एक जमाना था जब शाम के 8 बजते ही पूरा परिवार टीवी के सामने बैठ जाता था। सास-बहू के ड्रामे, लंबे-लंबे सीरियल और हर विज्ञापन पर टीवी बंद करने की होड़… यह सब हमारा डेली रूटीन का हिस्सा था। लेकिन पिछले कुछ सालों में बहुत कुछ बदल गया है। आज लोग टीवी का रिमोट छोड़कर मोबाइल और स्मार्ट टीवी में ओटीटी (OTT) ऐप्स चला रहे हैं। आखिर ऐसा क्या हुआ कि दशकों से राज कर रहा छोटा पर्दा अब पिछड़ता नजर आ रहा है? आइए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं।
न विज्ञापनों का झंझट, न हर दिन का इंतजार – जब मर्जी, जहां मर्जी देखो

टीवी देखने वालों की सबसे बड़ी शिकायत यही होती थी कि 20 मिनट के सीरियल में 10 मिनट तो सिर्फ ऐड ही आते थे। ऊपर से अगर किसी दिन आपका पसंदीदा एपिसोड छूट गया, तो अगले दिन के री-टेलीकास्ट का इंतजार करना पड़ता था।
ओटीटी ने इस पूरी मजबूरी को चुटकी में खत्म कर दिया। अब लोग बस एक क्लिक करते हैं और अपनी पसंद की पूरी सीरीज़ एक ही दिन में ‘बिंज वॉच’ कर लेते हैं। बस में सफर करते वक्त, ऑफिस के लंच ब्रेक में या रात को सोने से पहले… एंटरटेनमेंट अब आपकी जेब (स्मार्टफोन) में है। इसी आजादी ने लोगों को टीवी से दूर और ओटीटी के करीब कर दिया है।
घिसे-पिटे सास-बहू के ड्रामे से ऊबे लोग, ओटीटी लाया नया और दमदार कंटेंट

टीवी पर सालों-साल एक ही तरह की कहानियां चलती रहती हैं। वही सास-बहू की साजिशें, वही पुनर्जन्म के ड्रामे और बात-बात पर बजने वाला सस्पेंस म्यूजिक। युवा पीढ़ी (Youth) इस घिसे-पिटे ड्रामे से पूरी तरह ऊब चुकी थी।
ओटीटी ने आते ही दर्शकों को क्राइम थ्रिलर, सस्पेंस, कॉमेडी, रोमांस और असल जिंदगी से जुड़ी कहानियां परोसीं। ‘मिर्जापुर‘, ‘पाताल लोक‘, ‘पंचायत’ और ‘स्कैम 1992‘ जैसी सीरीज़ ने दिखा दिया कि आज का दर्शक दमदार एक्टिंग और अच्छी कहानी देखना चाहता है। जब ओटीटी पर हर हफ्ते कुछ नया और रोमांचक मिल रहा हो, तो कोई टीवी का वही पुराना ड्रामा क्यों देखेगा?
क्या टीवी का खेल पूरी तरह खत्म हो चुका है, या अब भी कोई उम्मीद बाकी है?

सवाल यह उठता है कि क्या टीवी अब पूरी तरह बंद हो जाएगा? इसका जवाब है- नहीं, लेकिन टीवी का अस्तित्व अब खतरे में जरूर है। आज भी हमारे देश के छोटे शहरों और गांवों में बुजुर्ग और होममेकर्स टीवी पर ही सीरियल्स देखना पसंद करते हैं। इसके अलावा लाइव क्रिकेट मैच और बड़ी खबरें देखने के लिए लोग टीवी का सहारा लेते हैं।
लेकिन सच्चाई यह है कि अगर टीवी चैनलों ने खुद को नहीं बदला और वही पुरानी कहानियां दिखाते रहे, तो आने वाले समय में उनका बचना मुश्किल हो जाएगा। ओटीटी ने मनोरंजन की दुनिया के सारे नियम बदल दिए हैं और अब दर्शक ही असली राजा है।
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