सूनी गोद भरने का महावरदान! संतान सुख और सौभाग्य के लिए पौष पुत्रदा एकादशी 2025 पर जरूर पढ़ें यह चमत्कारी व्रत कथा

Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha: इस साल पौष मास के शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी आज यानी 30 दिसंबर को मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र माना गया है, यह दिन रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना को समर्पित है। ऐसी मान्यता है कि एकादशी के दिन उपवास करने से घर में खुशहाली, समृद्धि और संपन्नता का वास होता है।
Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
साल में कुल 24 एकादशी होती हैं। वर्ष 2025 की विदाई पौष माह की ‘पुत्रदा एकादशी’ के साथ हो रही है, जो अपने आप में बेहद फलदायी मानी जाती है। इस दिन पूरे विधि-विधान से व्रत करने और भगवान विष्णु की अराधना करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है। बिना कथा के यह व्रत अधूरा माना जाता है। ऐसे में जो भक्त आज व्रत रख रहे हैं, उन्हें Putrada Ekadashi ki Katha का पाठ जरूर करना चाहिए। मान्यता है कि, भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं इसे धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाया था।

Putrada Ekadashi 2025: शुभ मुहूर्त और व्रत पारण का समय

Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
  • तिथि प्रारंभ: 30 दिसंबर 2025, सुबह 07:50 बजे से।
  • तिथि समाप्त: 31 दिसंबर 2025, सुबह 05:00 बजे तक।
  • व्रत पारण का समय: 31 दिसंबर 2025 को दोपहर 01:26 बजे से लेकर 03:31 बजे तक।

Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha: राजा सुकेतुमान को कैसे मिला था संतान प्राप्ति का वरदान?

Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन काल में भद्रावती नगरी में राजा सुकेतुमान और उनकी रानी शैव्या का शासन था। सुख-सुविधाओं से संपन्न होने के बाद भी उनके जीवन में एक ही कमी थी कि उनकी कोई संतान नहीं थी। राजा को सदा यह चिंता सताती कि उनके बाद पितरों को पिंड कौन देगा और वह देवताओं का ऋण कैसे चुका पाएंगे।

चिंता इतनी गहरी थी कि एक समय राजा के मन में आत्मघात का विचार तक आ गया, परंतु इसे महापाप समझकर उन्होंने स्वयं को रोक लिया। एक दिन दुखी मन से राजा वन की ओर निकल गए। वहां भटकते हुए वे सोचने लगे कि इतने दान, पुण्य और पूजा-पाठ के बाद भी उन्हें यह कष्ट क्यों मिल रहा है?दोपहर ढलते-ढलते राजा प्यास से व्याकुल होकर एक सरोवर के पास पहुंचे। वहां उन्होंने ऋषियों के आश्रम देखे। तभी राजा के दाहिने अंग फड़कने लगे, जिसे शुभ शकुन मानकर वे ऋषियों के चरणों में झुक गए।

ऋषियों ने प्रसन्न होकर राजा से उनकी इच्छा पूछी। जब राजा ने उनके परिचय के बारे में जानना चाहा, तब मुनियों ने बताया- “हे राजन! हम विश्वेदेव हैं। आज पुत्र प्रदान करने वाली पुत्रदा एकादशी है और हम यहाँ इस पवित्र सरोवर में स्नान के लिए आए हैं।”

संतान की कामना करते हुए राजा ने मुनियों से आशीर्वाद मांगा। ऋषियों की आज्ञा पाकर राजा ने पूरी श्रद्धा के साथ पुत्रदा एकादशी का व्रत किया और अगले दिन द्वादशी को उसका पारण किया। इस व्रत के पुण्य प्रताप से कुछ समय पश्चात रानी शैव्या ने गर्भधारण किया। नौ माह बाद उन्हें एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई।

Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha
Paush Putrada Ekadashi Vrat Katha

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो भी व्यक्ति संतान सुख की इच्छा रखता है, उसे पुत्रदा एकादशी का व्रत नियमपूर्वक करना चाहिए। इस कथा के पठन और श्रवण मात्र से मनुष्य को न केवल इस लोक में सुख मिलता है, बल्कि अंत में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

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