‘जिंदगी की जंग में हर किसी को
बस यूं ही तन्हा निकलना है
आवाजें हैं राहों में किस्म-किस्म
की पर बेजुबां सा चलना है’
मोदी सरकार 3-0 देश में अब अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने जा रही है, केंद्र सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्र दावा करते हैं कि मोदी सरकार को एक नया चेहरा-मोहरा देने की कवायद शुरू हो चुकी है, मोदी 20 मई को अपनी विदेश यात्रा से वापिस लौटे और अगले ही दिन उन्होंने अपने आवास ‘सेवा तीर्थ’ पर अपने मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक ली। कहते हैं यह बैठक कोई साढ़े चार घंटे तक चली, जिसमें कैबिनेट सचिव राजीव गाबा और नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक लाहिरी के मार्गदर्शन में तमाम मंत्रियों और उनके मंत्रालयों के कामकाज की एक विस्तृत रिपोर्ट पीपीटी के माध्यम से पीएम के समक्ष प्रस्तुत की गई।
सूत्र यह भी बताते हैं कि मंत्रियों के उनके कामकाज के आधार पर बकायदा अंक भी दिए गए थे। जिन मंत्रालयों के कामकाज को सबसे उम्दा आंका गया उन्हें ‘ए प्लस’ की रैंकिंग दी गई। सूत्रों की मानें तो महज़ 5 से 6 मंत्रालय ही ‘ए प्लस’ की रैंकिंग हासिल कर पाने में कामयाब रहे। ‘ए प्लस’ रैंकिंग में जेपी नड्डा का स्वास्थ्य मंत्रालय, मनोहर लाल खट्टर का पॉवर मंत्रालय, प्रह्लाद जोशी के उपभोक्ता मामले व खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, किशन रेड्डी के कोयला मंत्रालय व नितिन गडकरी के सड़क परिवहन मंत्रालय को रखा गया।
जिन मंत्रालयों के कामकाज में आमूल-चूल बदलाव की बात की गई वह है श्रम, िशक्षा, कौशल विकास मंत्रालय आदि। मंत्रियों से कहा गया है कि वे अपने अनावश्यक खर्चों में कटौती करें, विदेश यात्राओं और विदेशी समिट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाएं। महीने के 5 दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने मंत्रालयों के कार्यक्रम रखें और जनता से सीधा संवाद स्थापित करने की कोशिश करें। हर मंत्रालय अपनी जवाबदेही के प्रति ज्यादा सजग रहे। जिन क्षेत्रों में मंत्रालय अपने कार्यक्रम लगाने में असमर्थ हो रहा हो वहां पार्टी संगठन से कह कर अपने कार्यक्रम लगवाएं। हर मंत्रालय से एक ‘विजन रिपोर्ट’ भी तैयार करने को कहा गया है, जिसके आधार पर वह अपने मंत्रालय के लक्ष्य व मानक तय कर सकें। कहा जाता है कि मंत्रियों के साथ अपनी इस बैठक में पीएम ने अपने कुछ सहयोगी मंत्रियों की खुल कर तारीफ की तो, कईयों को कड़वे नसीहतों के घूंट भी पिलाए गए।
मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल कब तक?
