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सरकार ने खोला आकाश…

आजकल सीमा की सुरक्षा से लेकर मौसम विज्ञान, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण, खेती किसानों से लेकर सामान की डिलीवरी और फोटोग्राफी तक में ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है।

आजकल सीमा की सुरक्षा से लेकर मौसम विज्ञान, आपदा प्रबंधन, सर्वेक्षण, खेती किसानों से लेकर सामान की डिलीवरी और फोटोग्राफी तक में ड्रोन का इस्तेमाल हो रहा है। आने वाले समय में ड्रोन की उपयोगिता को देखते हुए केन्द्र सरकार ने नई ड्रोन नीति का ऐलान कर दिया है। यानि सरकार ने ड्रोन के लिए आकाश खोल दिया है। ड्रोन संबंधी नए नियमों से स्टार्ट अप्स के साथ-साथ इस सैक्टर में काम करने वाले युवाओं को भी काफी मदद मिलेगी। कई देशों की सेनाओं ने अपनी सुरक्षा के लिए ड्रोन का इस्तेमाल काफी बढ़ा दिया है। नवाचार, सूचना प्रौद्योगिकी इंजीनियरिंग में इसके बढ़ते इस्तेमाल और विशाल घरेलू मांग को देखते हुए यह उम्मीद की जानी चाहिए कि भारत 2030 तक वैश्विक ड्रोन हब बन सकता है। नई ड्रोन नीति की जरूरत इसलिए भी थी क्योंकि अर्थव्यवस्था के लगभग सभी क्षेत्रों जैसे कृषि, खनन, आधारभूत संरचना, निगरानी आपातकालीन परिस्थितियों, परिवहन, मानचित्रण रक्षा और कानून प्रवर्तन एजैंसी को ड्रोन से जबर्दस्त लाभ मिल रहा है। किसी भी प्रदर्शन पर लगातार नजर रखने के लिए ड्रोन से वीडियोग्राफी की जाती है। इससे कानून व्यवस्था बनाए रखने में काफी मदद मिलती है।
नई ड्रोन नीति में सभी ड्रोन का आनलाइन पंजीकरण होगा। अब पंजीकरण, लाइसेंस के लिए सुरक्षा मंजूरी लेने और ड्रोन के रखरखाव का प्रमाणपत्र देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। माइक्रो ड्रोन के गैर व्यावसायिक और नैनो ड्रोन के लिए ​रिमोट पायलट लाइसेंस की आवश्यकता नहीं होगी। कार्गो डिलीवरी के ​लिए कारिडोर बनाए जाएंगे। बड़े ड्रोन के लिए रिमोट पायलट लाइसेंस का शुल्क 3 हजार रुपए से घटाकर सौ रुपए कर दिया गया है। कई तरह की फिजूल की कागजी प्रक्रियाएं खत्म कर दी गई हैं। पहले के नियमों में काफी कुछ ऐसा था जो अकादमिक, स्टार्टअप्स, उपयोगकर्ता और अन्य हितधारकों को बहुत प्रतिबंध करने वाला था। पुराने नियमों में एक बड़ी बाधा यह थी कि ड्रोन उड़ाने के लिए बहुत कम ‘फ्री टू फ्लाई’ ग्रीन जोन उपलब्ध थे। 
अब लाल और पीले जोन में ड्रेन चलाने की पूर्व अनुमति लेनी होगी। अब हवाई अड्डे की परिधि से पीले जोन को 45 किलोमीटर से घटाकर 12 किलोमीटर किया गया है। लाल जोन में सिर्फ विशेष परिस्थितियों के तहत काम करने की अनुमति होती है। भारत के किसी भी भूमि क्षेत्रों या क्षेत्रीय जल के ऊपर अधिसूचित बंदरगाह सीमा जिसके भीतर ड्रोन संचालन की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जा सकती है। नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य ​सिंधिया ने नए नियमों को घोषित करते समय संकेत दिया कि आने वाले दिनों में हो सकता है कि सड़कों पर दौड़ने वाली टैक्सी की तरह आसमान में ड्रोन टैक्सी उड़ान भरते दिखाई दें। लोग एक जगह से दूसरी जगह ड्रोन टैक्सी का इस्तेमाल करें। वैश्विक स्तर पर हवाई टैक्सी के संबंध में शोध और आविष्कार किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई नीति को लैंडमार्क मूवमेंट बताते हुए कहा है कि इस क्षेत्र में नई सम्भावनाएं पैदा होंगी। नई रिसर्च और व्यापार में मदद मिलेगी। एक तरफ सरकार ने ड्रोन के लिए आकाश खोल दिया है लेकिन ड्रोन के खतरे भी कुछ कम नहीं हैं। 27 जून को जम्मू में उच्च सुरक्षा वाले वायु स्टेशन पर विस्फोट ड्रोन हमला था। कम या बिना आवाज के उड़ने वाले ड्रोन का पता लगाना मुश्किल होता है। वे विनाश के उपकरण हो सकते हैं। इसलिए भारत के पास ड्रोन हमलों से निपटने के लिए व्यवस्था होनी ही चाहिए। इस्राइल के पास आपात डोम नामक एक प्रभावी वायुरक्षा प्रणाली है। इसलिए एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करना होगा। पाकिस्तान से सटी जम्मू सीमा पर, पंजाब की सीमाओं पर ड्रोन हमें डराते हैं। पिछले दो वर्षों में भारत के सीमांत क्षेत्रों में हथियारों, गोला बारूद और ड्रग्स की तस्करी के लिए पाकिस्तान स्थित संगठनों द्वारा नियमित रूप से ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। 
हाल ही के वर्षों में ड्रोन प्रौद्योगिकी के तेजी से प्रसार और इसके वैश्विक बाजार के तेजी से विकास के साथ दुनिया के सबसे सुरक्षित शहरों में ड्रोन हमलों की आशंकाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। वर्ष 2019 में सऊदी अरब में ‘आरामको क्रूड आयल’ पर दोहरा ड्रोन हमला किया गया था। सैन्य क्षेत्रों मेंं छोटे ड्रोन जिस दर से बढ़ रहे हैं उसने युद्ध क्षेत्र कमांडरों और योजनाकारों को चिंतित कर दिया है। 
भारत का रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय और नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ताकि शत्रु ड्रोन विरोधी तकनीक को जल्दी से जल्दी विकसित किया जाए। ड्रोन परिचालन के नियम उदार बनाए जाने के साथ-साथ हमें यह भी देखना होगा कि ड्रोन का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए न हो। क्योंकि आतंकवादी ताकतों द्वारा इनका इस्तेमाल कहीं भी किया जा सकता है। विज्ञान जीवन को सहज बनाता है लेकिन कभी-कभी यह विनाश का माध्यम भी बनता है। यह सही है कि व्यापार और रोजगार के लिए नई नीति सही है लेकिन हमें इस पर सतत् निगरानी रखनी होगी।
आदित्य नारायण चोपड़ा
Adityachopra@punjabkesari.com

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