युद्ध विराम के बाद युुद्ध

Summary :

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं तो दूसरी तरफ ईरान ने भी खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम खत्म हो चुका है। यद्यपि ट्रम्प बार-बार यह बयान दे रहे हैं कि युद्ध विराम खत्म हो चुका है, ​फिर भी ईरान से बातचीत जारी रखेंगे। ईरान की आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है और ईरान का कहना है कि उसे अब एकतरफा समझौता स्वीकार नहीं है। कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, जार्डन में…

होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर हमले के बाद अमेरिका ने ईरान पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं तो दूसरी तरफ ईरान ने भी खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम खत्म हो चुका है। यद्यपि ट्रम्प बार-बार यह बयान दे रहे हैं कि युद्ध विराम खत्म हो चुका है, ​फिर भी ईरान से बातचीत जारी रखेंगे। ईरान की आईआरजीसी ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है और ईरान का कहना है कि उसे अब एकतरफा समझौता स्वीकार नहीं है। कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, जार्डन में ईरान के ताजा हमलों ने खाड़ी देशों में एक बार फिर खौफ पैदा कर दिया है।

ईरान ने दावा ​किया है कि उसने जार्डन के एयरबेस को तबाह करके रख दिया है। बहरीन और कुवैत में बिजली सप्लाई केन्द्रों पर ईरानी हमलों से वहां के शहर अंधकार में डूब चुके हैं। अमेरिका लगातार ईरान के बंदर अब्बास केश्म द्वीप, चाबहार बंदरगाह और ईरान के मिसाइल व ड्रोन रखने वाली जगहों पर बम बरसा रहा है। कुल मिलाकर युद्ध का एक नया चरण शुरू हो चुका है और यह चरण दोनों पक्षों के अहंकार और विनाश का युद्ध है। ईरान में खामेनेई के पार्थिव शरीर को ईमाम रजा दरगाह में सुपुर्द-ए-खाक किया जा चुका है। अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए एक करोड़ से अधिक लोग सड़कों पर आए।

अमेरिका और इजराइल को लगा था ​कि ईरान के लोग खामेनेई शासन से नफरत करते हैं और वे पूरी तरह से बगावत पर उतर आएंगे लेकिन अमेरिकी हमलों ने सत्ता के विरुद्ध आक्रोश को खत्म कर उसे सत्ता समर्थक क्रांति में बदल दिया। ईरान की जनता में ट्रम्प और नेतन्याहू के खिलाफ आक्रोश इतना बढ़ चुका है कि वे ट्रम्प की हत्या का संकल्प ले रहे हैं। इसके साथ ही नए संघर्ष की जमीन तैयार हो चुकी है। होर्मुज का रास्ता व्यापार के साथ-साथ वैश्विक स्थिरता और शांति के​ लिए भी महत्वपूर्ण है। होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ तो सप्लाई चेन अवरुद्ध हो जाएगी, जो कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए नुक्सानदेह साबित होगी। ईरान चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका नियंत्रण बना रहे। अमेरिका और ईरान में हुए समझौते में तीन प्रमुख अड़चनें थीं।

लेबनान से इजराइली फौजों की वापसी, ईरान की जब्त की गई सम्पत्तियों को लौटाना और होर्मुज स्ट्रेट की स्थि​ति। ईरान ने समझौते के बाद होर्मुज तट के किनारे एक सुरक्षित मार्ग खोल दिया था। जबकि अमेरिका ओमान तट के किनारे एक वैकल्पिक मार्ग को खोलने के पक्ष में था। ईरान को डर है कि अमेरिका वैकल्पिक मार्ग को बढ़ावा देकर युद्ध के दौरान जलडमरूमध्य पर स्थापित उसके प्रभाव को छीनने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका नहीं चाहता कि ईरान एक इंडियानापोलिस जलमार्ग का एकमात्र संरक्षक बन उभरे। इन परस्पर विरोधी विचारधाराओं के कारण टकराव होते हैं जिससे समझौता ज्ञापन और कमजोर हो जाता है। इंडियानापोलिस हार को भांपते हुए ट्रम्प तेहरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव, जलडमरूमध्य पर अपना रुख बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

वे अपना हवाई अभियान जारी रख सकते हैं, लेकिन वर्षों से जारी उनके अधिकतम दबाव और 40 दिनों की बमबारी से ईरान की वार्ता की स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। अगर वे होर्मुज को लेकर युद्ध की ओर लौटते हैं तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम पर रुख (जो अभी तक अनसुलझा है) और भी कठोर हो जाएगा। अब ईरान परमाणु बम बनाने की तैयारी कर रहा है। रक्षा विशेषज्ञों को आशंका है कि वह परमाणु अप्रसार संधि से भी बाहर आ सकता है। हालात ईरान को परमाणु बम बनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उत्तर कोरिया भी 1985 में एनपीटी का सदस्य था। फिर भी उसने परमाणु परीक्षण किए और परमाणु बम भी बना लिए। उसने 2003 में एनटीपी को छोड़ दिया। अब वह लगातार घातक मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है।

अमेरिका और यूरोपीय देश आज तक उत्तर कोरिया का कुछ बिगाड़ नहीं पाए। अमेरिका ईरान के प्रमुख परमाणु केन्द्रों को तबाह करने पर अमादा है ले​किन अभी तक उसे कोई सफलता नहीं मिली है। संयुक्त राष्ट्र और आईएईए ईरान को परमाणु बम बनाने से नहीं रोक सकते।
अगर युद्ध फिर से शुरू होता है तो यह पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बुरी खबर होगी। श्री ट्रम्प एक इंडियानापोलिस गतिरोध पर हैं और स्थिति को और कठोरता के बजाय उन्हें अपने समाधान के रोडमैप (समझौता ज्ञापन) पर ही टिके रहना चाहिए। शांति प्रक्रिया में एक बड़ी बाधा विश्वास का पूर्ण अभाव है।

श्री ट्रम्प द्वारा ईरान के नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक रूप से की गई जमीनी बयानबाजी और धमकियां, जो जमीनी हकीकत से परे हैं, उनके पक्ष में कोई योगदान नहीं दे रही हैं। इसी प्रकार यदि ईरान वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रखता है तो उसे पीड़ित के बजाय हमलावर के रूप में देखा जा सकता है। दोनों पक्षों को विश्वास की कमी को दूर करना चाहिए, समझौता ज्ञापन में आवंटन मुद्दों का समाधान करना चाहिए और अंतिम समझौते के लिए आवंटन मुद्दों पर गंभीर बातचीत शुरू करनी चाहिए।

Aditya Chopra

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