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अराजकता के कगार पर पाकिस्तान

भारत और पाकिस्तान एक ही समय दो अलग-अलग राष्ट्र बने थे।

‘‘पाकिस्तान में चेहरे बदलते रहते हैं,
मगर आइना वही रहता है।’’
भारत और पाकिस्तान एक ही समय दो अलग-अलग राष्ट्र बने थे। पाकिस्तान की बुनियाद ही धर्म के आधार पर खड़ी हुई थी। आजादी के 75 वर्ष बाद भी पाकिस्तान में एक तरह से राजनीतिक​ स्थिरता कायम नहीं हुई। आतंकवाद की खेती को जिस देश ने सरकारी नीति बना लिया हो, वहां क्या हश्र होगा यह पूरी दुनिया देख रही है। वहां की सेना ने लोकतंत्र को बार-बार अपने बूटों तले रौंदा है। पाकिस्तान की सियासत के कई पन्ने  खून से भरे हुए हैं। सैन्य विद्रोह का एक लम्बा इतिहास है। पाकिस्तान का आवाम हमेशा आधे अधूरे लोकतंत्र में रहता है। आज पाकिस्तान दिवालिया होने की कगार पर है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी अभी तक देश के आर्थिक हालात को सुधारने मेें असहाय नजर आ रहे हैं। क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने इमरान खान को प्रधानमंत्री पद से हटाकर खुद प्रधानमंत्री बने शहबाज शरीफ का कोई दाव काम नहीं आ रहा। पाकिस्तान के सेना अध्यक्ष जनरल कमर बाजवा सीधे ही अमेरिका से अपील कर रहे हैं कि वह पाकिस्तान को बचा लें। महंगाई का यह आलम है कि हर चीज के दाम तीन गुणे हो चुके हैं। एक अमरीकी डालर के बदले पाकिस्ताान को करीब 250 रुपए देने पड़ते हैं। पाकिस्तान के पास इन दिनों ​सिर्फ नौ अरब डालर का विदेशी मुद्रा भंडार बचा है। 
आर्थिक विशेषज्ञ का कहना है हालात यही रहे तो पाकिस्तान की हालत श्रीलंका जैसी भयानक हो जाएगी। पाकिस्तान अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से 1.2 अरब डालर का ऋण मांग रहा है। पाकिस्तान पहले ही चीन और  कुछ मित्र देशों के कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष तो नहीं लगता कि पाकिस्तान की मौजूदा नीतियां उसका पैसा लौटने की गारंटी दें। वह चाहता है कि बिजली, डीजल और पैट्रोल पर जनता को मिल रही सबसिडी खत्म कर दी जाए। लेेकिन शहबाज शरीफ इसकी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। पाकिस्तान की जनता पहले ही सड़कों पर है। पाकिस्तान की सांसें इस समय गिरवी हैं, क्योंकि चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अब उसकी और  मदद करने को तैयार नहीं हैं।
इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। इमरान खान की गिरफ्तारी को लेकर चल रहे दाव-पेच के बीच भारी तनाव उत्पन्न हो गया है। इमरान खान के खिलाफ पुिलस ने एंटी टेररिज्म एक्ट की धारा-7 के तहत एफआईआर दर्ज की है। हालांकि कोर्ट ने इमरान खान को तीन दिन की राहत दी है। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने भाषण के जरिये देश की जनता को सरकार, कोर्ट और सेना के खिलाफ भड़काया। गम्भीर आरोप यह है कि वह देश में गृहयुद्ध कराने की मंशा पाले हुए हैं। इमरान और उनके समर्थक खुलेआम धमकी दे रहे हैं कि अगर इमरान खान की गिरफ्तारी हुई तो देशभर में बवाल मच जाएगा और वे इस्लामाबाद को कब्जे में ले लेंगे। इमरान और उनकी पार्टी के सांसद पुलिस को भी धमका रहे हैं कि वह राजनीतिक युद्ध का हिस्सा न बनें। इस्लामाबाद पुलिस इमरान खान को गिरफ्तार करने उनके घर तक पहुंच गई थी,  लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए उसे बैरंग वापिस लौटना पड़ा। 
इमरान खान तो अपने कट्टर समर्थक शहबाज गिल को रिमांड पर भेजने वाली जज जेवा चौधरी को खुलेआम धमकाने से बाज नहीं आ रहे। अब सबकी नजरें इमरान खान पर लगी हुई हैं। कानून के मुताबिक अगर खान पर दोष साबित होता है तो उनकी आगे की राजनीति खतरे में पड़ जाएगी। वे आगे फिर कभी पाकिस्तान में राजनीति नहीं कर पाएंगे। इमरान खान के बेहद करीबी नेता शहबाज गिल के खिलाफ देशद्रोह के आरोप में मुकद्मा दायर किया हुआ है। पाकिस्तान की सियासत का इतिहास रहा है कि जो भी वहां सत्ता में आता है वह अपने प्रतिद्वंद्वी को राजनीतिक रूप से खत्म करना चाहता है। लेकिन क्या शहबाज शरीफ ऐसा कर पाएंगे? इस बारे में भी संदेह है। दरअसल सत्ता से बाहर होने के बावजूद पाकिस्तान में इमरान खान का लोगों पर अच्छा खासा प्रभाव बना  हुआ है। पिछले महीने उनकी पार्टी पीटीआई ने पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे पंजाब में सत्ताधारी दल पीएमएल (नवाज) को उपचुनावों में मात देकर अपने विरोधियों को हैरान कर दिया था। पंजाब के उपचुनावों में सत्ताधारी दल को उम्मीद थी कि वो आसानी से जीत जाएंगे लेकिन इमरान की पार्टी ने 20 में से 15 सीटें जीतकर प्रांतीय एसैम्बली पर कब्जा कर लिया था। इस उपचुनाव के नतीजों को कई लोगों से चुनावी लड़ाई में इमरान खान की लोकप्रियता का संकेत बताया और ऐसा कहा जाने लगा कि यदि समय से पहले चुनाव कराए जाते हैं तो उनका पलड़ा भारी रह सकता है। 
इमरान खान 2018 के चुनाव में जीत कर प्रधानमंत्री बने थे मगर अपने कार्यकाल के आखिरी समय में पा​किस्तान की ताकतवर सेना के साथ उनके मतभेद पैदा हो गए थे। इमरान खान इस समय अमेरिका के कट्टर विरोधी बने हुए हैं जबकि वह भारत की नीतियों के समर्थक नजर आते हैं। इमरान खान भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की प्रशंसा कर रहे हैं और अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत के रूस सेे सस्ता तेल खरीदने के मसले पर तारीफ कर रहे हैं, जबकि शहबाज शरीफ सरकार का रुख अमेरिका समर्थक है। इमरान खान भारत को आजाद मुल्क बता रहे हैं जबकि शहबाज सरकार को कमजोर करार दे रहे हैं। कुल मिलाकर वो शहबाज सरकार को अमेरिका के हाथ की कठपुतली करार दे रहे हैं। पाकिस्तान का भविष्य क्या होगा यह कोई नहीं जानता लेकिन इतना तय है कि पाकिस्तान इस समय गृहयुद्ध की कगार पर है और ऐसे हालात कभी भी पैदा हो सकते हैं।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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