Kartik Maas Vrat Katha: कार्तिक मास में पढ़ें ये पावन कथा, मिलेगा भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद

Kartik Maas Vrat Katha

Kartik Maas Vrat Katha: हिन्दू धर्म में कार्तिक मास का बहुत महत्व है। इसी महीने में भगवान विष्णु लम्बी योग निद्रा के बाद जागते हैं। मान्यता है कि कार्तिक मास भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए सर्वोत्तम है। इस महीने में सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना, तुलसी पूजा, भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करना और दीपदान करने का विशेष महत्व है। इन सबसे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और शांत वातावरण बना रहता है। इस महीने ये कार्तिक मास व्रत कथा का पाठ जरूर करें, इससे मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु प्रसन्न होंगे।

Kartik Maas 2025: कब से शुरू हो रहा है कार्तिक मास?

Kartik Maas Vrat Katha
Kartik Maas Vrat Katha (Ai Generated)

कार्तिक मास महीने की शुरुआत कार्तिक कृष्ण द्वितीया तिथि यानि आज 8 अक्टूबर (बुधवार) से हो रही है। वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि 07 अक्टूबर को सुबह 09:16 बजे से शुरू होगी और 8 अक्टूबर को 05:53 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा तिथि की शुरुआत कार्तिक कृष्ण द्वितीया तिथि से ही है।

Kartik Maas Vrat Katha: ये कथा जरूर पढ़ें

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Kartik Maas Vrat Katha (Ai Generated)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में एक नगर में एक ब्राह्मण दंपत्ति रहते थे। दोनों रोजाना गंगा और यमुना नदी में स्नान करने के लिए कोसो दूर जाते थे। स्नान करने के लिए इतना चलने से ब्राह्मण की पत्नी थक जाती थी। एक दिन उसने अपने पति से कहा कि अगर हमारा कोई पुत्र होता, तो उसकी बहु घर संभाल लेती। हमारे घर लौटने तक वह खाना बनाकर रखती, हमे घर आने के बाद किसी चीज की चिंता नहीं करनी पड़ती।

पत्नी की बात सुनकर ब्राह्मण ने कहा कि वह उसके लिए बहु लेकर आएंगे। उसने एक पोटली में कुछ आटा और सोने की मोहरे रखी और यात्रा के लिए निकल पड़े।

रस्ते में ब्राह्मण को यमुना के किनारे कुछ सुंदर लड़कियां खेलती हुई दिखीं, जिनमें से एक लड़की बहुत ही विनम्र थी। ब्राह्मण देखकर सोच लिया कि वह इस लड़की को अपनी बहु बनाएंगे। ब्राह्मण ने कहा कि कार्तिक मास चल रहा है, इसलिए वह पवित्र स्थान पर ही भोजन करेगा। ब्राह्मण ने लड़की से पूछा- ‘क्या मैं तुम्हारे घर भोजन कर सकता हूं।’ लड़की मान गई और ब्राह्मण को अपने घर ले गई।

ब्राह्मण ने लड़की की मां को पोटली निकालकर दि और कहा कि इसी आटे को छानकर रोटी बनाए। जब लड़की की मां ने आटा छाना, तो उसमें से सोने की मोहरे निकली। यह देखकर वह सोचने लगी कि जिनके आटे में सोने की मोहरे हो, उनके घर में कितनी धन-समृद्धि होगी। इसके बाद उसने अपनी बेटी की शादी उस ब्राह्मण से करवा दी और विदा कर दिया।

बहु जब घर आई, तो ब्राह्मण की पत्नी को पहले शक हुआ लेकिन बहु ने सारा घर का काम बड़े प्यार से किया। उसने कभी भी चूल्हे की आग बुझने नहीं दी और मटके में हमेशा पानी रखा। एक दिन चूल्हे की आग बुझ गई, तो वह पड़ोसन के पास गई, जिसने उसे गलत सलाह दी। पड़ोसन के कहने पर उसने घर का सारा काम करना बंद कर दिया। इन सब चीजों से नाराज होकर ब्राह्मण की पत्नी ने उससे सातों कोठों की चाबी मांग ली।

एक दिन जब बहु ने चाबी चुराकर कोठा खोला, तो एक में धन, दूसरे में अन्न और तीसरे में बर्तन भरे हुए मिले। इसके साथ ही चौथे में माता पार्वती, भगवान शिव, श्री गणेश, माता लक्ष्मी, तुलसी, गंगा-यमुना और कई अन्य देवी-देवता विराजमान थे। इसी तरह और कोठियों में मूल्यवान चीजें मिलीं। जब वह सातवां कोठा खोलने लगी,, तो उसने दरार से देखा कि एक लड़का चंदन की चौकी पर बैठकर माला जप रहा है। बहु ने उससे पूछा- आप कौन? तो उसने कहा- मैं तुम्हारा पति हूं, लेकिन दरवाजा तब खोलना जब माता-पिता आएं। बहु ने ये बात मान ली और दरवाजा नहीं खोला।

इसके बाद बहु अपने सास-ससुर के साथ अच्छे से रहने लगी। इस बार उसने सास-ससुर की उपस्थिति में सातवें कोठे का दरवाजा खोला, जहां तुलसी और गंगा-यमुना के दर्शन कराए। मां ने बेटे को पहचानने के लिए कठिन परीक्षा ली, जिसे उसने पूरी ईमानदारी से पूरा किया। ये सब देखकर सास-ससुर खुश हो गए।

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