अब लाख टके का सवाल यह है कि आखिरकार मोदी मंत्रिमंडल का नया चेहरा-मोहरा देखने को कब मिलेगा? तो सूत्र बताते हैं कि इसके लिए अभी और थोड़ा इंतजार करना होगा क्योंकि 15 जून तक तो अधिमास या मलमास चल रहा है, इस अवधि में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता। 18 जून को राज्यसभा की 24 सीटों के लिए मतदान होने हैं। जुलाई के आखिर में ही संसद के मानसून सत्र की सुगबुगाहट शुरू हो जाती है तो शायद इस तारीख के आसपास मंत्रिमंडल फेरबदल की कवायद को सिरे चढ़ाया जा सकता है।
अगले ही वर्ष मार्च में यूपी-उत्तराखंड समेत पांच राज्यों के तथा नवंबर माह में गुजरात के चुनाव होने वाले हैं। सो, कयास लगाए जा रहे हैं कि सियासी बाजीगर मोदी इन चुनावी राज्यों के सामाजिक समीकरणों को खंगालते हुए अपने मंत्रि परिषद को अंतिम रूप दे सकते हैं। विपक्ष कुछ केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग पहले से करता आया है, सो मोदी के लिए भी यह नायाब मौका होगा उनसे पिंड छुड़ाने का। इसके अलावा कई सीनियर मंत्री 2014 की पहली मोदी सरकार से लगातार उनके कैबिनेट का हिस्सा रहे हैं, इनमें से कई 70 वर्ष की आयु भी पार कर चुके हैं, इनमें से भी कई मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है।
इसके अलावा भाजपा की नज़र अब एनडीए में नए गठबंधन साथियों को शामिल करवाने पर टिकी है। अगर शरद पवार मान जाते हैं तो उनकी पुत्री सुप्रिया सूले मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा हो सकती हैं, बात तो उद्धव ठाकरे से भी चल रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी से भाजपा लगातार संपर्क में है, अगर हेमंत सोरेन की भाव-भंगिमाएं यही रही तो झामुमो भी एनडीए का नया गठबंधन साथी हो सकता है। भाजपा रणनीतिकार डीएमके से भी लगातार संपर्क में हैं। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और पंजाब में आम आदमी पार्टी में एक बड़ी टूट को अंजाम दिया जा सकता है। अगर सब भाजपा की रणनीतियों व उनकी भावनाओं के अनुरूप चला तो फिर इन दलों से आए लोगों को भी दिल्ली में मंत्री बनाने की मजबूरी हो सकती है।
सूत्रों की मानें तो स्वयं पीएम चाहते हैं कि ‘उनकी पार्टी के जो नेतागण लगातार 10-12 सालों से दिल्ली में सत्ता का सुख भोग रहे हैं अब उन्हें जमीन पर उतारा जाना जरूरी है, यानी इन्हें संगठन की सेवा में लगाया जाए।’ सो, मोदी मंत्रिमंडल का आने वाला फेरबदल एक नई शुरूआत का आगाज़ हो सकता है।
‘लापता उमर’ की तलाश में भाजपा
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की इन दिनों कोई थाह नहीं मिल पा रही है कि आखिरकार वे हैं कहां? भाजपा ने तो बकायदा उनके लिए एक ऑनलाइन ‘लुक आउट’ नोटिस भी जारी कर दिया है। वहीं उनकी पार्टी नशनल कांफ्रेंस हो या सहयोगी दल कांग्रेस इनको भी इस बात का ज़रा भी इल्म नहीं कि कई मैराथन दौड़ में हिस्सा लेने और पर्यटन के नाम पर देशभर में घूम-घूम कर जम्मू-कश्मीर का अलख जगाने वाले उमर यूं अचानक आखिर गायब कहां हो गए? उमर के बचाव में उनके 90 वर्षीय पिता फारूक अब्दुल्ला खुल कर सामने आए हैं, पर वे भी फिलहाल उमर के बारे में यह बता पाने में असमर्थ हैं कि आखिरकार इन दिनों उमर हैं कहां?
इसी बीच सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कांग्रेस ने भी एक अलग मोर्चा खोल दिया है, प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं के आरोप हैं कि उमर गठबंधन की सरकार चलाने में कांग्रेस की उपेक्षा कर रहे हैं, सो इन नेताओं ने दिल्ली से उमर सरकार से अलग होने की बात की है। उमर की असली दिक्कत दरअसल यह है कि इन दिनों वे अपने गठबंधन साथियों से ज्यादा अपने विरोधियों की चिंता कर रहे हैं, वे दिल्ली नीत भाजपा सरकार से जहां मेल-जोल बढ़ाने में जुटे हैं, वहीं राज्य के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से भी अपने संबंधों को बेहतर धार देने में जुटे हैं, जिन उप राज्यपाल पर अक्सर वे राज्य में एक समानांतार सरकार चलाने के आरोप लगाते रहे हैं।
क्या है अदानी का ट्रंप कनेक्शन?
