तुलसी गाबार्ड का इस्तीफा !

Summary :

एक तरफ जब अमेरिकी विदेश मन्त्री श्री मार्को रूबियो भारत की यात्रा पर आये हुए हैं तो दूसरी तरफ उनकी देश की भारतीय मूल की उनकी कैबिनेट सहयोगी राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग की निदेशक श्रीमती तुलसी गाबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने इस्तीफा शुक्रवार को दिया और इसका कारण अपने पति की गंभीर बीमारी बताया मगर पूरी दुनिया जानती है कि ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर उनके राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ गंभीर मतभेद चल रहे थे। वह इस युद्ध के खिलाफ थीं और ट्रम्प सरकार के सामने यह खुलासा कर चुकी थीं कि ईरान के पास किसी…

एक तरफ जब अमेरिकी विदेश मन्त्री श्री मार्को रूबियो भारत की यात्रा पर आये हुए हैं तो दूसरी तरफ उनकी देश की भारतीय मूल की उनकी कैबिनेट सहयोगी राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग की निदेशक श्रीमती तुलसी गाबार्ड ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्होंने इस्तीफा शुक्रवार को दिया और इसका कारण अपने पति की गंभीर बीमारी बताया मगर पूरी दुनिया जानती है कि ईरान-अमेरिका युद्ध को लेकर उनके राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ गंभीर मतभेद चल रहे थे। वह इस युद्ध के खिलाफ थीं और ट्रम्प सरकार के सामने यह खुलासा कर चुकी थीं कि ईरान के पास किसी प्रकार की परमाणु आयुध सामग्री नहीं है और उसका परमाणु कार्यक्रम समाप्त हो चुका है। उन्होंने पिछले महीने ही यह खुलासा किया था और बताया था कि ईरान ने पिछले वर्ष तभी परमाणु कार्यक्रम रद्द कर दिया था जब जून 2025 में उसकी अमेरिका व इजराइल के साथ 12 दिन की भीषण लड़ाई हुई थी। जबकि इसके समानान्तर श्री ट्रम्प कह रहे थे कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखे हुए है और अमेरिका का उसके खिलाफ युद्ध का लक्ष्य परमाणु कार्यक्रम रद्द करना है।
वास्तविकता यह थी कि विगत 28 फरवरी को जब अमेरिका व इजराइल ने मिलकर ईरान पर युद्ध थोपा था तो ट्रम्प ने कहा था कि उनका लक्ष्य ईरान में पूरी सत्तात्मक व्यवस्था को बदलना है अर्थात वह इस देश का निजाम बदलना चाहते थे। इस सिलसिले में युद्ध शुरू होते ही 29 मई को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या भी अमेरिकी व इजराइली सेनाओं द्वारा कर दी गई मगर ईरान में सत्ता के चरित्र पर कोई असर नहीं पड़ा और आयतुल्ला की जगह ईरानी जनता ने नये नेता का चयन कर लिया और सरकार पूर्व की भांति ही चलती रही। तब श्री ट्रम्प ने कहना शुरू किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरे पश्चिम एशिया के स्थायित्व व शान्ति के लिए खतरा है अतः युद्ध का लक्ष्य इसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना है परन्तु जब उन्हीं की सरकार की राष्ट्रीय गुप्तचर विभाग की प्रमुख तुलसी गाबार्ड ने यह घोषणा कर दी कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक वर्ष पहले ही समाप्त हो चुका है तो श्री ट्रम्प को बगले झांकने के लिए मजबूर होना पड़ा था लेकिन इसके बाद से कयास लगाये जा रहे थे कि श्रीमती गाबार्ड अपने पद पर मुश्किल से ही टिकें क्योंकि राष्ट्रपति के साथ उनके मतभेद मुखर हो चुके हैं। श्रीमती गाबार्ड ट्रम्प प्रशासन की चौथी एेसी कैबिनेट अधिकारी हैं जिन्होंने उनके दूसरे कार्यकाल के दौरान इस्तीफा दिया है। उनसे पहले अमेरिका के राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी विभाग के प्रमुख श्री जो केन्ट ने मार्च महीने में इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने इस्तीफा देते समय कहा था कि उनकी आत्मा ईरान के विरुद्ध युद्ध करने की गवाही नहीं देती है।
