पलवल: सरकार भले ही लाख प्रत्यन कर ले प्रदेश से भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए लेकिन तहसील पलवल में खुलेआम दलालों से रजिस्ट्री करने के एवज में 100 रुपये प्रति गज की मांग करके सरकार के भ्रष्टाचार रोकने के सभी दावों की पोल खोल रहा है। आलम यह है कि पिछले दस दिनों के अंदर करीब 300 वसीकाएं ऐसी पंजीकृत की गई हैं जो अवैध कालोनियों में अवैध प्लाटिंग की है। इस समय अवैध प्लाटिंग का धंधा बडे ही पैमाने पर फल.फूल रहा है। सरकार द्वारा सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए अनेकों कदम उठाए जा रहे हैं और सी एम फ्लाईंग, विजीलैंस सहित अन्य खुफिया एजैंसियां भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए छापेमारी भी करती हैं। लेकिन उक्त खुफियां एजैंसियां सरकारी विभागों में सिर्फ छोटी मछलियों को ही अपना शिकार बनाती हैं जबकि बडी मछलियां बडे ही आराम से जनता से प्रतिदिन लाखों रुपये लूट करके अपनी जेबें भर रहे हैं। इसका नजारा तहसील पलवल में देखने को मिल रहा है। जहां प्रतिदिन लगने वाले 90 टोकनों से से सभी अधिकांश टोकनों पर अवैध प्लाटिंग की रजिस्ट्रियां 100 रुपये प्रति गज के रेट से धडल्ले से की जा रही हैं।
इन रजिस्ट्रियों में गांव गदपुरी, असावटी, पृथला, बामनीखेडा, दूधोला, लाडपुर सहित दर्जनों गांवों में कृषि भूमि पर हो रही प्लाटिंग की अवैध प्लाटिंग की रजिस्ट्रियां शामिल हैं। लोगों का कहना है कि तहसील पलवल में एक प्राईवेट व्यक्ति भी रखा हुआ है जो पूरे दिन की उगाही करके रजिस्ट्री कराने का ठेका लेता है। इस बात को लेकर कई लोगों का उक्त प्राईवेट दलाल से झगडा भी हो चुका है। लोगों का कहना है कि सुबह 9:30 बजे से ही नायब तहसीलदार के रुम के बाहर रजिस्ट्री कराने वालों का तांता लग जाता है और जिससे रेट तय हो जाता है उसकी रजिस्ट्री मार्क कर दी जाती है। पहले रजिस्ट्री टोकन के लिए मार्क की जाती हैए इसलिए अब टोकन वाली खिड़की पर भी सुबह से मारामारी शुरु हो जाती है।
रजिस्ट्री कराने आए फरीदाबाद निवासी राकेश दीपकिशोर हरी सिंह व ज्ञानेन्द्र सिंह ने बताया कि वह मंगलवार को गदपुरी व दूधौला की रजिस्ट्री कराने के लिए आए और नायब तहसीलदार से जब 100 रुपये गज के रेट तय नही हुआ तो उन्होंने टोकन न होने की बात कह कर रजिस्ट्री मार्क नही की और वह वापस लौट गए। जबकि उनके बाद आए दर्जनों लोगों की रजिस्ट्रियां मार्क कर दी गई। इसके अतिरिक्त जिन रजिस्ट्रियों के मार्क होने के बाद रजिस्ट्रियों के पैसे नही मिलते हैं तो उन रजिस्ट्रियों को साईन नही किया जाता है। वे रजिस्ट्रियां तभी साईन होती हैं जब उनके एवज में पैसे मिल जाते हैं। जिनके संबंध में कई लोगों ने परेशान होकर सीएम विंडो पर शिकायतें दी हैं कि उन्हें रजिस्ट्री होने के 15 दिनों तक भी वसीका प्रदान नही की जाती हैं। जबकि सरकार की हिदायत अनुसार पंसीका पंजीकृत होने वाले दिन ही उसे वापस दी जानी चाहिए।
– भगत सिंह तेवतिया


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