अयोध्या के श्री राम मन्दिर में चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जिस तरह त्वरित कार्रवाई करके इस तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आठ कर्मचारियों के खिलाफ नामजद पुलिस रिपोर्ट करके उन्हें गिरफ्तार कराया है उससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के विरुद्ध किये गये कृत्य से आहत है और वह हर कीमत पर दोषियों को सजा देना चाहती है। अतः इस चढ़ावा चोरी को लेकर राज्य में राजनीतिक दल 2027 के आसन्न विधानसभा चुनावों को देखते हुए जो आरोप लगा रहे हैं वे बन्द होने चाहिएं और इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। भगवान राम के प्रति श्रद्धा का मामला कोई राजनीतिक विषय नहीं है बल्कि यह विशुद्ध रूप से धार्मिक व आस्था का प्रश्न है। योगी सरकार ने जिस तरह आरोप लगते ही पूरे मामले की जांच के लिए जिस तरह उच्च स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया उसकी भी विपक्षी राजनीतिक दल विशेष रूप से समाजवादी पार्टी आलोचना कर रही है मगर वह यह भूले जा रही है कि जब नब्बे के दशक में अयोध्या में रामभक्त मन्दिर बनाये जाने के लिए आन्दोलन कर रहे थे और यह मांग कर रहे थे कि रामजन्म भूमि जन्म स्थल पर 16वीं सदी में खड़ी की गई बाबरी मस्जिद हटाई जाये तो इसी पार्टी के मुखिया स्व. मुलायम सिंह की सरकार ने उन पर गोलियां चलवाई थीं और कई रामभक्तों को शहीद कर दिया था। अतः इस पार्टी के वर्तमान मुखिया श्री अखिलेश यादव का अब चढ़ावा चोरी के मामले में बढ़-चढ़ कर आरोप लगाना विशुद्ध राजनीति से प्रेरित है और इसमें वह एक अवसर की तलाश कर रहे हैं।
एेसा नहीं है कि हिन्दुओं के धार्मिक स्थल पर चढे़ चढ़ावे में घपला करने के आरोप पहली बार लगे हैं। इससे पूर्व दक्षिण भारत के कई प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थों में इसी प्रकार का घपला किये जाने के आरोप लगते रहे हैं जिनकी जांच बाकायदा कानूनी दायरे में होती रही है। परन्तु अयोध्या का श्रीराम मन्दिर भारत की जनता द्वारा लगातार पांच सौ वर्षों से अधिक तक किये गये संघर्ष का प्रतीक है अतः यह मामला अलग दृष्टिकोण से देखा जा रहा है जो कि पूरी तरह उचित व तार्किक है। इसीलिए राज्य के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ ने आगाह किया है कि कुछ लोग रामभक्तों की अग्नि परीक्षा न लें और अनर्गल आरोप लगाना बन्द करें जिनके पास घपले के सन्दर्भ में कोई प्रमाण या साक्ष्य हैं वे विशेष जांच दल को सौंपें। योगी आदित्यनाथ ने आरोपों के लगते ही यह घोषणा की इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा और आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जायेगा। अतः इसी क्रम में राम मन्दिर ट्रस्ट के आठ कर्मचारियों को जेल भेज दिया गया है। इस मामले में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि ट्रस्ट एक स्वायत्तशासी स्वतन्त्र संस्थान है जिसके कार्य में सरकार का कोई दखल नहीं है। इस ट्रस्ट को 2021 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राम जन्म स्थान के पक्ष में फैसला दिये जाने के बाद केन्द्र सरकार द्वारा गठित किया गया था जिसने मन्दिर का निर्माण कराने के बाद इसके रखरखाव की जिम्मेदारी उठाई अतः अब यह ट्रस्ट की ही जिम्मेदारी बनती है कि वह खुद को पाक-साफ दिखाये। इस सिलसिले में ट्रस्ट के महासचिव श्री चम्पतराय व इसके कोष के कर्ताधर्ता अनिल मिश्रा के इस्तीफा देने की खबरें भी आ रही हैं। अतः यह साफ है कि ट्रस्ट में नैतिक आधार पर जिम्मेदारी लेने की भावना जागृत हो रही है और वह चाहता है कि जांच का काम पूरी शुद्धता के साथ पूरा हो। चूंकि यह मामला विश्व के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है इसलिए राजनीतिक दल इसे अपने लाभ के अवसर में बदलना चाहते हैं और बढ़-चढ़कर आरोप लगा रहे हैं जिसकी वजह से योगी आदित्यनाथ को सचेत करना पड़ा कि जो लोग कल तक भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठा रहे थे और न्यायालयों में रामजन्म भूमि क्षेत्र के विरुद्ध तर्क पर तर्क प्रस्तुत कर रहे थे वे ही आज सबसे आगे बढ़कर आरोप पर आरोप लगा रहे हैं।
मगर दूसरी तरफ श्री योगी आदित्यनाथ का भी यह कर्त्तव्य बनता है कि वे ट्रस्ट की सफाई करने का सघन अभियान चलायें और इसे किसी भी प्रकार के सन्देह से ऊपर रखें क्योंकि जब धर्म व आस्था के केन्द्र में चोरी होती है तो पूरा मानव हृदय भीतर से चीत्कार करने लगता है और उसका विश्वास गहरे तक हिल जाता है। यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा की श्रेणी में भी आता है क्योंकि हर वर्ग का श्रद्धालु अपनी गाढ़ी कमाई का एक अंश भगवान को अर्पण करके खुद को धन्य समझता है। उसका यह भाव स्वप्रेरित होता है क्योंकि जब एक गरीब मजदूर भी अपने अाराध्य के मन्दिर में जाता है तो उसकी भी इच्छा होती है कि वह भी ईश्वर को कुछ न कुछ जरूर चढ़ाये। अतः इस चढ़ावे में यदि चोरी होती है तो उसका पश्चाताप भी स्वीकार्य नहीं होता। परन्तु चढ़ावा चोरी मनुष्य की उस भौतिक धन लिप्सा का भी प्रतीक है जो उसे एेसा कृत्य करने के लिए उकसाती है अतः पूरे समाज के लिए भी यह स्थिति शोचनीय है।
चढ़ावा चोरी पर ‘राजनीति’
Summary :
अयोध्या के श्री राम मन्दिर में चढ़ावा चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने जिस तरह त्वरित कार्रवाई करके इस तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आठ कर्मचारियों के खिलाफ नामजद पुलिस रिपोर्ट करके उन्हें गिरफ्तार कराया है उससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के विरुद्ध किये गये कृत्य से आहत है और वह हर कीमत पर दोषियों को सजा देना चाहती है। अतः इस चढ़ावा चोरी को लेकर राज्य में राजनीतिक दल 2027 के आसन्न विधानसभा चुनावों को देखते हुए जो आरोप लगा रहे हैं वे बन्द होने चाहिएं और इस मुद्दे पर…


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