घटना इसी महीने की है, दक्षिणी ईरान के कुहेस्तक शहर में एक मछुआरे की बेटी की शादी का जश्न चल रहा था। अचानक एक मिसाइल ने घर को तबाह कर दिया। चार लोगों की मौत हुई और साठ से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए। छह महीने पहले ईरान के मीनाब शहर के गर्ल्स एलीमेंट्री स्कूल पर मिसाइल हमले में 120 बच्चे मारे गए थे। इसी तरह के कई दर्दनाक किस्से यूक्रेन से भी आते रहे हैं।
अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन की जंग की चर्चा तो हम आप करते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में चल रही 50 से ज्यादा जंगों में पिछले साल दो लाख 45 हजार लोग मारे गए जिनमें 76 हजार से ज्यादा निर्दोष नागरिक थे, मैं तो मानता हूं कि जो सैनिक मारे गए, वे भी निर्दोष थे क्योंकि वे तो बस आदेश की वजह से जंग लड़ रहे थे। पिछले चार वर्षों की जंग में यूक्रेन में करीब 17 हजार निर्दोष नागरिकों की मौत हुई है। गाजा पट्टी में तीन वर्षों में 74 हजार से अधिक फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो चुकी है, करीब पौने दो लाख निर्दोष नागरिक घायल हुए हैं। ये सब आधिकारिक आंकड़े हैं, वास्तविक संख्या बहुत ज्यादा होगी। हजारों शव अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं, उन्हें कौन निकाले और कौन उनका अंतिम संस्कार करे? हम अफ्रीकी देशों की तो बात ही नहीं कर रहे हैं जहां विभिन्न देश अपने भीतर भी विद्रोहियों से जंग लड़ रहे हैं। ग्लोबल पीस इंडेक्स के आंकड़े भयभीत करने वाले हैं। दुनियाभर में 61 संघर्ष या जंग ऐसी हैं जिनमें सरकारें शामिल हैं। दूसरे विश्व युद्ध में 70 देश जंग में शामिल थे, आप सहज ही अंदाजा लगा सकते हैं कि हालात कैसे हैं।
अभी कम से कम 103 देश ऐसे हैं जो भले ही सीधे जंग में या संघर्ष में शामिल नहीं हैं लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें शामिल माना जा सकता है। वर्ष 2008 में ऐसे देशों की संख्या केवल 59 थी, इंडेक्स में कुल 163 देशों को शामिल किया गया है। अशांत देश के रूप में रूस टॉप पर है, दुनिया के प्रत्येक दस में से चार अशांत देश मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के हैं। सूडान और यमन सबसे ज्यादा अशांत हैं।
दुनिया में चल रही जंगों को लेकर मेरे मन में हमेशा यह सवाल तैरता रहता है कि विध्वंस में दुनिया क्यों आनंद ले रही है? संयुक्त राष्ट्र क्यों चुप बैठा है? सुरक्षा परिषद क्या कर रही है? क्या जिसके पास लाठी है, भैंस उसी की होगी? कहां गई मानवता? कहने को जंग से बहुत से देश दूर हैं लेकिन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चौपट हुई है तो उसमें सभी देशों की हालत खराब हो रही है। कोई देश केवल जंग से तबाह नहीं होता। मारने के कई तरीके हैं। भूख, पानी और पैसे से भी देश तबाह हो रहे हैं और इस जंग से हासिल क्या हो रहा है? हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ठीक कहा है कि जंग में बीता हर दिन मानवता को पीछे ले जाता है। हकीकत यही है कि आज पूरी दुनिया डर के बीच जी रही है और इस डर के लिए मुट्ठीभर लोग जिम्मेदार हैं।
ग्लोबल पीस इंडेक्स में 2025 में भारत 115वें स्थान पर था लेकिन इस साल बारह अंक नीचे खिसक कर 127वें स्थान पर आ गया है। गिरावट का कारण सीमा पर तनाव, मणिपुर में हुई जातीय हिंसा और आंतरिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बताया गया है। वैसे यह भी जान लीजिए कि आइसलैंड लगातार 19वें वर्ष दुनिया का सबसे शांत देश बना हुआ है। अब यह पता नहीं कि इसे हड़प लेने की ट्रम्प की चाहत क्या इसे सबसे शांत देश बने रहने देगी? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्कैंडिनेवियाई देश कहलाने वाले डेनमार्क, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड और आइसलैंड को शांति और समृद्धि के लिए जाना जाता है। इंडेक्स में न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, स्लोवेनिया और आयरलैंड शीर्ष शांतिपूर्ण देशों की सूची में बने हुए हैं।
हथियारों की होड़ में यूरोप सबसे आगे !
