ब्रिटेन के पुराने दस्तावेजों के मुताबिक, टीपू सुल्तान की सेना ने गणपति वट्टोम शहर को अपनी बाथरी (हथियार रखने की जगह) के रूप में इस्तेमाल किया। इसलिए इसे ‘सुल्तान की बाथरी’ नाम से जाना जाने लगा। टीपू ने इस जगह पर अपनी बाथरी बनाई और आज पूरे शहर को सुल्तान बाथरी नाम से ही जाना जाता है। समय के साथ यही नाम इस्तेमाल किया जाने लगा और धीरे-धीरे ये ‘सुल्तान की बाथरी’ से ‘सुल्तान बाथरी’ हो गया। केरल सरकार के दस्तावेज के मुताबिक, कर्नाटक और तमिलनाडु से आए जैनियों ने 13वीं सदी में यहां एक जैन मंदिर बनवाया था। इस मंदिर को विजयनगर राजवंश की स्थापत्य शैली में बनाया गया था। 18वीं सदी में टीपू सुल्तान के आक्रमण में ये मंदिर आंशिक रूप से नष्ट हो गया था। दस्तावेज के मुताबिक, मालाबार में मौजूद टीपू सुल्तान की सेना ने इसी मंदिर को अपने हथियार और गोला-बारूद रखने के लिए इस्तेमाल किया, जिसे बाथरी कहा जाता था। इस कारण जिस शहर को पहले गणपति वट्टोम या गणपति वट्टम कहा जाता था, उसका नाम बाद में सुल्तान बाथरी पड़ गया। अब इस शहर का आधिकारिक नाम सुल्तान बाथरी ही है, जिसे बीजेपी नेता बदलना चाहते हैं। इस शहर में टीपू सुल्तान ने एक किला भी बनाया था, जो अब खंडहर हो चुका है।
कर्नाटक के बाद केरल की सियासत में टीपू सुल्तान की एंट्री लोकसभा चुनाव में कितना डालेगा असर ?
Summary :
देश में इन दिनों नाम बदलने की परंपरा तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में ही UPA गठबंधन ने अपना नाम बदलकर INDIA रख दिया है। इन सब के बीच कर्नाटक के बाद, केरल की राजनीति में भी टीपू सुल्तान की एंट्री हुई है। वायनाड से बीजेपी उम्मीदवार के रूप में। उम्मीदवार केरल बीजेपी के अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने घोषणा की है कि अगर उन्हें चुनाव जीतने का मौका मिलता है, तो सुल्तान बाथेरी नाम को बदलकर गणपति वट्टोम करेंगे। सुल्तान बाथेरी मैसूर के शासक टीपू सुल्तान से जुड़े हैं। वायनाड में उनका मुकाबला कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सीपीएम…


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