टीवी का फेमस ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2’ इन दिनों दर्शकों को टीवी स्क्रीन से बांधे हुए है। शो के अंदर रोज नए-नए मोड़ देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां शो में पुराने दुश्मनों की वापसी से माहौल गर्म है, वहीं दूसरी तरफ मिहिर विरानी को लेकर घर में सस्पेंस गहरा होता जा रहा है रहा है। अब आने वाले एपिसोड में एक ऐसा ड्रामा देखने को मिलेगा जो पूरे विरानी परिवार की नींव हिलाकर रख देगा।
मिहिर की टाइप की हुई चिट्ठी से पकड़ा गया करण का बड़ा झूठ

टीवी सीरियल के आने वाले एपिसोड में तुलसी को मिहिर की भेजी हुई चिट्ठी पर शक हो जाता है। तुलसी बहुत अच्छी तरह जानती है कि मिहिर जब भी कोई बात कहना चाहता है, तो वह हमेशा अपने हाथों से खत लिखता है। लेकिन इस बार जो चिट्ठी घर आई थी, वह टाइप की हुई थी।
तुलसी बिना देर किए करण से सीधे सवाल-जवाब करती है। पहले तो करण बातों को घुमाने की कोशिश करता है, लेकिन तुलसी की सख्ती के आगे वह ज्यादा देर टिक नहीं पाता। आखिर में करण रोते हुए मान लेता है कि मिहिर ने कोई खत नहीं भेजा था, बल्कि यह सब उसी की चाल थी। करण का यह सच सुनते ही तुलसी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच जाता है।
मां के सवालों से टूटा करण, मिहिर की तलाश में भटकी तुलसी

करण जब अपनी गलती मानता है तो वह काफी इमोशनल हो जाता है। वह तुलसी से कहता है कि उसने यह सब सिर्फ अपने पिता मिहिर को उससे दूर रखने के लिए किया था, क्योंकि उसे लगता था कि पार्थ के मर्डर में तुलसी का ही हाथ था। करण की बातें सुनकर तुलसी का दिल टूट जाता है और वह उसे जमकर खरी-खोटी सुनाती है।
इसके बाद तुलसी घर के बाकी सदस्यों यानी गौतम, साहिल, शोभा और दामिनी से मिहिर का पता लगाने की कोशिश करती है। लेकिन अफसोस, कोई भी तुलसी को मिहिर के बारे में कुछ नहीं बता पाता। अपनों से मदद न मिलने पर तुलसी का शक और भी गहरा हो जाता है कि आखिर मिहिर को लेकर घर में क्या खिचड़ी पक रही है।
विरानी परिवार में मची खलबली, तुलसी ने नई बहू को सौंपी घर की चाबी

घर में बढ़ते तनाव और बिखराव को देखते हुए तुलसी एक बड़ा कदम उठाने का फैसला करती है। वह परिवार के सभी लोगों को एक साथ बुलाती है और साफ शब्दों में कहती है कि भले ही आपस में कितनी भी कड़वाहट आ जाए, लेकिन घर को चलाने के लिए किसी एक का मजबूत होना जरूरी है।
तुलसी ऐलान करती है कि अब वह घर की जिम्मेदारी और चाबियों का गुच्छा परिवार की अगली पीढ़ी यानी नई बहू को सौंपने जा रही है। तुलसी का यह फैसला सुनते ही पूरे घर के होश उड़ जाते हैं। जहां कुछ लोग इस फैसले का विरोध करते हैं, वहीं दामिनी तुलसी का सपोर्ट करती है। आखिरकार तुलसी घर की चाबियां वैष्णवी के हाथ में थमा देती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या वैष्णवी इस जिम्मेदारी को संभाल पाएगी या विरानी परिवार में नया बवाल खड़ा होगा।
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