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फिर शेख हसीना की सरकार

बंगलादेश की आजादी की लड़ाई के अग्रदूत रहे और मुक्ति संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाने वाले बंग बंधु शेख मुज्जीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना लगातार चौथी बार और कुल पांचवीं बार देश की प्रधानमंत्री बनने जा रही है। बंगलादेश में हुए आम चुनावों में विपक्ष द्वारा बायकाट किए जाने से शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का चुनाव जीतना लगभग तय माना जा रहा था। उनकी पार्टी को 300 संसदीय सीटों में से 223 सीटें हासिल हुई हैं। मुख्य विपक्षी बंगलादेश नैशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने इन चुनावों को धोखा बताया है। अधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि चुनावों में केवल 40 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाला। शेख हसीना पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बनी थी और 2009 में वह फिर से प्रधानमंत्री बनी। उसके बाद से वह सत्ता में ही है। तमाम आलोचनाओं के बावजूद शेख हसीना ने अपने नाम नया रिकार्ड दर्ज कर ​लिया है जहां वह दुनिया की सबसे लम्बे समय तक महिला प्रधानमंत्री रहने वाली नेता बन गई है।
स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत में 16 वर्ष तक राज किया जबकि जर्मनी की चांसलर रही एंजिला मर्केल ने भी 16 वर्ष तक शासन किया। शेख हसीना 20 साल शासन कर चुकी है और 2028 तक बंगलादेश की कमान उनके हाथ में ही रहेगी। बंगलादेश के चुनावों पर अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्तियों की नजरें लगी हुई थी कि भारत की मित्र शेख हसीना की ही सरकार बने। यद्यपि विपक्ष विहीन चुनावों में शेख हसीना आसानी से चुनाव जीत गई है लेकिन उनकी चुनौतियां कम नहीं होने वाली। पिछले साल 28 अक्तूबर को विपक्ष की रैली हिंसक होने के बाद करीब 10 हजार से ज्यादा लोग जेल भेजे गए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया भ्रष्टाचार के आरोपों में हाऊस अरेस्ट है। विपक्ष शेख हसीना पर ​सियासी प्रतिशोध लेने के आरोप लगा रहा है। खालिदा जिया के बेटे जाे कि बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष है। 2008 से ही लंदन में है। तारिक रहमान ने वहीं से घोषणा की है कि उनकी पार्टी का आंदोलन जारी रहेगा। वे हिंसा और हमले की साजिशों के आरोपों को बेबुनियाद ठहरा रहे हैं। 2004 में शेख हसीना की रैली पर ग्रेनेड हमला हुआ था। इस हमले में वह घायल हुई थी और 20 लोगों की मौत हो गई थी। इस हमले की साजिश रचने के मामले में तारिक रहमान को दोषी ठहराया गया था। शेख हसीना समर्थक नेताओं का कहना है कि बंगलादेश में राजनीतिक स्थरता के लिए सख्त कदमों की जरूरत है।
दूसरी तरफ शेख हसीना के शासन की कई उपलब्धियां भी हैं। एक तरफ उन्होंने देश में कट्टरपंथी ताकतों को किनारे लगाया और लोकतांत्रिक ताकतों को प्रोत्सा​हित किया। उन्होंने देशवासियों के मन में नई उम्मीदें पैदा की और उनमें आत्मविश्वास पैदा किया। बंगलादेश एक समय में दुनिया का सबसे गरीब देश था लेकिन बंगलादेश ने अब कई आर्थिक सफलताएं प्राप्त की हैं। बंगलादेश अब दुनिया की सबसे तेज वृद्धि दर वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। 10 वर्षों में बंगलादेश में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर तिगुनी हो गई है और 2.5 करोड़ लोग गरीबी की दलदल से बाहर आए हैं। बंगलादेश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा उत्पादक देश है। सबसे बड़ी बात यह है कि शेख हसीना भारत को अपना मित्र मानती है। उन्होंने भारत की तरह ही आर्थिक उदारीकरण की नीतियों को अपनाया। जिसके चलते बंगलादेश में भारी मात्रा में विदेशी निवेश हुआ। सन् 1975 में जब उनके पिता और परिवार की हत्या कर दी गई थी उस समय वह दिल्ली में पंडारा रोड पर अपने बच्चों के साथ रह रही थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने उनकी काफी मदद की थी। शेख हसीना जानती है कि अगर भारत उनके साथ है तो वह पश्चिम के किसी भी बड़े प्रतिबंधों से निपट सकती है। जिस तरह से अमेरिका ने बंगलादेश पर पाबंधियां लगाई उससे भी शेख हसीना ने कोई भय न दिखाते हुए संतुलित नीति अपनाई और भारत के साथ संबंधों को और मजबूत बनाया। कोरोना महामारी के चलते बंगलादेश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष से बंगलादेश को ऋण भी लेना पड़ा। चीन और रूस से भी व संतुलन बनाकर काम कर रही है लेकिन उनकी सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वह लोगों के आक्रोश को कैसे और कब तक शांत कर पाती है। फिलहाल वह ऐसी शख्सियत बन चुकी है जिसका कोई मुकाबला नहीं कर सकता।
शेख हसीना का सत्ता में बने रहना भारत के हित में है। भारत में कोई भी सरकार इस वास्तविकता को नजरंदाज नहीं कर सकती है कि 1996-2001 के बीच और फिर 2009 के बाद शेख हसीना के शासन के दौरान नई दिल्ली सुरक्षा एजेंसियों को बंगलादेशी एजेंसियों से सहयोग मिला है। बंगलादेश में भारत विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए वास्तविक प्रयास किए गए है। बंगलादेश में प्रमुख भारत विरोधी कार्यकर्ताओं को पाकिस्तान की आईएसआई का समर्थन ​हासिल है। जिसे बेगम खालिदा जिया की बीएनपी के दो शासन के दौरान व्यावहारिक रूप से खुली छूट मिली हुई थी।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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