केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल कब तक ?

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‘अगर यह सौदा है तो सौदा ही सही, बड़ी हसरत से तेरी देहरी पर आकर ठहरा हूं मैं, सही-गलत के शोर में न उलझाओ मुझको, जब से ईमान बेचा है तब से बहरा हूं मैं’ केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहटें तेज को गई हैं, कहा यह भी जा रहा है कि पिछले दिनों राष्ट्रपति से एक खास तारीख को दिल्ली में ही रहने का आग्रह किया गया है। अब इस बात पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिरकार वह खास तारीख कौन सी है? स्वयं प्रधानमंत्री 29 जून को सेशल्स से लौट कर भारत आ रहे हैं। जानकार…

‘अगर यह सौदा है तो सौदा ही सही, बड़ी हसरत से तेरी देहरी पर आकर ठहरा हूं मैं,
सही-गलत के शोर में न उलझाओ मुझको, जब से ईमान बेचा है तब से बहरा हूं मैं’

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की सुगबुगाहटें तेज को गई हैं, कहा यह भी जा रहा है कि पिछले दिनों राष्ट्रपति से एक खास तारीख को दिल्ली में ही रहने का आग्रह किया गया है। अब इस बात पर अटकलें लगाई जा रही हैं कि आखिरकार वह खास तारीख कौन सी है? स्वयं प्रधानमंत्री 29 जून को सेशल्स से लौट कर भारत आ रहे हैं। जानकार बताते हैं कि फेरबदल का यह दिन 30 जून से 6 जुलाई के बीच कभी भी हो सकता है। सनद रहे कि जब 2019 में भी पीएम मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे तो उन्होंने अपने मंत्रिमंडल का पहला और बहुप्रतीक्षित विस्तार इसके ठीक दो वर्ष बाद जुलाई 2021 के प्रथम सप्ताह में किया था। इस बार भी जुलाई के प्रथम सप्ताह में ही ऐसा संयोग बन सकता है।
नए मंत्रियों को लेकर कयासों के बाजार गर्म हैं। सबसे पहले इसी कॉलम में इस बात का खुलासा हुआ था कि प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव शक्तिकांत दास जो रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर हैं वे देश के अगले वित्त मंत्री हो सकते हैं। एकनाथ शिंदे के सांसद पुत्र श्रीकांत शिंदे को पॉवर मंत्रालय दिए जाने की चर्चा है। यह भी सुना जा रहा है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के पर कतरे जा सकते हैं। एक खबर और छन कर आ रही है कि तृणमूल से टूटे 20 सांसदों के गुट में से हो सकता है इनमें से किसी को मंत्री ही नहीं बनाया जाए, सूत्रों का दावा है कि संघ इनमें से किसी को भी मंत्री पद दिए जाने का विरोध कर रहा है, कहते हैं संघ ने इशारों-इशारों में बता दिया है कि ‘इन्हें जिन लक्ष्मी दर्शन की आस थी वह तो पहले ही पूरी कराई जा चुकी है।’
चर्चा है कि धर्मेंद्र प्रधान को जन्मदिन की बधाई देते हुए भले ही पीएम ने बतौर शिक्षा मंत्री उनके कार्यकाल की तारीफ की हो पर इससे उन्हें मंत्रिमंडल में बने रहने का लाइसेंस नहीं मिल जाता, यह भी चर्चा है कि हरदीप पुरी के राज्यसभा का टर्म नवंबर में पूरा हो रहा है पर हो सकता है बतौर मंत्री उनका टर्म अभी ही पूरा हो जाए।
जापानी पीएम का असम दौरा क्यों रद्द हुआ?
जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री सनाए तकाइची पहली जुलाई को अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा पर आ तो रही हैं पर कुछ कारणों से उनका गुवाहाटी जाने का प्रोग्राम रद्द हो गया है। सनद रहे कि जापानी पीएम के साथ 50 से अधिक बड़े नेता, अधिकारी और जापानी कंपनियों के कई नामचीन सीईओ भी उनकी इस यात्रा में साझीदार रहेंगे। जापानी पीएम की यह यात्रा 16वें भारत-जापान ​िशखर सम्मेलन के लिए है।
1 जुलाई को ही जापानी पीएम के गुवाहाटी जाने का प्रोग्राम था, जहां पिछले काफी समय से शिखर सम्मेलन के लिए असम की राजधानी को पोछने-चमकाने का काम चल रहा था, पूरे शहर को सजाया-संवारा जा रहा था, स्वयं सीएम हिमंता बिस्वा सरमा इस पूरे तैयारी की पल-पल की खबर रख रहे थे। कि अचानक विदेश सचिव विक्रम मिसरी का राज्य के मुख्य सचिव को संदेश आया कि ‘कुछ अपरिहार्य कारणों से जापानी पीएम का गुवाहाटी दौरा रद्द किया जा रहा है, अब ​िशखर सम्मेलन भी दिल्ली में ही आयोजित होगा।’ सनद रहे कि इससे पहले 2019 में भी जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री ​िशंजो आबे का असम दौरा उस वक्त के सीए विरोधी प्रदर्शनों की वज़ह से रद्द कर दिया गया था। हिमंता बिस्वा ने इस दफे अपने शपथ ग्रहण समारोह में भी भारत स्थित अमेरिकी राजदूत को बुला लिया था। जिस वजह से जापान में नाराजगी थी।
क्या मोहन यादव के पंख कुतरे जाएंगे
मध्य प्रदेश के भगवा मुख्यमंत्री मोहन यादव के कथित जमीन घोटाले का मामला धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है। अंग्रेजी के एक प्रमुख अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने अपनी खोजी रिपोर्ट में इस पूरे मामले की पोल खोल दी है। अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जब से मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभाली है, इन पिछले तीन वर्षों में मोहन यादव, उनके परिवार व नाते-रिश्तेदारों ने उज्जैन में 137 प्लॉटों के जरिए 167 एकड़ जमीन खरीदी है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का आरोप है कि ‘जिन क्षेत्रों में विकास योजनाओं का खाका बनाया गया था उन्हीं इलाकों में सीएम के परिवार ने जमीन में पहले निवेश किया है।’
आरोप है कि उज्जैन में मोहन यादव के परिवार उनके नाते रिश्तेदार और परिवार से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने अधिकांश वैसे भूखंड खरीदे हैं जहां नई सड़क परियोजनाएं आने वाली थी, मास्टर प्लॉन और लैंड यूज चेंज (भूमि उपयोग परिवर्तन) का फायदा जिन भूखंडों पर मिलने वाला था परिवार ने पहली खरीद उन्हीं जमीनों की की है। विपक्ष सवाल उठा रहा है कि यह ‘कॉनफिल्क्ट ऑफ इंटरेस्ट’ नहीं तो और क्या है? जब से मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने हैं उनके गृह क्षेत्र उज्जैन के लिए पिछले दो-तीन वर्षों में कई बड़ी और महत्वपूर्ण विकास योजनाओं की घोषणा हुई है, इसमें औद्योगिक कॉरिडोर, इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर जैसी बड़ी योजनाएं शामिल हैं। क्या यह महज़ इत्तफाक है कि उज्जैन के मास्टर प्लॉन 2035 के कई जोन में थोक भाव में सीएम परिवार की जमीनें आ रही हैं।’ अब इस विवाद की वज़ह से मध्य प्रदेश भाजपा में भी यह बहस तेज हो गई है कि ‘हमेशा नैतिकता व शुचिता की दुहाई देने वाला भाजपा शीर्ष क्या मोहन यादव पर कोई कार्यवाही करेगा या फिर यह मामला भी आया-गया हो जाएगा।’
सच्चाई से दूर वायरल खबर
