Gangaur Vrat 2026 Dishes: राजस्थान और हरियाणा समेत पूरे उत्तर भारत में गणगौर का त्यौहार बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 21 मार्च 2026 को है। यह उत्सव 16 से 18 दिनों तक चलता है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए और कुंवारी कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की कामना के लिए भगवान शिव (ईसर जी) और माता पार्वती (गौरा जी) की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उनकी विधि-विधान से पूजा करती हैं। पूजा के दौरान देवी को कई तरह के खास पकवानों का भोग लगाया जाता है। आइए जानते हैं वो कौन से पकवान हैं, जिनके बिना यह त्यौहार अधूरा है।
Gangaur Vrat 2026 Dishes: गणगौर पूजा के खास पकवान
- गुड़ की लापसी: यह गेहूं और गुड़ से बनती है और पूजा में इसे बहुत शुभ माना जाता है।
- आटे का हलवा: घी और आटे से बना यह सादा और स्वादिष्ट हलवा भी भोग में शामिल होता है।
- फल और मेवे: तरक्की और खुशहाली के लिए पूजा में ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स भी रखे जाते हैं।
- घेवर: यह राजस्थान की सबसे मशहूर मिठाई है। गणगौर पर घेवर का प्रसाद जरूर चढ़ाया जाता है।
- चूरमा: घी, आटे और चीनी से बना चूरमा भी माता गौरी को बहुत पसंद है और इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है।
- कचौरी और पूरी: त्यौहार के खाने को जायकेदार बनाने के लिए नमकीन कचौरियां और पूरियां भी बनाई जाती हैं।
- गुन: गणगौर का सबसे खास प्रसाद ‘गुने’ है। यह मैदा और चीनी से बनी कुरकुरी मिठाई होती है जो माता पार्वती को चढ़ाई जाती है।
Gangaur Significance: गणगौर का महत्व
गणगौर राजस्थान की संस्कृति की पहचान है। राजस्थान की परंपराओं में गणगौर का बहुत महत्व है। यह त्योहार वसंत ऋतु और नई फसल की खुशी भी लाता है। चैत्र शुक्ल तृतीया के दिन ईसर-गौरी की मूर्तियों को तालाब या नदी में विसर्जित किया जाता है, जिसके साथ ही यह उत्सव पूरा होता है। राजस्थान के शहरों में इस दिन बड़ी धूमधाम से सवारी निकाली जाती है और मेले लगते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक है, बल्कि आपसी मेलजोल और समाज की खुशहाली को भी बढ़ाता है।























