वाशिंगटन, 24 मई (आईएएनएस)। भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड (आव्रजन) नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे परिवारों, श्रमिकों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए विघटनकारी और हानिकारक बताया है।
बेरा ने जारी बयान में कहा, “मैं ट्रंप प्रशासन के उस विघटनकारी फैसले का कड़ा विरोध करता हूं, जिसके तहत कई छात्रों, अस्थायी वीजा धारकों और ग्रीन कार्ड चाहने वाले अन्य व्यक्तियों को अपने आवेदनों की प्रक्रिया पूरी होने तक संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़कर अपने गृह देशों में वापस जाना होगा। यह नीति उन परिवारों, कामगारों और नियोक्ताओं के लिए अनावश्यक भय और अनिश्चितता पैदा करती है, जो कानून का पालन कर रहे हैं।”
कैलिफोर्निया के डेमोक्रेट की यह टिप्पणी अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) द्वारा एक नीति ज्ञापन जारी करने के बाद आई है, जिसमें कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर स्थिति समायोजन को एक नियमित आव्रजन प्रक्रिया के बजाय “असाधारण राहत” के रूप में माना जाना चाहिए।
नए दृष्टिकोण के तहत आव्रजन अधिकारियों को “मामले-दर-मामले आधार पर” आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया गया है। कई आवेदकों से अपने गृह देश से कांसुलर प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद की जाती है।
यूएससीआईएस के प्रवक्ता ज़ैक काहलर ने इस नीति का बचाव करते हुए कहा कि प्रशासन “कानून के मूल उद्देश्य पर लौट रहा है। अब अमेरिका में अस्थायी रूप से रह रहे और ग्रीन कार्ड चाहने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को आवेदन करने के लिए अपने गृह देश लौटना होगा। सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में छूट मिल सकती है।”
प्रशासन का तर्क है कि इस बदलाव से वीज़ा अवधि समाप्त होने के बाद भी अमेरिका में रहने वालों की संख्या में कमी आएगी और आव्रजन प्रणाली पर दबाव कम होगा।
सांसद अमी बेरा ने चेतावनी देते हुए कहा, “प्रशासन इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहा है कि स्थायी निवास चाहने वाले कई व्यक्ति यहां कानूनी रूप से रह रहे हैं और पहले से ही लंबित आव्रजन प्रणाली में अपने मामलों की कार्यवाही का इंतजार कर रहे हैं। यह नीति विशेष रूप से कानूनी वीजा कार्यक्रमों के माध्यम से संयुक्त राज्य अमेरिका में काम कर रहे उच्च कुशल प्रवासियों को नुकसान पहुंचा सकती है।”
बेरा ने कहा, “अमेरिका को लंबे समय से हमारी कानूनी आव्रजन प्रणाली और श्रमिक वीजा कार्यक्रमों के माध्यम से शीर्ष शोधकर्ताओं, डॉक्टरों, इंजीनियरों, उद्यमियों और नवप्रवर्तकों को आकर्षित करने से लाभ हुआ है। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के दौरान इन व्यक्तियों को संयुक्त राज्य अमेरिका छोड़ने के लिए मजबूर करना हमारे देश को उनके नवाचार, उनके कर योगदान और उन कई तरीकों से वंचित कर देगा, जिनसे वे हमारी अर्थव्यवस्था और समुदायों को मजबूत करते हैं।”
बेरा ने कहा, “भारतीय प्रवासियों के बेटे के रूप में मैं व्यक्तिगत रूप से जानता हूं कि हमारा राष्ट्र उन लोगों से मजबूत होता है जो यहां कानूनी रूप से आते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं और हमारे समुदायों में योगदान देते हैं। हमें प्रक्रिया में देरी को कम करना चाहिए और अपनी आव्रजन प्रणाली का आधुनिकीकरण करना चाहिए, न कि नियमों का पालन करने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त बाधाएं पैदा करनी चाहिए।”
बेरा ने आगे कहा, “मैं इस नीति को कानूनी चुनौती देने का समर्थन करता हूं और अदालतों से इसके कार्यान्वयन पर रोक लगाने की उम्मीद करता हूं।”
यह मुद्दा संयुक्त राज्य अमेरिका में रहने वाले भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से एच-1बी वीजा धारकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच काफी गूंजने की उम्मीद है। रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड के लंबित मामलों में भारतीयों का समूह सबसे बड़ा है और उनमें से कई आवेदन प्रक्रिया पूरी होने तक देश में रहने के लिए स्थिति समायोजन प्रावधानों पर निर्भर हैं।
–आईएएनएस
ओपी/पीएम
(This content is sourced from a syndicated feed and is published as received. Punjab Kesari assumes no responsibility or liability for its accuracy, completeness, or content.)


Download Android App
Download iOS App