कुछ खबरें वायरल होकर धूम मचाती हैं पर तथ्य एवं सच्चाई से दूर होती हैं। पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक खबर ने खूब धूम मचाई, लंदन में आयोजित एक इवेंट था जिसे नाम दिया गया था ‘कैमेडेरी स्पोर्ट्समैनशिप एंड गुडविल’ इसे आयोजित करने का श्रेय अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी अबंतिका डेका को जाता है। सोशल मीडिया पर दावा हुआ कि आयोजन में भारत के चीफ जस्टिस समेत देश के अलग-अलग हिस्सों के 70-80 मौजूदा न्यायाधीशों ने भी सरकारी खर्चे पर इसमें हिस्सा लिया। इसके अलावा केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल व संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के भी इसमें ​िशरकत करने की बात कही गई।
जब इस पूरे मामले की तहकीकात की गई तो पता चला कि इस बैडमिंटन टूर्नामेंट की जो तस्वीरें दिखाई जा रही हैं दरअसल, वे पिछले साल की हैं। इस साल आयोजित हुए टूर्नांमेंट में न तो देश के मुख्य न्यायाधीश और न ही कोई अन्य जज ही शामिल हुए और न ही भारत सरकार का ही कोई मंत्री ही वहां गया। हां, इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों ने इस बार इस टूर्नांमेंट में जरूर हिस्सा लिया था, पर ये दोनों भी अपने निजी खर्चे पर लंदन गए थे यह सारी खबर सच्चाई से दूर थी।
कर्नाटक भाजपा में सब ठीक नहीं
कर्नाटक भाजपा में सब ठीक नहीं चल रहा है। भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष व येदियुरप्पा परिवार के बीच की तल्खियां बढ़ती ही जा रही हैं। पिछले दिनों कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव के दौरान इस टंकार की परिणति एक नए रूप रंग में दिखी। भाजपा मंे उस वक्त कोहराम मच गया जब 11 भाजपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग की खबर सतह पर मंडराने लगी, इस चक्कर में एनडीए का तीसरा उम्मीदवार जेडीएस के गोविंद राजू चुनाव हार गए। पूछताछ तो बीएल संतोष से भी हुई। सबसे ज्यादा फजीहत तो ये​िदयुरप्पा के पुत्र विजयेंद्र की हुई, जिसके पास फिलवक्त कर्नाटक भाजपा की कमान है। तब अपने पुत्र के बचाव में ये​िदयुरप्पा निकल कर सामने आए और उन्होंने कहा कि ‘इस पूरे मामले में विजयेंद्र की कोई गलती नहीं है।
उन्होंने इस चुनाव से काफी पहले ही 11 भाजपा विधायकों की एक लिस्ट संतोष को यह कहते हुए सौंप दी थी कि इन लोगों पर उन्हें शक है कि ये पार्टी से दगा कर ‘क्रॉस वोटिंग’ कर सकते हैं पर संतोष ने न तो उन विधायकों को तलब किया और न ही उनसे कोई पूछताछ की।’ कहते हैं इसके बाद भाजपा की ओर से संतोष को भी हिदायत दी गई है कि ‘अगर उन्हें कोई जिम्मेदारी सौंपी गई है तो इसका वे ठीक से निर्वहन करें।’
जस्टिस भूषण की जगह कौन?
‘नेशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल’ यानी राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण का कार्यकाल जुलाई 2026 में पूरा हो रहा है, जुलाई में जस्टिस भूषण 70 वर्ष के हो जाएंगे। चूंकि यह अधिकरण बेहद पॉवरफुल बॉडी है सो, नए चेयरपर्सन की कदमताल में कई नाम शामिल हो गए हैं। रेस में सबसे आगे जस्टिस राजेश बिंदल का नाम चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के ही दो अन्य न्यायाधीशों का दावा उतना ही मजबूत है, जस्टिस जे.के. माहेश्वरी 28 जून को और सुप्रीम कोर्ट के ही एक और जज संजय करोल 22 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं, सो इन दोनों के दावे भी उतने ही मजबूत हैं।
…और अंत में
राम मंदिर में चढ़ावा चंपत होने का शोर अब देश-दुनिया में सुनाई देने लगा है। क्या महज चंद छोटी मछलियों को दबोचने का स्वांग रचने भर से अब यह मामला रफा-दफा हो सकेगा इसमें संदेह है। कल कांग्रेस ने भी अपनी प्रेस कांफ्रेंस में कुछ गंभीर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर खूब हाय-तौबा मची है। अभी एक पर्यावरणविद् व सोशल एक्टिविस्ट हंसराज मीणा का ‘एक्स’ पर एक पोस्ट खूब वायरल हो रहा है, जिसमें उनके कटाक्ष पर खूब चर्चा हो रही है।

त्रिदीब रमण