यह आंकड़ा आपको डरा सकता है कि जंग के कारण पिछले साल दुनिया को करीब 22 ट्रिलियन डॉलर का नुक्सान हुआ है। वैश्विक सैन्य खर्च 2.9 ट्रिलियन डॉलर तक जा पहुंचा है और जंग के कारण दुनिया में इस वक्त हथियारों की होड़ लगी हुई है, इस होड़ में सबसे आगे यूरोप है क्योंकि वह रूस से डरा हुआ है। इसीलिए वह यूक्रेन को मदद दे रहा है। मैंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के लिए एक शोध किया था जिसका विषय था- रिलीजन कॉन्फ्लिक्ट एंड पीस, निश्चित रूप से संघर्षों और जंग का एक प्रमुख कारण धार्मिक कट्टरता तो है ही जिसे हम अफ्रीकी देशों में खासतौर पर देख रहे हैं। मगर दूसरे भी महत्वपूर्ण कारण हैं, कहीं पुरानी अदावत है तो कहीं संसाधनों की लूट का लक्ष्य। पुतिन की सारी लड़ाई यूक्रेन को यूरोपीय यूनियन में शामिल होने से रोकने और रूस को वो रुतबा हासिल कराने के लिए है जो रुतबा सोवियत संघ के पास था।
अमेरिका इसलिए लड़ रहा है क्योंकि उसे अपनी बादशाहत कायम रखनी है और दुनिया के संसाधनों पर कब्जा करना है, चीन लड़ नहीं रहा लेकिन लड़ा रहा है क्योंकि उसे अमेरिका को कमजोर करके खुद को बादशाह बनाना है, हम वसुधैव कुटुंबकम का उच्चारण करते रहे लेकिन हकीकत यही है कि दोस्त-दोस्त ना रहा…प्यार…प्यार ना रहा!
शाबाश बिट्टू ! तुमने कमाल कर दिया
मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की ब्यावरा तहसील से होकर बहने वाली अजनार नदी के कुछ हिस्से को बिट्टू तबाही नाम के 20 वर्षीय युवक ने अपने हाथों से कचरा मुक्त करने का जो अभियान शुरू कर रखा है, वह वाकई काबिले तारीफ है, उसके नाम में पता नहीं क्यों तबाही शब्द चस्पा है लेकिन वास्तव में उसने नदी को तबाही से बचाने का बेमिसाल काम किया है। सरकारें जहां नदियों को साफ नहीं कर पा रही हैं, वहां बिट्टू का यह प्रयास एक नई इबारत की तरह है, मुझे ख्याल आ रहा है दशरथ मांझी का, जिन्होंने पहाड़ों के बीच रास्ता बनाने के लिए अकेले ही पहाड़ खोद दिया था।
विध्वंस में क्यों आनंद ले रही है दुनिया ?
Summary :
घटना इसी महीने की है, दक्षिणी ईरान के कुहेस्तक शहर में एक मछुआरे की बेटी की शादी का जश्न चल रहा था। अचानक एक मिसाइल ने घर को तबाह कर दिया। चार लोगों की मौत हुई और साठ से ज्यादा लोग बुरी तरह घायल हो गए। छह महीने पहले ईरान के मीनाब शहर के गर्ल्स एलीमेंट्री स्कूल पर मिसाइल हमले में 120 बच्चे मारे गए थे। इसी तरह के कई दर्दनाक किस्से यूक्रेन से भी आते रहे हैं। अमेरिका-ईरान और रूस-यूक्रेन की जंग की चर्चा तो हम आप करते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया में चल रही…


Download Android App
Download iOS App



