तो क्या ‘कोहेनूर’ भी लौट आएगा?

Summary :

अब उम्मीद लगाई जा सकती है कि भारत का ‘कोहेनूर’ हीरा भी ब्रिटेन से भारत में लौट आएगा। हाल ही में अमेरिका से इस दिशा में एक पहलकदमी हुई है। उम्मीद जगी है कि ब्रिटेन भी अब इसी दिशा में चलेगा। उधर, अमेरिका में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर और भारतवंशी जोहरान ममदानी ने कहा है कि वह महाराजा चार्ल्स तृतीय को कोहेनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की अमेरिकी राजकीय यात्रा में उनसे मुलाकात करने से पहले ममदानी ने यह बात उस वक्त कही जब उनसे पूछा गया कि वह सम्राट से मिलने पर क्या…

अब उम्मीद लगाई जा सकती है कि भारत का ‘कोहेनूर’ हीरा भी ब्रिटेन से भारत में लौट आएगा। हाल ही में अमेरिका से इस दिशा में एक पहलकदमी हुई है। उम्मीद जगी है कि ब्रिटेन भी अब इसी दिशा में चलेगा।
उधर, अमेरिका में न्यूयॉर्क सिटी के मेयर और भारतवंशी जोहरान ममदानी ने कहा है कि वह महाराजा चार्ल्स तृतीय को कोहेनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। ब्रिटेन के किंग चार्ल्स की अमेरिकी राजकीय यात्रा में उनसे मुलाकात करने से पहले ममदानी ने यह बात उस वक्त कही जब उनसे पूछा गया कि वह सम्राट से मिलने पर क्या कहेंगे? वह बोले, अगर मैं उनसे अलग से बात करता तो संभवत: उन्हें कोहेनूर हीरा लौटाने के लिए प्रोत्साहित करता।
बीते मंगलवार को महाराजा चार्ल्स ने अमेरिकी कांग्रेस की साझा बैठक को संबोधित किया था। ममदानी ने 9/11 स्मारक पर महाराजा चार्ल्स से मुलाकात की थी लेकिन संभवत: कोहेनूर पर कोई बात नहीं हुई। हालांकि ममदानी ने पहले ही कहा था कि यदि उनसे अलग से बात हुई तो बात कहेंगे जबकि यहां वह एक कार्यक्रम में मिले थे।
गत सप्ताह अमेरिका ने भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन वस्तुएं लौटाते हुए कहा है कि एशियाई देशों को चुराई गई कलाकृतियां वापस दिलाने के लिए अभी और काम किया जाना बाकी है। प्राचीन वस्तुएं लौटाने की घोषणा मैनहट्टन के जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने की। ये वस्तुएं कई तस्करी गिरोहों की जांच के बाद बरामद की गई जिनमें कुख्यात कला व्यापारी सुभाष कपूर और दोषी तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े गिरोह भी शामिल हैं।
इन वस्तुओं को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की दूत राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में भारत को सौंपा गया। ब्रैग ने कहा, भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने वाले तस्करी गिरोह का दायरा बड़ा रहा है। यह 650 से अधिक वस्तुओं की वापसी से स्पष्ट होता है। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्रालय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सतत् सहयोग की सराहना भी की।
20 लाख डॉलर की अवलोकितेश्वर प्रतिमा रायपुर से चुराई
अमेरिकी द्वारा लौटाई वस्तुओं में ‘अवलोकितेश्वर’ की 20 लाख डॉलर की कांस्य प्रतिमा भी शामिल है। शिलालेख में कारीगर का नाम द्रोणादित्य है जो छत्तीसगढ़ के वर्तमान रायपुर के पास स्थित सीपुर का निवासी था। यह प्रतिमा 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास मिली कांस्य प्रतिमाओं के एक बड़े भण्डार का हिस्सा थी। 2014 तक वह न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में पहुंच गई।
