ज़ी टीवी के पॉपुलर शो ‘वसुधा’ में इस वक्त ज़बरदस्त और इमोशनल कर देने वाला ड्रामा चल रहा है। दर्शक काफी समय से परेशान थे कि आखिर चंद्रिका देवी, वसुधा को दिल से प्यार करने के बाद भी अपनी बहू के रूप में क्यों एक्सेप्ट नहीं कर पा रही हैं। अब आने वाले एपिसोड में इस राज़ से पर्दा उठने वाला है। मंदिर में गुरु जी के एक खुलासे ने पूरी कहानी का रुख मोड़ दिया है। चलिए आपको बताते हैं कि सीरियल में आगे क्या-क्या नया हंगामा होने वाला है।
मंदिर पहुंची वसुधा, चंद्रिका की जान बचाने के लिए गिड़गिड़ाई
कहानी में देखा जा सकता है कि वसुधा चंद्रिका देवी की हालत को लेकर बेहद परेशान है। चंद्रिका खुद को बहुत बड़ी दोषी मान रही हैं और लगातार खुद को तड़पा रही हैं। वसुधा इस बात को समझ नहीं पा रही है कि आखिर चंद्रिका जी ऐसा क्यों कर रही हैं। अपनी इस बेचैनी का हल ढूंढने और चंद्रिका को रोकने के लिए वसुधा भागती हुई मंदिर पहुंचती है।
वहां पहुंचकर वह गुरु जी से पूछती है कि चंद्रिका जी कहां हैं और वे ऐसा क्यों कर रही हैं। वसुधा बस एक ही बात चाहती है कि वह चंद्रिका जी से मिले और उन्हें समझाकर खुद को नुकसान पहुंचाने से रोके। लेकिन गुरु जी उसे आगे बढ़ने से रोक लेते हैं और कहते हैं कि बिना सच जाने वह कुछ नहीं कर पाएगी।
‘जो चंद्रिका के लिए ज़हर था, वो तुम्हारे लिए सब्र बनेगा’

जब वसुधा गुरु जी से बार-बार सच बताने की ज़िद करती है, तो गुरु जी उसे एक बेहद गंभीर वार्निंग देते हैं। गुरु जी कहते हैं कि एक ऐसा सच है जो इतने समय से छिपा हुआ था, और वही सच आज चंद्रिका देवी की सबसे बड़ी सजा बन चुका है। वही राज़ चंद्रिका के लिए तो ज़हर बन गया है, लेकिन अब वसुधा के लिए सब्र और ताकत बनेगा।
गुरु जी वसुधा को समझाते हैं कि जब तक वह इस छुपे हुए सच को नहीं जानेगी, तब तक उसे चंद्रिका के सख़्त और दर्दभरे फैसलों का मतलब समझ में नहीं आएगा। गुरु जी इशारा करते हैं कि यह सच ही अब चंद्रिका देवी की जान बचा सकता है। इस बात को सुनते ही वसुधा के होश उड़ जाते हैं और वह सच जानने के लिए तड़प उठती है।
पछतावे में चंद्रिका ने खुद को दी सजा, क्या वसुधा रोक पाएगी यह बर्बादी?

दूसरी तरफ, चंद्रिका देवी का पछतावा और भी बढ़ गया है। उन्हें लगता है कि उनकी वजह से संतोष की जान खतरे में पड़ी और देव के साथ वसुधा का भविष्य बर्बाद हो गया। वे सोच रही थीं कि वे प्रभात को गुरु जी की प्रिडिक्शन से बचा रही हैं, लेकिन उनके हर एक फैसले ने अपनों को सिर्फ और सिर्फ दर्द ही दिया है।
इसी पछतावे में चंद्रिका खुद को चमड़े की पट्टी से मार-मारकर सजा दे रही हैं। लेकिन जैसे ही वसुधा को गुरु जी से पूरा सच पता चलता है, उसका दिल टूट जाता है। अब वसुधा बिना एक पल गंवाए चंद्रिका देवी को इस खुद को आग लगाने दौड़ पड़ती है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या वसुधा समय रहते चंद्रिका को रोक पाएगी या यह सच पूरे परिवार को हमेशा के लिए बिखेर देगा।
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