इसी मार्च महीने के अन्त में श्री ट्रम्प ने अपनी कैबिनेट के गृह सुरक्षा मन्त्री क्रिस्टी नोएम का इस्तीफा ले लिया था। नोएम की आव्रजन समस्या के उभरने पर भारी आलोचना हुई थी हालांकि अमेरिकी आव्रजन नीति को बहुत सख्त बनाने का फैसला श्री ट्रम्प का ही था। इसके अलावा अमेरिका में जेफरी एपस्टीन फाइल्स का विवाद उठने के बाद अटार्नी जनरल पाम बोंडी ने भी इस्तीफा दे दिया था। अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा यह मामला ठीक ढंग से न संभाले जाने के विवाद के चलते उन्होंने इस्तीफा दिया था। वहीं अप्रैल महीने में अमेरिका के श्रम मन्त्री लोरी शावेज-डिरेमर ने भी त्यागपत्र दे दिया था। अतः श्री ट्रम्प के प्रशासन में पिछले दो महीनों के दौरान ही ये इस्तीफे हुए और सभी ईरान से युद्ध शुरू होने के बाद हुए। इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि पश्चिम एशिया में जो संकट श्री ट्रम्प ने अपनी नीतियों के चलते शुरू किया है उसका असर खुद उनके अपने देश में कितना गहरा है। श्री ट्रम्प के लिए घरेलू मोर्चे पर सबसे बड़ी चुनौती आगामी नवम्बर महीने में होने वाले मध्यावधि चुनाव हैं जिन्हें लेकर अमेरिकी राजनीति करवटें ले रही है और वहां की संसद से लेकर सड़कों तक पर इस बारे में चर्चा तेज हो रही है। अपने देश में श्री ट्रम्प की लोकप्रियता में रोजाना गिरावट आ रही है। यह आम जनता में घटकर अब 35 प्रतिशत रह चुकी है जबकि उनकी खुद की रिपब्लिकन पार्टी में भी उनके समर्थकों की संख्या में कमी दर्ज हुई है।
श्रीमती गाबार्ड काफी अनुभवी मानी जाती हैं और डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व कांग्रेस सदस्य भी रही हैं। वह हवाई प्रान्त से कांग्रेस की सदस्य थीं। वह अमेरिका द्वारा विदेशों में युद्ध लड़ने के खिलाफ रही हैं। मगर जब विगत फरवरी माह के अन्त में अमेरिका ने ईरान से युद्ध लड़ने की घोषणा की तो उनका पक्ष कमजोर हो गया। हालांकि श्रीमती गाबार्ड इस मसले पर चुप रहीं कि क्या उन्हें ईरान द्वारा फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग को बन्द किये जाने का अन्दाजा था और क्या उन्होंने इस बारे में ट्रम्प सरकार को आगाह किया था? मगर अमेरिकी सीनेट की गुप्तचर समिति को उन्होंने लिखित रूप से बता दिया था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पुनः शुरू करने का कोई इरादा नहीं है। मगर उन्होंने कभी भी ईरान के विरुद्ध युद्ध छेड़ने में अपनी भूमिका नहीं बताई और साफ कहा कि यह राष्ट्रपति का अपना फैसला था। इससे लगता है कि अमेरिकी घरेलू राजनीति नवम्बर महीने के आते-आते कोई नया रंग ले सकती है मगर श्री ट्रम्प इस मोर्चे पर काफी सतर्क लगते हैं और उन्होंने ईरान से युद्ध विराम करने के बाद पुनः युद्ध शुरू करने के इजराइल के इरादों से नाइत्तेफाकी दिखानी शुरू कर दी है।

Aditya Chopra

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