गणेश प्रतिमा म.प्र. से लूटी
एक अन्य वस्तु नृत्य करते हुए ‘गणेश’ की बलुआ पत्थर की प्रतिमा है जिसे कपूर के सहयोगी रंजीत कंवर ने 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूटा था। बाद में दोषी तस्कर वामन घिया ने इसे न्यूयॉर्क स्थित गैलरी मालिक डोरिस वीनर को बेच दिया। बुद्ध की 75 लाख डॉलर की मूर्ति: लाल बलुआ पत्थर की ‘बुद्ध’ प्रतिमा में बुद्ध अपना दाहिना हाथ ‘अभय मुद्रा’ में उठाए खड़े हैं। इस प्रतिमा के घुटनों के नीचे के पैर टूटे हैं और सिर के पीछे का आभामंडल भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है। अब प्रतीक्षा है ‘कोहेनूर’ हीरे के लौटने की।
कोहिनूर भारत के गोलकुंडा की खदानों से निकला एक ऐतिहासिक 105.6 कैरेट का बेशकीमती हीरा है, जिसका अर्थ ‘रोशनी का पर्वत’ है। लगभग 800 साल पुराना यह हीरा मुगलों, फारसी और सिख शासकों से होते हुए 1849 में अंग्रेजों के कब्जे में चला गया और अब यह लंदन के टॉवर में ब्रिटिश क्राउन का हिस्सा है।
कोहिनूर से जुड़ी मुख्य बातें
यह आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित कोल्लूर खदान (गोलकुंडा) से निकाला गया था। यह अलाउद्दीन खिलजी, बाबर, अकबर और महाराजा रणजीत सिंह जैसे कई शासकों के पास रहा, फिर नादिर शाह ने इसे लूटा। 1849 में पंजाब पर कब्जे के बाद, लॉर्ड डलहौजी ने सिखों से लेकर इसे महारानी विक्टोरिया को सौंप दिया। यह वर्तमान में लंदन के टॉवर में महारानी एलिजाबेथ के मुकुट में जड़ा हुआ है। मूल रूप से यह 186 कैरेट का था जिसे बाद में तराश कर 105.6 कैरेट ( 21.12 ग्राम) कर दिया गया। भारत सरकार ने कई बार इस हीरे को वापस लाने की मांग की है लेकिन यह अभी भी ब्रिटिश शाही परिवार के कब्जे में है।
ऐतिहासिक साक्ष्य मिलते हैं कि महाराजा रणजीत सिंह की इच्छा थी कि वह इस ‘कोहेनूर’ को जगन्नाथ पुरी के मंदिर में भेंट करें। मगर अपने ही कुछ विश्वासघाती सिपहसालारों के कारण महाराजा अपनी वह इच्छा पूरी नहीं कर पाए। कालांतर में वही हीरा लार्ड हार्डिंग ने महारानी विक्टोरिया को प्रसन्न करने के लिए महाराजा दिलीप सिंह के हाथों भेंट में दिलवाया।
एक मान्यता यह भी है कि ‘कोहेनूर’ का इतिहास वास्तव में मनहूसियत की घटनाओं से भरा पड़ा है। यह हीरा जहां भी रहा वहां अशांति और तबाही ही मचाता रहा। इसके बारे में लोक-कहावतें भी प्रचलित हैं। पहली यह कि इसे पहनने का अधिकार या तो ईश्वर को है या किसी महिला शासक को। यदि किसी पुरुष शासक ने लम्बी अवधि तक इसे रखा तो उसका विनाश निश्चित है। अपनी लम्बी इतिहास-गाथा के अनुसार यह हीरा हिन्दू सम्राटों के पास भी रहा, मंगोल शासकों के पास भी। कुछ समय इस हीरे ने अपना रौद्र रूप खिलजी-शासकों, लोधी शासकों व ईरान एवं फारस के शासकों को भी दिखाया।
अब भी माना यही जा रहा है कि यदि ब्रिटेन से यह हीरा वापिस लौटता भी है तो इसे अयोध्या में श्री राम मंदिर या जगन्नाथ पुरी या फिर सोमनाथ मंदिर में चढ़ाया जाएगा।

Dr. Chander Trikha