नीट समेत एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने के बाद देश की राजनीति में तूफान उठ खड़ा हुआ था। काकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा सुधारों के लिए अनेक कदम उठाए गए। एक तरफ संसद ने सार्वजनिक परीक्षाएं संशोधन विधेयक 2026 पारित कर कानून को सख्त बनाया था। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया। जबकि संगठित अपराध या पेपर लीक गिरोह पर 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में हाई पावर टास्क फोर्स गठित की गई। यह टास्क परीक्षा की पद्धति को भरोसेमंद, पारदर्शी और एडवांस टेक्नोलाजी युक्त बनाने के लिए सिफारिशें देगी। इस टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, आईआईटी चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, आई.वी. के पूर्व निदेशक तपन डेका भी शामिल हैं। नंदन नीलेकणि टेक्नोलोजी क्षेत्र के दिग्गज हैं। वे इंफोसिस के सह संस्थापक हैं और उन्हें आधार कार्ड के जनक के तौर पर भी जाना जाता है। वर्ष 2009 में प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह ने उन्हें कैबिनेट रैंक देते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण का पहला अध्यक्ष बनाया था।
यूपीआई के तकनीकी ढांचे को बढ़ावा देने में भी उनका अहम योगदान रहा। पेपर लीक को रोकने के लिए नवीनतम तकनीक बहुत जरूरी है। नंदन नीलेकणि ने अब एक अहम सुझाव दिया है। नीलेकणि के सुझाव के मुताबिक, परीक्षा एजेंसियों को सवालों का एक बड़ा बैंक तैयार करना चाहिए। परीक्षा के दिन इसी बैंक से प्रश्नपत्र बनाया जा सकता है। इससे पहले से तय प्रश्नपत्र के लीक होने का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से परीक्षा वाले दिन प्रश्नपत्र तैयार किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सवालों के स्तर और परीक्षा की निष्पक्षता का ध्यान रखना होगा।
नंदन नीलेकणि ने कहा, ‘हमें ‘एक’ क्वेश्चन पेपर की जरूरत ही क्यों है? क्योंकि जैसे ही कोई क्वेश्चन पेपर होता है, तो उसे बेचने का आर्थिक लालच पैदा हो जाता है… इसलिए, इसका सॉल्यूशन यह है कि सवालों का एक बहुत बड़ा बैंक हो और उस दिन के लिए क्वेश्चन पेपर आखिरी समय में तैयार किया जाए। इससे ‘एक’ क्वेश्चन पेपर वाला सवाल ही खत्म हो जाएगा और इसके लिए कोई आर्थिक लालच भी नहीं रहेगा।’ उन्होंने देश में कम्प्यूटर आधारित परीक्षा का दायरा बढ़ाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने करीब 1.5 लाख ऐसे स्थानों का जिक्र किया जहां कम्प्यूटर पर परीक्षा कराई जा सकती है। अभी परीक्षा केन्द्र वेंडर्स को लीज पर दिए जाते हैं क्योंकि सरकार कम्प्यूटर आधारित परीक्षा पर शिफ्ट होने की योजना बना रही है। इसीलिए उसे सुरक्षा, आईटी टूल्स, इंटरनेट और दूसरी बुनियादी सुविधाओं के साथ बुनियादी ढांचा मजबूत करना होगा। अगर पेपर लीक की समस्या को प्रणालीगत तरीके से देखा जाए और इसकी जड़ तक पहुंचा जाए तो इसका समाधान हो सकता है।
‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में सुधार और उसे मजबूत बनाने’ पर हाल ही में आई पार्लियामेंट्री कमेटी की रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि एनटीए एक बड़ा, अलग-अलग तरह का और लगातार अपडेट होने वाला क्वेश्चन बैंक बनाने में इन्वेस्ट करे, जिसका इस्तेमाल क्वेश्चन सेट करने वालों की पहले से जानकारी के बिना पेपर सेट करने के लिए किया जा सके, और फाइनल क्वेश्चन पेपर परीक्षा के बहुत करीब सेट किए जाने चाहिए, जिसमें क्वेश्चन बैंक से डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके सवाल लिए जाएं और सिर्फ एक्सपर्ट्स द्वारा जांचे जाएं। इसमें कहा गया है कि लंबे समय में पेपर लीक के खिलाफ क्वेश्चन बैंक में इन्वेस्टमेंट सबसे सही बचाव है और एक ही क्वेश्चन सेट का बार-बार इस्तेमाल या हर साल एग्ज़ामिनर से नए क्वेश्चन पेपर बनवाने का तरीका एग्ज़ाम की ईमानदारी के लिए खतरा हो सकता है। सरकार पेन-एंड पेपर मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्टिंग की ओर जाने की योजना बना रही है।
नीलेकणि की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी इस माह के अंत तक अपनी अंतिम रिपोर्ट दे देगी। टास्क फोर्स से मिले सुझावों की समीक्षा की जाएगी और फिर उन पर आगे बढ़ा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिक्षा मंत्रालय पेपर लीकेज रोकने के लिए मास्टर प्लान लागू करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। देखना है सरकार किस तरह आगे बढ़ती है। एनटीए की साख तभी बचेगी जब परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से हाईटेक बना दिया जाएगा।
पेपर लीक और नीलेकणि
Summary :
नीट समेत एक के बाद एक कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक होने के बाद देश की राजनीति में तूफान उठ खड़ा हुआ था। काकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद परीक्षा सुधारों के लिए अनेक कदम उठाए गए। एक तरफ संसद ने सार्वजनिक परीक्षाएं संशोधन विधेयक 2026 पारित कर कानून को सख्त बनाया था। पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने पर 10 साल तक की जेल का प्रावधान किया गया। जबकि संगठित अपराध या पेपर लीक गिरोह पर 10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी…


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