आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु होंगे प्रसन्न, यहां देखें व्रत कथा और इसका महत्व

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Amalaki Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, पूरे साल में कुल 24 एकादशी आती हैं, जिनमें आमलकी एकादशी का विशेष महत्व होता है। यह एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। Rangbhari Ekadashi 2026 को अमला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ आंवले के वृक्ष का पूजन किया जाता है। काशी में इसी दिन से होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, जिस कारण इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं…

Amalaki Ekadashi Vrat Katha: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पंचांग के अनुसार, पूरे साल में कुल 24 एकादशी आती हैं, जिनमें आमलकी एकादशी का विशेष महत्व होता है। यह एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में मनाई जाती है। Rangbhari Ekadashi 2026 को अमला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस पावन दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ-साथ आंवले के वृक्ष का पूजन किया जाता है। काशी में इसी दिन से होली उत्सव की शुरुआत मानी जाती है, जिस कारण इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का निवास होता है, इसलिए इस दिन आंवले का पूजन और सेवन अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। आमलकी एकादशी का व्रत जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है। ऐसे में आइए जानते हैं, Amalaki Ekadashi Vrat Katha और इसका महत्व क्या है।

Amalaki Ekadashi Vrat Katha: आमलकी एकादशी व्रत कथा

Amalaki Ekadashi kahani
Amalaki Ekadashi kahani (Source: AI Generated)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में चित्रसेन नाम का एक राजा राज्य में शासन करता था। उसके राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे और भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। राजा की भी भगवान में गहरी आस्था थी। एक बार राजा चित्रसेन शिकार खेलते-खेलते जंगल में काफी दूर निकल गए। वहां कुछ डाकुओं ने राजा को अकेला पाकर घेर लिया और उन पर हथियारों से हमला कर दिया। लेकिन भगवान की कृपा से वे जो भी शस्त्र राजा पर चलाते, वे फूलों में बदल जाते थे। `वहां डाकुओं की संख्या अधिक थी, जिससे राजा बेहोश होकर गिर पड़े।

Amalaki Ekadashi vrat story
Amalaki Ekadashi vrat story (Source: AI Generated)

तभी राजा के शरीर से एक दिव्य शक्ति (देवी) प्रकट हुई और उसने सभी डाकुओं का वध कर दिया। जब राजा को होश आया, तो उसने देखा कि सभी डाकू मरे पड़े हैं। राजा ने आश्चर्य से पूछा, “इन सबको किसने मारा?” तभी आकाशवाणी हुई, “हे राजन! यह सब तुम्हारी आमलकी एकादशी व्रत के पुण्य का प्रभाव है। तुम्हारे शरीर से उत्पन्न हुई शक्ति ने ही इन दुष्टों का संहार किया है।” यह सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ और राज्य लौटकर सबको इस व्रत की महिमा बताई।

Amalaki Ekadashi Significanc: आमलकी एकादशी का विशेष महत्व

Amalaki Ekadashi ka mahatva
Amalaki Ekadashi ka mahatva (Source: AI Generated)

विष्णु-आंवला पूजा: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने आंवले के वृक्ष को ‘आदि वृक्ष’ के रूप में स्थापित किया था। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

रंगभरी एकादशी: काशी (वाराणसी) में इसे ‘रंगभरी एकादशी’ के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है, जो होली के आगमन का संकेत है।

मोक्षदायिनी: यह एकादशी जीवन में पापों का नाश करने और अंत में मोक्ष प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

सौभाग्य और खुशहाली: मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और आंवले का दान करने से घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आयु में वृद्धि होती है।

शुभ योग: वर्ष 2026 में, आमलकी एकादशी पर 4 शुभ योग बन रहे हैं, जिससे व्रत का फल और भी अधिक हो जाता है।

अगर आप भी पूरे विधि-विधान से आमलकी एकादशी का व्रत करते हैं, तो आपके जीवन में कई तरह के बदलाव आएंगे।

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Kajal Yadav

काजल यादव पत्रकारिता में पिछले 2 वर्षों से सक्रिय हैं। वास्तु, ट्रैवल , वायरल, हेल्थ और लाइफस्टाइल के अलावा आद्यात्मिक खबरें लिखना पसंद करती हैं। रामा विश्वविद्यालय (कानपुर) से बैचलर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद दीनार टाइम्स (कानपुर) से पत्रकारिता की शुरुआत करते हुए बत्तौर 'सोशल मीडिया' संभालने से लेकर 'वॉइस ओवर' के रूप में काम किया। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। कानपुर में जन्म लेने वाली काजल की शिक्षा उनके गृह जिले में ही हुई है।