन और निर्माण कर रही है। साथ ही, भविष्य की हाई-स्‍पीड रेल परियोजनाओं के लिए आवश्यक टूलिंग, परीक्षण और उत्पादन का इकोसिस्टम भी देश में विकसित किया जा रहा है। हॉट रेल नाम की संस्था ने दुनियाभर के 145 शहरों पर एक विश्व स्तर का अध्ययन किया। इस अध्ययन में साफ देखा गया कि 3 घंटे से कम की यात्राओं में हाई-स्पीड ट्रेन हमेशा बाजार की आधी से ज्यादा हिस्सेदारी हासिल कर लेती है। 2 घंटे से कम की यात्राओं में हाई-स्पीड ट्रेन 90 फीसद तक बाजार पर कब्जा कर लेती है। इतना ही नहीं, 90 मिनट (डेढ़ घंटे) से कम समय वाली यात्राओं में एयरलाइंस हार मानकर पूरी तरह से बाजार छोड़ देती हैं।
जापान ने इसे साबित कर दिया है। टोक्यो-ओसाका रूट पर जहां शिंकानसेन हाई-स्पीड ट्रेन सिर्फ 2.5 घंटे में पहुंचा देती है। इस रूट पर रेलवे ने लगभग पूरी तरह से बाजार पर कब्जा कर लिया है। फ्रांस में भी यही हुआ। पेरिस ने उन सभी घरेलू छोटी दूरी की उड़ानों को बंद कर दिया, जहां 2.5 घंटे के अंदर ट्रेन से जाना संभव था। नतीजा यह कि नांते, ल्योन और बोर्डो के लिए उड़ानें पूरी तरह रद्द कर दी गईं। स्पेन में मैड्रिड से बार्सिलोना जाने वाले मुख्य हाई-स्पीड रेल रूट पर जब हाई-स्पीड ट्रेन शुरू हुई तब ट्रेन की बाजार हिस्सेदारी सिर्फ 12 फीसद से बढ़कर 48 फीसद हो गई। जब अव्लो,ओइगो और इर्यो नाम की कंपनियों को भी ट्रेन चलाने की इजाजत मिली तो ट्रेन का बाजार हिस्सा बढ़कर 73 फीसद हो गया। सुबह की चाय दिल्ली में, फोटो आगरा में और रात का खाना वापस घर पर। अब तक यह सिर्फ फिल्मी कल्पना थी लेकिन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की घोषणा ने इसे हकीकत के करीब ला खड़ा कर दिया है। वाराणसी से नई दिल्ली के बीच वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे स्टेशन के उत्तरी हिस्से को मंजूरी दे दी है। यह कोई साधारण रेल परियोजना नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के सबसे अहम शहरों में से एक है पिरोने की योजना।
गलियारा पूरा होने पर दिल्ली से आगरा तक केवल 59 मिनट में पहुंचें, कानपुर में 1 घंटा 45 मिनट में और लखनऊ में करीब 2 घंटे 12 मिनट में। दिल्ली से वाराणसी की यात्रा लगभग 3 घंटे 33 मिनट की होगी, जबकि नासिक से वाराणसी की यात्रा 1 घंटा 21 मिनट की होगी। आज जिस काशी तक पहुंचने में पूरी रात की ट्रेन यात्रा है, वहां से दिल्ली दोपहर के भोजन से पहले पहुंचें। जो लोग वाराणसी जाने के लिए समुद्री हवाई टिकट डाक टिकट हैं, उनके सामने भी अब एक नया और शायद सस्ता विकल्प होगा। यह दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, नोएडा, अयोध्या, वाराणसी, देहरादून और पटना से सिलीगुड़ी तक होगा। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे अपग्रेड करने की जानकारी दी। जरा सोचिए, आस्था की नगरी अयोध्या, संगम का शहर और बाबा विश्वनाथ की काशी, तीर्थ एक ही तेज साक्षी रेखा पर होंगे। वाराणसी से शुरुआती सिर्फ 33 मिनट और पटना करीब एक घंटे की दूरी पर रहेगा। तीर्थयात्री, समुद्र यात्री, छात्र और यात्री, हर किसी के लिए दूरी तय करने वाली यह खबर है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने 936 किलोमीटर लंबे 8 नैशनल हाइवे के निर्माण को मंजूरी दी है। कैबिनेट के फैसलों के बारे में बताते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने नेशनल हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजनाओं के विकास को मंजूरी दी है, जिसकी लागत 50,655 करोड़ रुपये की होगी।
88 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड कॉरिडोर को 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसकी कुल लागत 4,613 करोड़ रुपये होगी। यह कॉरिडोर उत्तर प्रदेश (जैसे ताजमहल, आगरा किला) और मध्य प्रदेश (ग्वालियर किला) के प्रमुख पर्यटन स्थलों से कनेक्टिविटी बढ़ाएगा। इससे आगरा और ग्वालियर के बीच की दूरी 7 प्रतिशत और यात्रा समय 50 प्रतिशत कम हो जाएगा। 6 लेन का एक्सेस-कंट्रोल वाला आगरा-ग्वालियर ग्रीनफील्ड हाइवे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में (आगरा जिले में देवरी गांव के पास) से शुरू होकर डिजाइन किमी 88-400 (ग्वालियर जिले में सुसेरा गांव के पास) तक जाएगा। खड़गपुर और मोरेग्राम के बीच 231 किलोमीटर लंबे 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल हाई-स्पीड कॉरिडोर को 10,247 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा। यह एक छोर पर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों और दूसरी ओर देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से के बीच यातायात के लिए बेहतर संपर्क प्रदान करेगा। यह गलियारा खड़गपुर और मोरेग्राम के बीच मालवाहक वाहनों के लिए मौजूदा 9 से 10 घंटे की यात्रा के समय को घटाकर 3 से 5 घंटे कर देगा।

Aakash Chopra