Somvati Amavasya Vrat Katha: सोमवती अमावस्या पर जरूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा, अखंड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का मिलेगा आशीर्वाद

Summary :

आज Somvati Amavasya 2026 का पावन पर्व है। हिंदू धर्म में इसका खास महत्व माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा मिलती है। साथ ही, अपने पूर्वजों को याद करने, उनके लिए तर्पण करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना गया है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को Somvati Amavasya Vrat Katha का पाठ जरूर करना चाहिए। यहां पर सोमवती अमावस्या की व्रत कथा बताई गई है। Somvati Amavasya Vrat Katha: सोमवती अमावस्या की पौराणिक कथा पुरानी कहानी के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण का परिवार था, जिसमें…

आज Somvati Amavasya 2026 का पावन पर्व है। हिंदू धर्म में इसका खास महत्व माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा मिलती है। साथ ही, अपने पूर्वजों को याद करने, उनके लिए तर्पण करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना गया है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्तों को Somvati Amavasya Vrat Katha का पाठ जरूर करना चाहिए। यहां पर सोमवती अमावस्या की व्रत कथा बताई गई है।

Somvati Amavasya Vrat Katha: सोमवती अमावस्या की पौराणिक कथा

Somvati Amavasya Vrat Katha
Somvati Amavasya Vrat Katha (Source: Social Media)

पुरानी कहानी के अनुसार, एक गरीब ब्राह्मण का परिवार था, जिसमें पति, पत्नी और उनकी एक बेटी थी। जैसे-जैसे बेटी बड़ी हुई, वह बहुत सुंदर, संस्कारी और अच्छे गुणों वाली बन गई। लेकिन बहुत ज्यादा गरीबी होने के कारण माता-पिता उसकी शादी नहीं कर पा रहे थे। एक दिन उनके घर एक साधु महाराज आए। ब्राह्मण की बेटी ने बहुत आदर-सत्कार के साथ उनकी सेवा की। साधु उसकी सेवा से बहुत प्रसन्न हुए और उसे आशीर्वाद दिया। लेकिन जब साधु ने ध्यान लगाकर देखा, तो उन्होंने बताया कि इस लड़की की किस्मत में शादी के योग ही नहीं है।

साधु की बात सुनकर माता-पिता बहुत परेशान हो गए और उनसे इस समस्या का उपाय पूछने लगे। साधु ने फिर से ध्यान लगाया और कहा कि पास के ही एक गांव में ‘सोना’ नाम की एक धोबिन रहती है। वह बहुत धार्मिक है और अपने पति से बहुत प्यार करती है। अगर यह लड़की जाकर उसकी सेवा करे और वह धोबिन अपनी मांग का सिंदूर इस लड़की की मांग में लगा दे, तो इसकी शादी हो सकती है। अगले ही दिन से वह लड़की रोज़ सुबह तड़के उठकर सोना धोबिन के घर जाने लगी। वह चुपचाप धोबिन के घर का सारा काम कर देती और बिना किसी को दिखे वापस आ जाती।

कुछ दिनों बाद सोना धोबिन को हैरानी हुई कि आखिर सुबह-सुबह उसके घर का सारा काम कौन कर जाता है। एक दिन उसने और उसकी बहू ने छुपकर देखने का फैसला किया। तब उन्होंने देखा कि एक अनजान लड़की सुबह आकर सारा काम कर रही है। जब उन्होंने उस लड़की को रोका और पूछताछ की, तो लड़की ने उन्हें पूरी बात सच-सच बता दी। सोना धोबिन उस लड़की की लगन और सेवा को देखकर बहुत खुश हुई और उसकी मदद करने के लिए मान गई।

एक दिन सोना धोबिन ने अपनी मांग का सिंदूर उस लड़की की मांग में भर दिया। लेकिन ठीक उसी समय धोबिन के पति की मौत हो गई। यह जानने के बाद भी धोबिन डरी नहीं। उस दिन सोमवती अमावस्या का व्रत था और धोबिन ने सुबह से पानी की एक बूंद भी नहीं पी थी। उसने तय किया कि वह पीपल के पेड़ की पूजा करने के बाद ही पानी पिएगी। रास्ते में उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार फेरे लिए और पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा की। उसकी सच्ची भक्ति और विश्वास के कारण एक चमत्कार हुआ। उसके पति के मरे हुए शरीर में दोबारा जान आ गई और वह ज़िंदा हो गया। इस तरह, उस धोबिन की तपस्या और भलाई की वजह से न सिर्फ ब्राह्मण की बेटी का जीवन संवर गया, बल्कि उसके अपने पति को भी नया जीवन मिल गया।

Somvati Amavasya Vrat ke Niyam: अमावस्या व्रत नियम

  • अमावस्या के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। नहा धोकर साफ कपड़े पहनें।
  • हो सके तो किसी पवित्र नदी या तालाब में स्नान करें, नहीं तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें।
  • घर के मंदिर को साफ करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर रखें।
  • भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी के पत्ते, चंदन और पीले कपड़े चढ़ाएं। इसके बाद घी का दीपक जलाएं।
  • पूजा करते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। आप विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी कर सकते हैं।
  • पूजा के बाद भगवान को खीर, पंचामृत या फल का भोग लगाएं।
  • आखिर में आरती करें और अपने परिवार की खुशहाली व पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करें।
  • अमावस्या के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • इस दिन बाल-नाखून काटने और दाढ़ी बनाने में भी मनाही होती है।
  • इस दिन व्रत में केवल फलाहरी चीजों का ही सेवन करें, साथ ही सादा नमक खाने से बचें।
  • सोमवती अमावस्या पर पितृ तर्पण और दान अवश्य करें।
इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक ग्रंथियों, कहानियों या मान्यताओं पर आधारित है। पंजाब केसरी इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

Khushi Srivastava

खुशी श्रीवास्तव मीडिया इंडस्ट्री में करीब 3 साल का अनुभव रखती हैं। वायरल कंटेंट, लाइफस्टाइल, हेल्थ और वास्तु शास्त्र टिप्स पर प्रमुखता से काम किया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रयागराज से मास्टर ऑफ मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई के बाद पहली बार पत्रकारिता के श्रेत्र में कदम रखा। इसके बाद अमर उजाला प्रिंट (प्रयागराज) में इंटर्नशिप की। फिलहाल खुशी, पंजाब केसरी दिल्ली के डिजिटल प्लैटफॉर्म के लिए कंटेंट राइटिंग का काम करती हैं।