गौतम अदानी, उनके भतीजे सागर अदानी और उनकी कंपनी ग्रीन एनर्जी को अमेरिका में अभयदान मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं। उन्हें वहां कोर्ट केस से बरी कराने में और उनके ऊपर चल रहे तमाम मामले खारिज करवाने में ट्रंप के आंख-नाक-कान माने जाने वाले वकील रॉबर्ट जिउफ्रा जूनियर की एक महती भूमिका रही है। अदानी पर यह मामला अमेरिका में बाइडन सरकार के जमाने से चल रहा था। जब डोनाल्ड ट्रंप के चहेते व अमेरिका के मशहूर वकील जिउफ्रा ने अदालत में अपने 100 से ज्यादा स्लाइड वाला प्रेजेंटेशन दिया तो इस पर कोर्ट भी एक बार हक्का-बक्का रह गई थी। जिउफ्रा अपनी दलीलों से यह साबित करने में सफल रहे कि अदानी के खिलाफ बुनियादी सबूतों का अभाव है। और मजे की बात तो यह कि जिउफ्रा ने कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत अपने अंतिम स्लाइड में यह प्रस्ताव भी दे डाला कि अगर उनके मुवक्किलों को आरोप मुक्त कर दिया जाता है तो अदानी अमेरिका में 10 अरब डालर का निवेश करेंगे, जिससे यहां कम से कम 15000 नौकरियों का सृजन होगा।
सनद रहे कि रॉबर्ट जिउफ्रा अमेरिका की मशहूर लॉ फर्म ‘सुलिवान एंड क्रॉमवेल’ के सह संस्थापक हैं और वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी हैं। बहरहाल, ‘सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन’ जो इस मामले को देख रहा है, इसने अदानी पर 6 करोड़ और इनके भतीजे सागर अदानी पर 12 करोड़ डॉलर का जुर्माना भी लगाया है।
…और अंत में
झारखंड में भाजपा एक ओर तो पिछले काफी समय से हेमंत सोरेन की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रही है वहीं कहीं अंदरखाने से वहां अपने पार्टी संगठन को भी चुस्त-दुरूस्त करने में जुटी है। बंगाल का अभेद्य किला फतह करने के बाद अभी अनौपचारिक रूप से भाजपा महासचिव व एक कुशल संगठनकर्ता सुनील बंसल को यह महती जिम्मेदारी सौंपी गई है कि ‘वह झारखंड में भाजपा को एक नया चेहरा-मोहरा देने के काम में जुट जाएं।’ कहते हैं बंसल से यह भी कहा गया है कि ‘वे झारखंड के दो आदिवासी दिग्गज भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी व अर्जुन मुंडा से दीगर किसी एक नए चेहरे पर दांव लगाए और उन्हें झारखंड के भगवा नेतृत्व के लिए तैयार करें।’
रिपोर्ट कार्ड बताएगा मंत्रियों का भविष्य !
Summary :
‘जिंदगी की जंग में हर किसी को बस यूं ही तन्हा निकलना है आवाजें हैं राहों में किस्म-किस्म की पर बेजुबां सा चलना है’ मोदी सरकार 3-0 देश में अब अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने जा रही है, केंद्र सरकार से जुड़े विश्वस्त सूत्र दावा करते हैं कि मोदी सरकार को एक नया चेहरा-मोहरा देने की कवायद शुरू हो चुकी है, मोदी 20 मई को अपनी विदेश यात्रा से वापिस लौटे और अगले ही दिन उन्होंने अपने आवास ‘सेवा तीर्थ’ पर अपने मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक ली। कहते हैं यह बैठक कोई साढ़े चार घंटे तक चली, जिसमें…


Download Android App
Download iOS App



