बीते दिनों दो शब्दों की बड़ी धूम रही, एक है कॉकरोच, हिंदी में बोले तो तिलचट्टा और दूसरा शब्द है मेलोडी। दोनों ही शब्दों की धूम इतनी गजब की रही कि मुझे लगा कि इस सप्ताह क्यों न इसी पर आप से बातचीत की जाए, दोनों शब्दों का संदर्भ तो आपको पता ही है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने एक मामले में सुनवाई के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करने के उद्देश्य से कॉकरोच का जिक्र किया तो कुछ लोगों ने इसे दिल पर ले लिया और इसे देश के युवाओं से जोड़ दिया। हालांकि चीफ जस्टिस ने तत्काल कहा कि उनका वो मकसद नहीं था, मगर ऐसी बातों को यदि कोई दिलजला अपने दिल पर ले ले तो खुराफात की आशंकाएं स्वाभाविक रूप से पैदा हो जाती हैं।
तो ऐसे ही एक सज्जन अभिजीत दीपके ने आनन-फानन में कॉकरोच जनता पार्टी का गठन कर लिया। यह वैधानिक राजनीतिक पार्टी नहीं है लेकिन सोशल मीडिया पर धूम मच गई। करोड़ों फॉलोवर्स मिल गए। अब कहा जा रहा है कि ये बैन हो गया है, मेरा मानना है कि इस तरह की हरकतें कोई पहली बार नहीं हुई हैं। इंटरनेट की हवाई उड़ान और उसे औंधे मुंह गिरते देखने में कुछ भी नया नहीं है। इस देश में उभरे कई आंदोलनों का भी वक्त के साथ नामोनिशान मिट गया, गुजरात के हार्दिक पटेल याद हैं आपको? राजनीति उन्हें घोल कर पी गई। ज्यादातर लोगों को तो याद भी नहीं होगा कि जनाब आजकल कर क्या रहे हैं? बस आपकी याद के लिए बता दें कि वे गुजरात के वीरमगाम से भाजपा के विधायक हैं।
केवल गुजरात ही नहीं, असम, पंजाब और अन्य कई राज्यों में कई आंदोलनों की दुर्गति सब ने देखी है। चलिए, अब फिर से लौट कर कॉकरोच पर आते हैं और इसकी कुछ खासियत बताते हैं, कॉकरोच ऐसा प्राचीन और लचीला जीव है जो डायनासोर के समय से यानी कम से कम 35 करोड़ वर्षों से धरती पर मौजूद है। यह बिना सिर के भी हफ्तों जिंदा रह सकता है, 40 मिनट तक अपनी सांस रोक सकता है और पानी के नीचे आधे घंटे से अधिक समय तक जिंदा रह सकता है। ऐसा माना जाता है कि प्रलय भी आ जाए तो भी यह बचा रहेगा।
जाहिर है कि ऐसी प्रतिभा किसी भी और जीव में नहीं होती है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि इतने प्रतिभावान जीव को किसी ने पाला हो? मैं हर जीव की इज्जत करता हूं लेकिन इस सच्चाई को तो बयान करना ही होगा कि इस दुनिया में ज्यादातर लोग कॉकरोच को देखते ही उसे खत्म करने के बारे में सोचते हैं। इसलिए जर्मनी में बैठकर जब ध्रुव राठी जैसे लोग कहते हैं कि कॉकरोच इज बैक और छप्पन इंच का सीना डर गया है तो मैं सोचने पर मजबूर हो जाता हूं कि इसके पीछे की मंशा क्या है? बड़ी सामान्य सी समझ वाले व्यक्ति के मन में भी यह सवाल पैदा हो सकता है कि कहीं ऐसी हरकतों के पीछे वो अदृश्य खुफिया एजेंसियां तो नहीं हैं जो भारत की आर्थिक तरक्की के कारण जल-भुन कर खाक हुई जा रही हैं?
जो लोग ये मंसूबा पाले बैठे हैं कि भारत के जेन-जी से नेपाल और बांग्लादेश जैसा व्यवहार करा लेंगे, वे मुंगेरीलाल के हसीन सपने देख रहे हैं। हमारे भारत में वह जेन-जी हो या फिर जेन अल्फा हो, बहुत समझदार है और हर बात को बारीकी से समझने वाला तबका है, जानकारी के लिए याद दिला दें कि 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों को जेन-जी, 2013 से 2024 के बीच के लोगों को जेन अल्फा और उसके बाद के बच्चों को जेन-बीटा श्रेणी में रखा जाता है। हमारी युवा पीढ़ी वैचारिक रूप से इतनी समर्थ, सजग, स्वाभिमानी और राष्ट्र के प्रति इतनी समर्पित है कि उसे कोई बरगला नहीं सकता।
हमारी जेन-जी समझती है कि राजनीतिक रूप से दो शक्तियां काम करती हैं, एक सरकार समर्थक और दूसरी सरकार विरोधी मगर कोई तीसरी शक्ति यदि खेल करना चाहती है तो जेन-जी को समझने में देर नहीं लगेगी, उसे पता है कि जो क्रांति की बात करते हैं वे आराध्य देवी-देवताओं का कभी भी असम्मान नहीं करते, बदजुबानी नहीं करते। हां, युवाओं की भावनाओं को मैं अच्छी तरह समझता हूं। मैंने अपने कॉलम में कई बार लिखा है कि देश तरक्की की राह पर बढ़ रहा है, युवाओं को उद्योगों की दिशा में मोड़ना चाहिए ताकि वे और युवाओं को काम दे सकें, रूस में पुतिन ने और चीन में शी जिनपिंग ने युवाओं को काम देने की दिशा में बहुत अच्छा काम किया है।
हमारे देश में भी नई तकनीक ने नई राहें खोली हैं लेकिन जिन युवाओं को काम नहीं मिल रहा है, जो सिस्टम के द्वारा छले जा रहे हैं, उनके भीतर असंतोष का भाव स्वाभाविक तौर पर है और मुझे हमेशा ही इस बात की शंका होती है कि इस असंतोष को भुना लेने की चाहत कई विदेशी एजेंसियों की है और वे कोशिश भी करती रहती हैं, लेकिन मुझे अपने युवाओं पर यह भरोसा भी रहा है कि उन्हें विदेशी ताकतें कभी बरगला नहीं सकतीं, युवाओं ने हर मौके पर अपनी समझदारी के प्रमाण भी दिए हैं।
अब थोड़ी सी बात मेलोडी की हो जाए! मेलोडी का शाब्दिक अर्थ है स्वर और संगीत की मधुरता, इसे तराना भी कह सकते हैं। मगर अभी जो मेलोडी चर्चित हुआ, वह चॉकलेट का एक ब्रांड है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली यात्रा के दौरान वहां की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी ब्रांड का चॉकलेट गिफ्ट किया तो दो देशों के रिश्तों की मधुरता में जैसे चार चांद लग गए! कॉकरोच के घमासान और युद्ध के इस रक्तरंजित दौर के बीच रिश्तों की खुशबू का तराना दिल को सुकून देने वाला है। भारत के प्रति बेहद स्नेहिल व्यवहार और प्रेम
दर्शाने के लिए बहुत शुक्रिया मेलोनी जी! दिल से आभार! सलामत रहे दोस्ताना हमारा…!


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