पितरों की शांति और सुख-समृद्धि के लिए फाल्गुन अमावस्या पर करें ये 6 अचूक उपाय, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

Falgun Amavasya Snan Daan 2026
Falgun Amavasya Snan Daan 2026: हिंदू धर्म में फाल्गुन महीने की अमावस्या का गहरा आध्यात्मिक महत्व है। यह दिन पूर्वजों को विदा करने और आने वाले नववर्ष के स्वागत की तैयारी का प्रतीक माना जाता है। इस पावन तिथि पर पवित्र नदियों या संगम में डुबकी लगाने से न केवल अनंत पुण्यों का लाभ होता है, बल्कि पितृ दोषों से भी छुटकारा मिलता है।
वर्ष 2026 में 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या मनाई जाएगी। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण यह ‘भौमवती अमावस्या’ का विशेष रूप धारण कर रही है। खास बात यह है कि इस दिन सूर्य ग्रहण का योग भी बन रहा है, जिससे इस तिथि का ज्योतिषीय महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस खास अवसर पर किए गए उपाय न केवल ग्रहों की बाधाओं को शांत करते हैं, बल्कि विभिन्न दोषों के निवारण में भी अत्यंत प्रभावी होते हैं। इस लेख में Falgun Amavasya Rituals and Benefits के बारे में बताया गया है।

Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:16 से 06:07
  • अमृत काल: सुबह 10:39 से दोपहर 12:17 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:28 से 03:13 तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:10 से 06:36 तक

Falgun Amavasya Snan Daan 2026: स्नान-दान के लिए कौन सा मुहूर्त है शुभ?

Falgun Amavasya Snan Daan 2026
Falgun Amavasya Snan Daan 2026 (Image: AI Generated)
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में किया गया स्नान आध्यात्मिक रूप से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। मान्यता है कि सूर्योदय से पूर्व गंगा, क्षिप्रा या किसी भी पावन नदी में स्नान करने से साधक के सभी पापों का नाश होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। स्नान के बाद सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करने से प्राप्त होने वाला पुण्य अक्षय हो जाता है।

Pitra Dosh Remedies: पितृ दोष शांति के लिए 6 अचूक उपाय

Falgun Amavasya Snan Daan 2026
Falgun Amavasya Snan Daan 2026 (Image: Social Media)
  • ब्रह्म मुहूर्त में स्नान के बाद जल में काले तिल, जौ और गंगाजल मिलाकर तीन बार पूर्वजों को जल अर्पित (तर्पण) करें।
  • पीपल के वृक्ष को पितरों का निवास स्थान माना जाता है। अतः इस दिन वृक्ष पर कच्चा दूध, जल और तिल अर्पित करें तथा संध्याकाल में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • पितरों की आत्मतृप्ति के लिए भोजन का एक अंश गाय, कौए और कुत्ते को अवश्य खिलाएं।
  • घर की दक्षिण दिशा पितरों की मानी जाती है। इस दिशा में मुख करके सरसों के तेल का दीपक जलाने से पितृ प्रसन्न होते हैं।
  • शिवलिंग पर कच्चा दूध और काले तिल चढ़ाने से भी पितृ दोष की उग्रता कम होती है।
  • घर में नकारात्मकता दूर करने के लिए सुबह-शाम कपूर जलाएं और पीपल के समीप बैठकर पितृ चालीसा का पाठ करें।

Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर पितृ तर्पण का महत्व

Falgun Amavasya Snan Daan 2026
Falgun Amavasya Snan Daan 2026 (Image: Social Media)
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ तर्पण का महत्व केवल कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपने पूर्वजों के प्रति आभार जताने का एक बेहद आध्यात्मिक जरिया है। माना जाता है कि जब श्रद्धा के साथ पितरों को जल अर्पित किया जाता है, तो उनकी आत्मा को सुकून मिलता है, जिससे हमारे जीवन में आ रही अनजानी बाधाएं और ‘पितृ दोष’ दूर होने लगते हैं। इतना ही नहीं, इस दिन तर्पण करने से मानसिक शांति भी मिलती है।

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