क्यों खास है होता है हिंदू नववर्ष? जानें इससे जुड़ा धार्मिक महत्व और वैज्ञानिक आधार

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Hindu Nav Varsh Significance in Hindi: आज चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तारीख है, इसी के साथ हिंदू नववर्ष शुरू हो रहा है। पुरानी कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस दुनिया को बनाया था। चूंकि, यह नया साल गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के ‘राजा’ गुरु (बृहस्पति) और ‘मंत्री’ मंगल होंगे। यह विक्रम संवत 2083 है और इसे ‘रौद्र संवत्सर’ कहा जाएगा। धार्मिक नजरिए से हिंदू नववर्ष बहुत खास माना जाता है। इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत में उगादी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस मौके पर…

Hindu Nav Varsh Significance in Hindi: आज चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तारीख है, इसी के साथ हिंदू नववर्ष शुरू हो रहा है। पुरानी कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस दुनिया को बनाया था। चूंकि, यह नया साल गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के ‘राजा’ गुरु (बृहस्पति) और ‘मंत्री’ मंगल होंगे।

यह विक्रम संवत 2083 है और इसे ‘रौद्र संवत्सर’ कहा जाएगा। धार्मिक नजरिए से हिंदू नववर्ष बहुत खास माना जाता है। इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत में उगादी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस मौके पर लोग गुड़, मिश्री, कच्चा आम और नीम की पत्तियां मिलाकर खाते हैं। महाराष्ट्र में तो इसी दिन से साल की शुरुआत होती है। आइए जानते हैं कि हम इसे क्यों मनाते हैं और इसके पीछे की धार्मिक और वैज्ञानिक वजहें क्या हैं।

Hindu Nav Varsh Significance in Hindi: हिंदू नववर्ष का धार्मिक महत्व

Hindu Nav Varsh Significance in Hindi
Hindu Nav Varsh Significance in Hindi (Source: Social Media)

पौराणिक कथाओं में कहा गया है कि, चैत्र महीने के पहले दिन ही भगवान ब्रह्मा ने इस दुनिया का निर्णाण शुरू किया था। इसी दिन मां दुर्गा का जन्म हुआ था, इसलिए इसी महीने में चैत्र नवरात्रि भी मनाई जाती है जिसमें माता के नौ रूपों की पूजा होती है। एक और बड़ी वजह यह है कि इसी दिन उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने विदेशी दुश्मनों को हराकर ‘विक्रम संवत’ की शुरुआत की थी। इन्ही सब वजहों से इस दिन को नया साल माना जाता है।

Hindu Nav Varsh Significance in Hindi: हिंदू नववर्ष का वैज्ञानिक कारण

Hindu Nav Varsh Significance
Hindu Nav Varsh Significance (Source: Social Media)

विज्ञान और खगोल शास्त्र के हिसाब से भी यह समय नई शुरुआत का होता है। हिंदू नववर्ष वसंत के मौसम में शुरू होता है, जब सर्दी जा रही होती है और गर्मी दस्तक देती है। यह बदलाव हमारे शरीर को मौसम के साथ ढलने का संकेत देता है। धरती के खास झुकाव की वजह से इन दिनों उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) को सूरज की सबसे ज्यादा ऊर्जा मिलती है।

अंग्रेजी कैलेंडर में साल रात के 12 बजे से शुरू होता है, जिसे विज्ञान के हिसाब से सही नहीं माना जाता। हिंदू कैलेंडर में नववर्ष का स्वागत सूरज की पहली किरण के साथ किया जाता है, क्योंकि दिन और रात को मिलाकर ही एक पूरा दिन बनता है। चैत्र का महीना मार्च और अप्रैल के बीच आता है। 21 मार्च के आसपास पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है और उस समय दिन-रात भी बराबर होते हैं।

Disclaimer: यहां बताई गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।