Durva Vinayak Chaturthi Puja Vidhi: आज दूर्वा गणेश चतुर्थी का पर्व है। सावन महीने में शुक्ल पक्ष की चौथी तिथि को दूर्वा गणेश चतुर्थी या दूर्वा गणपति व्रत कहा जाता है। इस दिन गणेश जी को दूर्वा यानी दूब घास चढ़ाने का बहुत बड़ा महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि जो सुहागिन महिलाएं या भक्त इस दिन गणेश जी का व्रत रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं, उनके जीवन की सभी समस्याएं और रुकावटें खत्म हो जाती हैं। इसके साथ ही उनके घर में सुख, शांति और खुशहाली आती है।
दूर्वा गणेश चतुर्थी पर ऐसे करें पूजन (Durva Vinayak Chaturthi Puja Vidhi)

- सुबह जल्दा उठकर नहा लें और साफ-सुथरे कपड़े पहन लें।
- इसके बाद घर के मंदिर को साफ करें और वहां भगवान गणेश की मूर्ति या फोटो रखें।
- फिर गणेश जी के आगे घी का दीपक जलाएं और व्रत का करने का संकल्प लें।
- इसके बाद गणेश जी को जल, चावल, तिलक, फूल और दूर्वा घास चढ़ाएं।
- गणेश जी को मोदक या लड्डू का भोग लगाना बहुत शुभ होता है।
- पूजा करते समय ओम गं गणपतये नमः मंत्र का जाप करते रहें।
- जब पूजा पूरी हो जाए तो दूर्वा गणेश चतुर्थी की कहानी सुनें या पढ़ें और आखिर में गणेश जी की आरती उतारें।
- पूजा संपन्न होने के बाद अपनी इच्छा के अनुसार किसी गरीब या जरूरत मंद इंसान को खाना, कपड़े या पैसे दान कर सकते हैं।
दूर्वा गणेश चतुर्थी क्या होती है? (Durva Vinayak Chaturthi 2026)
दूर्वा गणेश चतुर्थी भगवान गणेश का एक खास व्रत है। इस दिन गणेश जी की पूजा करते समय दूर्वा घास का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी माना जाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार गणेश जी को दूर्वा घास बहुत ज्यादा पसंद है, इसलिए पूजा में इसे चढ़ाने से गणेश जी बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। दूर्वा गणेश चतुर्थी के दिन भक्त गणेश जी की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे अपने घर-परिवार के लिए सुख, संपत्ति, अच्छी बुद्धि और खुशहाली का आशीर्वाद मांगते हैं। कई लोग इस पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम को गणेश जी की आरती और पूजा करने के बाद ही अपना व्रत खोलते हैं।


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