“जब पिता सूर्य देव ने जला दिया था शनि का घर…” मकर संक्रांति 2026 पर पढ़ें पिता-पुत्र की अनकही कथा

Makar Sankranti Ki Katha
Makar Sankranti Ki Katha: इस साल मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 9 बजकर 3 मिनट से शाम 5 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। वहीं महा पुण्य काल सुबह 9 बजकर 3 मिनट से सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। मकर संक्रांति के दिन पुण्यकाल में स्नान-दान करने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और धन-धान्य में भी वृद्धि होती है। जो श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं, उन्हें Makar Sankranti Vrat Katha का पाठ करने से अखंड पुण्य की प्राप्ति होती है।

Makar Sankranti Ki Katha: सूर्य देव और पुत्र शनि देव की कहानी

Makar Sankranti Ki Katha
Makar Sankranti Ki Katha (Image: AI Generated)

पौराणिक कथा के अनुसार, सूर्य देव की दो पत्नियां थीं- संज्ञा और छाया। माता छाया के पुत्र शनि देव थे। जन्म के समय शनि देव का रंग काला था, जिसे देखकर सूर्य देव ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया और क्रोधवश उनका अपमान किया। पिता के इस कटु व्यवहार के कारण शनि देव और माता छाया को अलग होकर ‘कुंभ‘ नामक घर में रहना पड़ा।

सूर्य देव के दुर्व्यवहार से आहत होकर माता छाया ने उन्हें कुष्ठ रोग का श्राप दे दिया। क्रोधित होकर सूर्य देव ने प्रतिशोध में शनि देव और छाया के घर को अपनी अग्नि से जलाकर भस्म कर दिया।

जब सूर्य देव की पहली पत्नी संज्ञा के पुत्र यम को इस कलह का पता चला, तो उन्होंने पिता सूर्य देव को श्राप से मुक्ति दिलाई। यम ने पिता को समझाया और उनसे माता छाया व शनि देव के प्रति स्नेहपूर्ण व्यवहार करने का आग्रह किया। अपनी भूल का अहसास होने पर सूर्य देव स्वयं शनि देव से मिलने उनके घर पहुंचे। जब सूर्य देव वहां पहुंचे, तो शनि देव का सब कुछ जल चुका था। फिर भी, उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक अपने पिता का स्वागत काले तिल से किया। पुत्र के इस प्रेम और क्षमा भाव से सूर्य देव गदगद हो गए।

सूर्य देव ने शनि को ‘मकर’ नाम का नया घर (राशि) भेंट किया। आशीर्वाद स्वरूप शनि देव ‘मकर’ और ‘कुंभ’ दोनों राशियों के स्वामी बने। सूर्य देव ने वरदान दिया कि जब भी वे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तो जो भी उन्हें काले तिल अर्पित करेगा, उसका जीवन सुख-समृद्धि से भर जाएगा। यही कारण है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा में काले तिल का विशेष महत्व है। यह दिन क्षमा, प्रेम और पारिवारिक पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है।

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति पूजन विधि

Makar Sankranti Ki Katha
Makar Sankranti Ki Katha (Image: AI Generated)
  • मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर की सफाई करें।
  • किसी पवित्र नदी या घर पर ही पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें।
  • तांबे के लोटे में पुष्प और तिल लेकर “ॐ सूर्याय नमः” के साथ सूर्य देव को जल अर्पित करें।
  • ‘सूर्य चालीसा’ और ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का भक्तिभाव से पाठ करें।
  • शनि दोष से मुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए तिल का सेवन व स्नान में प्रयोग करें।
  • उड़द दाल की खिचड़ी का भोग लगाकर गरीबों को खिलाएं और स्वयं भी ग्रहण करें।
  • इस दिन गाय को गुड़-तिल और चारा खिलाना सौभाग्य और समृद्धि लाता है।

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