Adhik Maas Purnima Date 2026: शास्त्रों में अधिकमास को बहुत पवित्र महीना माना गया है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस दौरान उनकी पूजा करने से बहुत अच्छा फल मिलता है। माना जाता है कि इस महीने में की गई पूजा, मंत्रों का जाप, तपस्या और दान-पुण्य आम दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा फल देते हैं। इस महीने की सभी तिथियां, व्रत और त्योहार बहुत खास होते हैं।
आमतौर पर एक साल में 12 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन अधिकमास की पूर्णिमा बहुत खास होती है क्योंकि यह तीन साल में एक बार आती है। पूर्णिमा के दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान, दान करने और पूजा करने की परंपरा है। इन दिनों अधिकमास चल रहा है जो 15 जून तक रहेगा। आइए जानते हैं कि इस बार अधिकमास की पूर्णिमा कब है और इस दिन स्नान-दान करने का सबसे अच्छा समय क्या है।
Adhik Maas Purnima Date 2026: पूर्णिमा की सही तिथि
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा तिथि 30 मई को सुबह 11:57 से शुरू होगी और 31 मई को दोपहर 02:14 तक रहेगी। ज्योतिष के जानकारों का कहना है कि पूर्णिमा का व्रत 30 मई को रखा जाएगा, जबकि पवित्र स्नान और दान-पुण्य करना 31 मई को सबसे अच्छा रहेगा।
Adhik Maas Purnima Snan Muhurat: स्नान और दान के शुभ मुहूर्त

अधिकमास की पूर्णिमा पर सुबह सूरज निकलने से पहले (ब्रह्म मुहूर्त में) स्नान और दान करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। वैसे दिन के दूसरे शुभ समय पर भी गंगा स्नान किया जा सकता है। इस दिन सुबह का शुभ समय 04:34 से 05:17 तक रहेगा। इसके बाद दोपहर में अभिजित मुहूर्त 12:10 से 01:03 तक है। फिर दोपहर में ही विजय मुहूर्त 02:48 से 03:41 तक रहेगा। आप इनमें से किसी भी समय गंगा स्नान कर सकते हैं।
Adhik Maas Purnima 2026 Puja Vidhi: अधिक मास पूर्णिमा पूजा विधि

- इस दिन पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठें और स्नान करने से पहले मन में पूजा का संकल्प लें।
- संभव हो तो, गंगा या किसी पवित्र नदी में नहाएं, नहीं तो घर के नहाने के पानी में ही थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।
- स्नान से पहले पानी को माथे से लगाकर प्रणाम करें।
- स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के कपड़े पहनें।
- सबसे पहले सूर्य देव को जल चढ़ाएं और फिर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें।
- उन्हें पीले रंग के फल, पीली मिठाइयां, धूप, दीपक और तुलसी के पत्ते अर्पित करें।
- इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
- सत्यनारायण व्रत कथा सुनें, इसके बाद विष्णु जी की आरती के बाद, प्रसाद बांटें।
Adhik Maas Purnima Significance: अधिक मास पूर्णिमा का धार्मिक महत्व



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