9 या 10 नवंबर, किस दिन की जाएगी गोवर्धन पूजा? नोट कर लें शुभ मुहूर्त और विधि

Summary :

हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का विशेष महत्व है, जो हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को दिवाली के ठीक अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। इस साल 2026 में गोवर्धन पूजा की तिथि को लेकर कुछ भ्रम है, लेकिन उदया तिथि के अनुसार यह मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा।

हिंदू धर्म में गोवर्धन पूजा का खास महत्व होता है। हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। यह त्योहार दिवाली के ठीक बाद मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाते हैं और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। आमतौर पर यह पूजा दिवाली के अगले दिन होती है, लेकिन इस बार इसकी सही तारीख को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन है। आइए, जानते हैं कि इस साल गोवर्धन पूजा किस दिन मनाई जाएगी और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है।

गोवर्धन पूजा कब है?

Govardhan Puja
Govardhan Puja (AI Generated)
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की पहली तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:32 बजे शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2:01 बजे खत्म होगी। उदया तिथि के अनुसार, गोवर्धन पूजा मंगलवार, 10 नवंबर 2026 को ही मनाई जाएगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, 10 नवंबर 2026 को सुबह की पूजा का शुभ समय सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक रहेगा। इस समय भक्त भगवान कृष्ण और गोवर्धन जी की पूजा कर सकते हैं। अलग-अलग शहरों में सूरज उगने के समय में थोड़ा अंतर होता है, इसलिए पूजा के समय में हल्का बदलाव हो सकता है।

पूजा के लिए जरूरी सामग्री

  • गाय का गोबर
  • रोली
  • हल्दी
  • चंदन
  • अक्षत
  • फूल
  • माला
  • दूब घास
  • धूप
  • देसी घी का दीपक
  • कच्चा दूध
  • दही
  • गंगाजल
  • शहद
  • खील,
  • बताशे
  • मिठाई
  • अन्नकूट
  • जल से भरा हुआ कलश

गोवर्धन पूजा विधि

Govardhan Puja
Govardhan Puja (AI Generated)
  • सुबह के समय किसी साफ जगह पर गोबर से गोवर्धन पर्वत या गोवर्धन महाराज की लेटी हुई मूर्ति बनाएं। साथ ही गोबर से गाय, बछड़े और ग्वालों की छोटी आकृतियां भी बनाएं।
  • गोवर्धन जी की नाभि की जगह पर थोड़ा सा गड्ढा छोड़ दें। पास में भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर या मूर्ति रखें।
  • जल के छींटे देकर भगवान का ध्यान करें और उन्हें स्नान कराएं। फिर हल्दी, रोली और चंदन का तिलक लगाएं।
  • गोवर्धन जी की नाभि वाली जगह पर कच्चा दूध, दही, गंगाजल, शहद और बताशा चढ़ाएं।
  • देसी घी का दिया और धूप जलाएं।
  • इसके बाद खील-बताशे, मिठाइयां और घर में बने अन्नकूट का प्रसाद चढ़ाएं।
  • पूजा के बाद गोवर्धन जी की 7 बार परिक्रमा करें।
  • परिक्रमा करते समय हाथ में जल का कलश रखकर धीरे-धीरे पानी गिराते जाएं या जौ छिड़कते जाएं।
  • आखिरी में गोवर्धन पूजा की कथा सुनें और भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।

अन्नकूट पूजा क्या है और इसकी क्या अहमियत है?

गोवर्धन पूजा को अन्नकूट भी कहते हैं। अन्नकूट का अर्थ होता है तरह-तरह के खाने की चीजों का ढेर। इस दिन भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए कई तरह के शाकाहारी व्यंजन बनाए जाते हैं और उन्हें बड़े प्यार से भोग लगाया जाता है। कई जगहों पर इस दिन भगवान को 56 तरह के व्यंजन चढ़ाने की परंपरा है। पूजा खत्म होने के बाद यह प्रसाद सभी लोगों में बांटा जाता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।