लोकतंत्र का ऐतिहासिक कदम- नारी शक्ति वंदन अधिनियम

Summary :

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 एक युगांतरकारी कदम के रूप में सामने आया है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का यह प्रावधान केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इस का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा और यही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगा। यह केवल हरियाणा की महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए एक…

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 एक युगांतरकारी कदम के रूप में सामने आया है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का यह प्रावधान केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इस का शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन महिलाओं को ‘नीति की लाभार्थी’ से ‘नीति की निर्माता’ बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा और यही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगा। यह केवल हरियाणा की महिलाओं के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

देशभर में जिस भी राज्य में जब भी विधानसभा या लोकसभा के चुनाव होते हैं तो हर चुनाव में महिलाएं बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों पर अपने मतदान का प्रयोग करती हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि देश की महिलाएं अपने अधिकारों और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देने के प्रति सजग हैं। इस अधिनियम के लागू होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शासन की प्राथमिकताओं में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। जब निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, जल और स्वच्छता जैसे विषय अधिक प्राथमिकता के साथ सामने आते हैं।

स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण का अनुभव पहले ही यह दर्शा चुका है कि महिला प्रतिनिधित्व से नीतियां अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनती हैं। अब यही प्रभाव संसद और विधानसभाओं के स्तर पर दिखाई देगा, जिससे विकास की दिशा अधिक संतुलित और समावेशी होगी।इस परिवर्तन की पृष्ठभूमि पिछले एक दशक में तैयार की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण को एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण से देखा गया है। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देश और समाज के नव-निर्माण में एकजुट हैं। इसी कड़ी में महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के मूल उद्देश्य से नीतिगत निर्णय ले रहे हैं। यह इस बात का साक्षात प्रमाण है कि बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान जैसी कल्याणकारी योजनाओं से देशभर में बच्चियों के प्रति एक नई सामाजिक सोच का निर्माण किया है, जिसके सकारात्मक बदलाव आज हमारे सामने आ रहे हैं।

यह इसी बदलाव का परिणाम है कि लड़कियों की माध्यमिक स्तर की नामांकन दर 80.2 प्रतिशत तक पहुंच गई है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जो बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है।आज स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता प्राप्त हुई है। पोषण 2.0 के अंतर्गत 14 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए 8.97 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी आई है, जो महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।

माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का जो संकल्प लिया था, आज प्रधानमंत्री जन-धन योजना के सफल परिणामों ने उस संकल्प को साकार किया है। इस योजना से 32.29 करोड़ महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी हैं, जिससे वित्तीय समावेश को नई गति मिली है। मुद्रा योजना के 68 प्रतिशत ऋण महिलाओं को प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों ने महिलाओं को पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ाकर तकनीकी और उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त किया है। मानव जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में आवास उपलब्ध करवाना किसी भी व्यक्ति विशेषतौर पर एक महिला को सुखद एवं संरक्षण की अनुभूति होती है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को घरों का स्वामित्व मिला है, हर घर-हर गृहिणी योजना से स्वच्छ ईंधन (गैस सिलेंडर) उपलब्ध हुआ है। साथ ही, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन ने दैनिक जीवन की कठिनाइयों को कम किया है। इन पहलों ने महिलाओं को समय, स्वास्थ्य और सम्मान तीनों स्तरों पर सशक्त बनाया है।

यह अधिनियम केवल एक संवैधानिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को गति देने वाला एक निर्णायक कदम है। जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ेंगी, तो विकास की प्रक्रिया अधिक समावेशी, संतुलित और टिकाऊ बनेगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि महिला-नेतृत्व वाला विकास ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन उसी दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र और विकास मॉडल को और सशक्त बनाएगा।

Team Desk