Haryana Electricity Strike: हरियाणा में बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स प्राइवेटाइजेशन की नीतियों, एग्री डिस्कॉम (Agri DISCOM) के गठन और स्मार्ट मीटरिंग के विरोध में 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित हड़ताल बुलाई है। जिसे देखते हुए बिजली निगमों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की स्थिति में बिजली आपूर्ति पर असर न पड़े, इसके लिए कई दूसरे समाधान किए जा रहे हैं। इस दौरान सभी बिजली सर्किलों को जरूरी सेवाओं से जुड़े स्थानों पर बैकअप व्यवस्था मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बिजली निगमों ने अस्पतालों, जनस्वास्थ्य विभाग के ट्यूबवेलों और दूसरी जरूरी सेवाओं वाले स्थानों पर जनरेटर तैयार रखने को कहा है। इन जनरेटरों में जरूरी ईंधन उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि बिजली आपूर्ति के समय जरूरी सेवाएं चलती रहें। सरकार की कोशिश है कि प्रस्तावित हड़ताल का आम लोगों पर कम से कम असर देखने को मिले। खासकर अस्पतालों, पेयजल व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई से जुड़े बिजली कनेक्शनों को चालू रखने की तैयारी की जा रही है।
हड़ताल वापस लेने की बिजली मंत्री की अपील
इस बीच बिजली मंत्री अनिल विज ने कर्मचारियों और इंजीनियरों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों पर गंभीरता से विचार करने के लिए तैयार है। मंत्री ने कर्मचारियों से जनहित को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति को नॉर्मल बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की। उनका कहना है कि सरकार बातचीत के जरिए लंबित मामलों का समाधान निकालने के लिए हमेशा तैयार है।
फिलहाल हरियाणा में बिजली की मांग का पीक सीजन चल रहा है। ऐसे समय में कर्मचारियों की हड़ताल से बिजली व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका को देखते हुए सरकार और बिजली निगम एक्स्ट्रा सावधानी बरत रहे हैं। सरकार का कहना है कि बिजली आपूर्ति में रुकावट का सीधा असर आम यूजर्स, किसानों और दूसरी जरूरी सेवाओं पर पड़ सकता है। इसलिए किसी भी हालात में बिजली व्यवस्था पर असर न पड़े इसके लिए दूसरे इंतजाम किए जा रहे हैं।
प्राइवेटाइजेशन को लेकर सरकार ने स्थिति साफ की
कर्मचारियों के विरोध के प्रमुख मुद्दों में बिजली वितरण व्यवस्था के प्राइवेटाइजेशन की आशंका भी शामिल है। इस पर बिजली मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया है कि डिस्कॉम के प्राइवेटाइजेशन से जुड़ा कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के विचाराधीन नहीं है।
उन्होंने बताया कि कुछ प्राइवेट कंपनियों ने पैरेलल लाइसेंसिंग को लेकर हरियाणा विद्युत नियामक आयोग में आवेदन किया है। हालांकि, बिजली वितरण निगमों ने इन आवेदनों का विरोध किया है। इस विषय पर आयोग की ओर से जनसुनवाई भी पूरी हो चुकी है।
स्मार्ट मीटरिंग पर अभी आखिरी फैसला नहीं
स्मार्ट मीटरिंग को लेकर भी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियर विरोध कर रहे हैं। सरकार की ओर से बताया गया है कि स्मार्ट मीटरिंग के टेंडर जारी करने से संबंधित एक फाइल फिलहाल प्रक्रिया में है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं लिया गया है।
सरकार के अनुसार, किसी भी प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले संबंधित सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। वहीं, कर्मचारी संगठन प्राइवेटाइजेशन की नीतियों, एग्री डिस्कॉम के गठन और स्मार्ट मीटरिंग जैसे मुद्दों को लेकर लगातार अपना विरोध जता रहे हैं।
सरकार और कर्मचारी संगठन के बीच बातचीत जारी
हड़ताल को टालने के लिए सरकार के प्रतिनिधि बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों से लगातार संपर्क में हैं। कोशिश की जा रही है कि बातचीत के जरिए विवादित मुद्दों पर सहमति बनाई जा सके।
फिलहाल सरकार का मुख्य फोकस बिजली आपूर्ति को नॉर्मल बनाए रखने पर है। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच होने वाली बातचीत से यह साफ होगा कि प्रस्तावित 11 से 13 अगस्त की हड़ताल टलती है या नहीं।



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