टीवी सीरियल ‘वसुधा’ के आने वाले एपिसोड में एक के बाद एक कई इमोशनल और चौंकाने वाले मोड़ आने वाले हैं। घर में उषा का सच सामने आने के बाद जैसे ही सब कुछ शांत होता दिख रहा था, तभी संतोष ने एक ऐसी मांग रख दी है जिसने चंद्रिका के पैरों तले जमीन खिसका दी है।
संतोष की आखिरी शर्त: वसुधा को बहू मानो, तभी कराऊंगी ऑपरेशन

कहानी की शुरुआत में दादी चंद्रिका को अकेले में अपने कमरे में बुलाती हैं। संतोष की तबीयत खराब है और उन्हें सर्जरी की जरूरत है। लेकिन संतोष अपनी जिद पर अड़ जाती हैं और चंद्रिका के सामने अपनी आखिरी शर्त रखती हैं। संतोष साफ कहती हैं कि अगर चंद्रिका चाहती है कि वे अपना इलाज और ऑपरेशन करवाएं, तो उसे वसुधा को चौहान परिवार की घर की बहू के रूप में एक्सेप्ट करना होगा। दादी मांग करती हैं कि वसुधा का पूरे रीति-रिवाज के साथ गृह प्रवेश कराया जाए, तभी वे अस्पताल जाने को तैयार होंगी। दादी की यह बात सुनकर चंद्रिका हैरान रह जाती है।
“जीते जी बहू नहीं मानूंगी” – चंद्रिका का चट्टान जैसा फैसला

दादी की जिद एक तरफ और चंद्रिका की अपनी कसमें दूसरी तरफ। जब वसुधा पूरे सम्मान के साथ चंद्रिका (मां सा) के लिए नाश्ता लेकर आती है, तो चंद्रिका का गुस्सा फूट पड़ता है। चंद्रिका वसुधा को डांटते हुए कहती है कि उसे ‘मां सा‘ कहने का हक किसने दिया। चंद्रिका साफ़ शब्दों में वसुधा को चेतावनी देती है कि वह जीते जी उसे कभी अपने घर की बहू एक्सेप्ट नहीं करेगी। चंद्रिका का ये सख्त रवैया देखकर दादी का दिल टूट जाता है।
“भगवान… अब तू ही कोई राह दिखा!” – मंदिर में दादी की आखिरी पुकार

दादी को लगता है कि चंद्रिका अब उनकी बात नहीं मानेगी। ऐसे में, वह हार मानकर भगवान के सामने अपनी आखिरी भगवान से प्रार्थना करने मंदिर पहुँचती हैं। अपनी पोती के हक के लिए दादी का दिल रो रहा है। मंदिर में भक्तों को आत्म-दंड देते देख चंद्रिका ग्लानि से भर जाती है और खुद को चाबुक से मारना शुरू कर देती है। जब वसुधा चंद्रिका को खुद को दर्द पहुंचाते देखती है, तो वह चीखती हुई उसे रोकने के लिए दौड़ती है। क्या वसुधा चंद्रिका को इस दर्द से बचा पाएगी? और क्या दादी अपनी जान की परवाह किए बिना अपनी आखिरी इच्छा पूरी करवा पाएंगी?
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