भारत-मलेशिया संबंध पारम्परिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण रहे हैं। भारत ने 1957 में फैडरेशन ऑफ मलाया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों देश राष्ट्रमंडल, आसियान क्षेत्रीय मंच, जी-15, जी-77, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और हिन्द महासागर जैसे विभिन्न मंचों के सदस्य भी हैं। भारत मलेशिया संबंधों को अपनी एक्ट ईस्ट नीति के मूल तत्व के रूप में देखता है। दोनों देशों के एेतिहासिक संबंध एक सहस्त्राब्दी से भी पुराने हैं जिनकी जड़ें चोल साम्राज्य के दाैर तक जुड़ी हुई हैं। चोल शासकों ने ही दक्षिण भारत और मलय प्रायदीप के बीच समुद्री व्यापार मार्गों को स्थापित किया था। मलेशिया में लगभग 29 लाख से ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो इसे दुनिया में भारतीय प्रवासियों की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश मानते हैं। इस समुदाय की भाषा तमिल है। हालांकि वहां तेलगू, मलयालम, पंजाबी और अन्य भाषाओं के लोग भी आप को मिल जाएंगे। रामायण की कथाएं भी मलेशिया की सांस्कृतिक परम्परा का हिस्सा हैं। जिनका स्थानीय रूपांतरण ‘‘हिकायत सेरी रामा’’ में देखने को मिलता है। श्री वीर हनुमान मंदिर और कुछ अन्य धार्मिक स्थल साझा सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं। 21वीं सदी में व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, डिजिटल तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों ने आपसी सहयोग बढ़ाया है। दोनों ही देशों ने आतंकवाद पर सख्त रुख अपनाया है और स्पष्ट किया है कि आतंकवाद पर डबल स्टेंडर्ड और समझौते की कोई गंजाइश नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के क्वालालंपुर पहुंचने पर जिस तरह से उनका भव्य स्वागत हुआ। वह अपने आप में अभूतपूर्व है। अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी का दर्जा दिए जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली यात्रा है। पूर्व मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के शासनकाल में दोनों देशों के संबंधों में कड़वाहट आ गई थी। महातिर मोहम्मद ने भारत के नागरिकता कानून और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का िवरोध किया था। इतना ही नहीं उन्होंने भारत के भगौड़े इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक को भी शरण दी थी।
दोनों देशों के बीच संबंधों में कड़वाहट का दौर बीत चुका है। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मोदी और मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम एक ही कार में भारतीय समुदाय के एक कार्यक्रम स्थल पर गए। भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक संबंधों में हाल के वर्षों में निरंतर प्रगति हुई है। दोनों देश अपने रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने, अपनी आर्थिक और इनोवेशन पार्टनरशिप को बढ़ाना तथा नए क्षेत्रों में अपने सहयोग का विस्तार करना चाहते हैं। भारत मलेशिया से मुख्य रूप से खाद्य तेल आयात करता है, विशेष रूप से पाम तेल जो भारत की घरेलू आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। इसके अलावा भारत मलेशिया से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, अर्धचालक से जुड़े पुर्जे, रसायन, पैट्रो रसायन उत्पाद, रबर और लकड़ी से बने सामान भी आयात करता है।
प्रधानमंत्री मोदी और अनवर इब्राहिम में बातचीत के बाद दोनों देशों में कई महत्वपूर्ण समझैते हुए। इन समझौतों में सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य देखभाल और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। दोनों देशों ने व्यापार सहयोग 8.59 बिलियन डॉलर से आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसके अलावा दोनों देश निवेश, स्थानीय मुद्रा में व्यापार, पीपल टू पीपल कनेक्टीविटी, ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा आदि क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाएंगे। भारत लगातार एक के बाद एक व्यापार समझौते कर रहा है और भारत को नए बाजार मिल रहे हैं।
दूसरी ओर भारत मलेशिया को पैट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, वाहन, इस्पात, रसायन, वस्त्र और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी सेवाएं निर्यात करता है। भारतीय दवा उद्योग मलेशिया में अच्छी पहचान रखता है, क्योंकि भारत की सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां वहां के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी तरह भारतीय तकनीकी कंपनियां मलेशिया के डिजिटल विकास में अहम भूमिका निभा रही हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार को अधिक संतुलित और टिकाऊ बनाने के लिए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते की समीक्षा की जा रही है, ताकि भारतीय उद्योगों और मलेशियाई भागीदारों दोनों को समान लाभ मिल सके। मलेशिया से भारत को कच्चे माल और रणनीतिक आपूर्ति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण लाभ मिलता है। अर्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक उद्योग में मलेशिया की वैश्विक भूमिका भारत के लिए खास मायने रखती है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया आपूर्ति शृंखला को विविध बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। वहीं मलेशिया के लिए भारत एक विशाल बाजार, तेज़ी से बढ़ी अर्थव्यवस्था और निवेश के असीम अवसरों वाला देश है। भारत की जनसंख्या, डिजिटल और निर्माण क्षमता मलेशियाई कंपनियों को आकर्षित करती है।
रणनीतिक आैर सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो मलेशिया हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मलक्का जल डमरू मध्य िवश्व के समुद्री मार्गों में से एक है। जहां से वैश्विक व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। भारत का हिन्द प्रशांत विजन आैर मलेिशया का दृष्टिकोण एक समान है, जो एक-दूसरे के पूरक हैं। समुद्री सुरक्षा को लेकर दोनों देशों में नौसैिनक सहयोग बना हुआ है। महातिर के शासन में मलेशिया पूरी तरह से चीन की गोद में बैठा था। अब उसने भी भारत के महत्व को पहचाना है। दोनों देश दक्षिणी चीन सागर और हिन्द महासागर में मुक्त नेवीगेशन और सुरक्षा सहयोग के समर्थक हैं। भारत का डििजटल भुगतान तंत्र अब दुनिया में अपनी पहचान बना चुका है। अब मलेशिया में यूपीआई के माध्यम से भी लेन-देन होने लगेगा। मलेशिया भारत के िलए दक्षिण पूर्व एशिया का गेटवे है। भारत अब बड़ी आर्थिक शक्ति है। ताजा समझौते से दोनों देशों के संबंधों को नई गति प्रदान करेंगे।
भारत-मलेशिया संबंध नई ऊंचाई पर
Summary :
भारत-मलेशिया संबंध पारम्परिक रूप से घनिष्ठ और मैत्रीपूर्ण रहे हैं। भारत ने 1957 में फैडरेशन ऑफ मलाया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। दोनों देश राष्ट्रमंडल, आसियान क्षेत्रीय मंच, जी-15, जी-77, पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और हिन्द महासागर जैसे विभिन्न मंचों के सदस्य भी हैं। भारत मलेशिया संबंधों को अपनी एक्ट ईस्ट नीति के मूल तत्व के रूप में देखता है। दोनों देशों के एेतिहासिक संबंध एक सहस्त्राब्दी से भी पुराने हैं जिनकी जड़ें चोल साम्राज्य के दाैर तक जुड़ी हुई हैं। चोल शासकों ने ही दक्षिण भारत और मलय प्रायदीप के बीच समुद्री व्यापार मार्गों को स्थापित किया था।…


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