आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है, जिसके तहत देश के किसी भी हिस्से में अलगाववाद, आतंकवाद और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा। हालांकि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों को काफी सफलता प्राप्त हुई है लेकिन इस सफलता के बावजूद घर के अंदर पनप रहे आतंकवाद पर पूरी तरह से नियंत्रण में नहीं पाया जा सका है। इस स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसी आईएसआई शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, देश के 14 राज्यों में एक साथ चलाए गए अभियान में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया है। नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की गई हैं और 200 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हुई है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है। शहजाद भट्टी जो आतंक की भट्टी के रूप में प्रसिद्ध हो चुका था, का नेटवर्क पाकिस्तान से संचालित और आईएसआई समर्थित आतंकी सिंडिकेट है। इस नेटवर्क पर भारत में ग्रेनेड, आईईडी और पैट्रोल बम हमलों के साथ टारगेटेड हत्याओं में शामिल होने का आरोप है। बताया गया कि नेटवर्क स्थानीय सहयोगियों को पैसे देकर पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की रेकी करवाता था। इसके अलावा जासूसी के लिए निगरानी कैमरे भी लगवाए जाते थे। ये ऐसा मॉड्यूल था जो पाकिस्तान से चलाया जा रहा था और इसे चलाने वाला था शहजाद भट्टी।
पाकिस्तान का वो गैंगस्टर जो उस वक्त भारत में लोगों के लिए बहुत जाना पहचाना नहीं था, मगर जांच एजेंसियों की रडार पर काफी पहले से था। जांच में सामने आया कि शहजाद भट्टी सिर्फ अपराधियों का नेटवर्क नहीं चला रहा, वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती, रेकी, हथियारों की सप्लाई और आतंकी गतिविधियों का एक बड़ा मॉड्यूल तैयार कर रहा था। भारत में दिल्ली से लेकर गुजरात और राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश तक 14 राज्यों में ये नेटवर्क फलफूल रहा था। भट्टी का नेटवर्क ‘क्राइम-टेरर हाइब्रिड मॉडल’ है। भट्टी ने स्थानीय युवाओं, अपराधी तत्वों और छोटे मॉड्यूलों को जोड़कर इस मॉडल को मजबूती दी है। इतना ही नहीं सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्र तो भट्टी गैंग के नेटवर्क के तार तहरीक-एक-तालिबान (हिंदुस्तान) मॉड्यूल से भी जुड़े बताते हैं। पंजाब में भट्टी सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को गुमराह करता है और स्थानीय गैंग व अपराधी तत्व भी इसी के जरिये भट्टी से जुड़ रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिये स्थानीय गुर्गों की भर्ती का खेल भट्टी अभी भी खेल रहा है। दरअसल, पंजाब में भट्टी का नेटवर्क साल 2025 में कई घटनाओं के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर आया।
सुरक्षा एजेंसियां भट्टी के नेटवर्क को ‘क्राइम-टेरर हाइब्रिड मॉडल’ मान रही हैं। भट्टी ने स्थानीय युवाओं, अपराधी तत्वों और छोटे मॉड्यूलों को जोड़कर इस मॉडल को मजबूती दी है। इतना ही नहीं सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्र तो भट्टी गैंग के नेटवर्क के तार तहरीक-ए-तालिबान (हिंदुस्तान) मॉड्यूल से भी जुड़े बताते हैं। पंजाब में भट्टी सोशल मीडिया के जरिये युवाओं को गुमराह करता है और स्थानीय गैंग व अपराधी तत्व भी इसी के जरिये भट्टी से जुड़ रहे हैं। सोशल मीडिया के जरिये स्थानीय गुर्गों की भर्ती का खेल भट्टी अभी भी खेल रहा है। दरअसल, पंजाब में भट्टी का नेटवर्क साल 2025 में कई घटनाओं के बाद जांच एजेंसियों के रडार पर आया। मार्च 2025 में जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर ग्रेनेड हमले की जांच में उसका नाम उभरा। नवंबर 2025 में गुरदासपुर सिटी पुलिस थाने के बाहर ग्रेनेड हमले के मामले में भी दिल्ली पुलिस ने उसके मॉड्यूल से जुड़े तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें पंजाब का हरगुनप्रीत सिंह भी शामिल था। इसके अलावा, अंबाला के बलदेव नगर में हुए आईईडी कार बम विस्फोट के मामले में दाखिल चार्जशीट में भी भट्टी का नाम बताया गया है। वहीं, बब्बर खालसा इंटरनेशनल के साथ कथित तौर पर मिलकर हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ पुलिस स्टेशन पर किए गए ग्रेनेड हमले में भी उसे कथित मास्टरमाइंड बताया गया है।
भट्टी पंजाब को दहलाने और यहां का माहौल खराब करने के लिए जिस तरह से काम कर रहा है, वह थोड़ा अलग है। पंजाब में भले ही वह गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ बनाने में कामयाब हो गया है मगर उसके गुर्गे एक पारंपरिक गैंग की तरह काम नहीं करते। पुलिस सूत्र बताते हैं कि भट्टी अलग-अलग स्थानीय अपराधियों, छोटे गैंगस्टरों और अन्य युवाओं को सोशल मीडिया के जरिये काम सौंपता है। कुछ राशि उन तक एडवांस पहुंच जाती है और बाकी काम होने के बाद। यानी पाकिस्तान में बैठा भट्टी पंजाब में स्थानीय गुर्गों के नेटवर्क और पहले से तैयार मौजूदा अपराधी ढांचे का इस्तेमाल कर अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देता है। शहजाद भट्टी का काम करने का तरीका (मोडस अपरेंडी) पूरी तरह से डिजिटल और मॉड्यूल-बेस्ड है। वह इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे एन्क्रिप्टेड एप्स के जरिये पंजाब के युवाओं को पैसों का लालच देकर भर्ती करता है। शूटर और लॉजिस्टिक्स संभालने वालों को एक-दूसरे के बारे में भनक तक नहीं होती। वारदात को अंजाम देने के बाद वीडियो रिकॉर्ड कर भट्टी को भेजा जाता है, जिसे वह सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दहशत फैलाता है और व्यापारियों से मोटी रंगदारी वसूलता है।
शहजाद भट्टी के साथ-साथ गोल्डी बराड़ भी पंजाब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है क्योंकि उसका नेटवर्क विदेश में बैठे हैंडलर और पंजाब में सक्रिय स्थानीय गुर्गों के मॉडल पर काम करता है। पुलिस के सामने चुनौती केवल बराड़ को गिरफ्तार करने की नहीं बल्कि उसके पूरे नेटवर्क को तोड़ने की है। जनवरी 2026 में लुधियाना पुलिस ने बराड़ से कथित तौर पर जुड़े एक अंतर्राज्यीय वसूली और हथियार नेटवर्क का भंडाफोड़ कर 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। बराड़ का नाम सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड में प्रमुख आरोपी के तौर पर सामने आया था।
पंजाब को दहलाने की हाईब्रिड साजिश
Summary :
आतंकवाद के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रखी है, जिसके तहत देश के किसी भी हिस्से में अलगाववाद, आतंकवाद और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा। हालांकि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सुरक्षा बलों को काफी सफलता प्राप्त हुई है लेकिन इस सफलता के बावजूद घर के अंदर पनप रहे आतंकवाद पर पूरी तरह से नियंत्रण में नहीं पाया जा सका है। इस स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान स्थित खुफिया एजेंसी आईएसआई शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, देश…


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