नई दिल्ली : हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष कुमारी शैलजा को पार्टी हाईकमान विधानसभा चुनाव नहीं लड़ाएगा। इसकी घोषणा स्वयं चंडीगढ़ में पार्टी प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कर दी है। कांग्रेस के इस फैसले को राजनीतिक पंडित एक अच्छा फैसला मान रहे हैं। उनका कहना है कि लाेकसभा चुनाव में पार्टी ने अपने सभी दिग्गज नेताओं को मैदान में उतार दिया था, जिससे कि सभी नेता अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों में डटे रहे और वह दूसरी जगह प्रचार को नहीं पहुंच पाए।
इसका बड़ा उदाहरण यह है कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा सोनीपत में अपनी सीट पर जीत हासिल करने के लिए जोर लगाते रहे। उनके पुत्र दीपेन्द्र हुड्डा बहुत कम वोटों से रोहतक में चुनाव हार गए। राजनीतिक पंडित मानते हैं कि अगर हुड्डा चुनाव नहीं लड़ रहे होते तो वह कम से कम रोहतक सीट को कांग्रेस की झौली में डाल सकते थे। कुछ दिन का प्रचार ही वहां कांग्रेस के काम आ जाता।
कांग्रेस हाईकमान द्वारा हार के कारणों की समीक्षा में यह बात खुलकर सामने आई िक सभी दिग्गज नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाना चाहिए था। इसलिए पार्टी ने लोकसभा से सबक लेते हुए अपनी रणनीति में परिवर्तन किया है। शैलजा को पूरे प्रदेश में पार्टी उम्मीदवारों के प्रचार के लिए खाली रखा जाएगा। उनके साथ हुड्डा और अन्य बड़े नेता प्रचार को साथ चलेंगे।


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