आज यानी गुरुवार, 25 जून 2026 को ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत है। हिंदू धर्म ग्रंथों में इसे सबसे बड़ी और सबसे ज्यादा पुण्य देने वाली एकादशी माना गया है। यह व्रत सबसे कठिन होता है क्योंकि इसमें भगवान विष्णु के भक्त बिना पानी पिए (निर्जल) रहते हैं और भगवान की अराधना करते हैं। जो लोग पूरे साल की बाकी एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते, उन्हें निर्जला एकादशी का व्रत जरूर रखना चाहिए। मान्यता है कि केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखने से साल भर की सभी एकादशियों का पुण्य एक साथ मिल जाता है।
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी श्रद्धा से व्रत और पूजा करता है, उसे मृत्यु के बाद मोक्ष यानी जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिल जाती है। आज पूजा के समय भगवान विष्णु को उनकी पसंद की चीजों का प्रसाद जरूर चढ़ाएं। आइए जानें Nirjala Ekadashi Bhog Items के बारे में, जिनके बिना ये पूजा अधूरी मानी जाती है।
Nirjala Ekadashi Bhog Items: भगवान विष्णु को किन चीजों का भोग लगाएं?
1. तुलसी
तुलसी के पौधे में माता लक्ष्मी का वास माना जाता है। तुलसी भगवान विष्णु को बहुत प्यारी हैं, इसीलिए उन्हें ‘हरिप्रिया’ (हरि यानी विष्णु जी की प्रिय) भी कहा जाता है। माना जाता है कि तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु किसी भी प्रसाद को स्वीकार नहीं करते। इसलिए आज पूजा करते समय प्रसाद में तुलसी के पत्ते जरूर डालें।
2. पंजीरी

भगवान विष्णु को पंजीरी का प्रसाद भी बहुत पसंद है। आज पूजा के समय उन्हें पंजीरी का भोग ज़रूर लगाएं। पंजीरी चढ़ाने से भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी का आशीर्वाद भी मिलता है और कुंडली के बुरे ग्रहों का असर खत्म होता है।
3. केला
आज निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु को केले का प्रसाद ज़रूर चढ़ाएं। केला भगवान विष्णु को बहुत पसंद है और माना जाता है कि केले के पेड़ में खुद भगवान विष्णु रहते हैं। केला पीले रंग का होता है और पीला रंग भगवान विष्णु का सबसे प्रिय रंग है। ऐसा माना जाता है कि पके हुए पीले केले का भोग लगाने से भगवान बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
4. पीले रंग की मिठाई

भगवान विष्णु को पीला रंग बहुत पसंद है, इसलिए आज उन्हें पीले रंग की मिठाई का भोग जरूर लगाएं। आप उन्हें केसर का पेड़ा, पीले रसगुल्ले या गुड़ से बनी मिठाई चढ़ा सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि पीले रंग की मिठाई का भोग लगाने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और नौकरी या बिजनेस में फायदा मिलता है।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।


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