Artificial Food Colors Health Risk: आजकल बाजार में मिलने वाली कई मिठाइयों, स्नैक्स, ड्रिंक्स और पैकेज्ड फूड में रंग काफी चमकीले दिखाई देते हैं। इन चमकीले रंगों का कारण फूड कलर्स होते हैं। खाने को देखने में आकर्षक बनाने के लिए इन रंगों का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है। खासकर त्योहारों के समय मिलने वाली मिठाइयों, जेली, कैंडी, आइसक्रीम और बेकरी के समान में इनका इस्तेमाल अधिक देखने को मिलता है।
खाने में रंग जोड़ने से वह अधिक ताजा और स्वादिष्ट दिखाई देता है, जिससे लोगों का ध्यान आसानी से आकर्षित होता है। यही कारण है कि कई फूड प्रोडक्ट्स में रंगों का इस्तेमाल एक सामान्य प्रचलन बन गया है। हालांकि इन रंगों का अत्यधिक उपयोग स्वास्थ्य से जुड़े कुछ सवाल भी खड़े करता है।
कृत्रिम फूड कलर्स क्या होते हैं
फूड कलर्स ऐसे पदार्थ होते हैं, जिन्हें भोजन में रंग देने के लिए तैयार किया जाता है। ये रंग प्राकृतिक स्रोतों से नहीं बल्कि लैब में बनाए जाते हैं। इनका उपयोग मिठाइयों, सॉफ्ट ड्रिंक्स, फ्लेवर्ड दूध, कैंडी, पैकेज्ड स्नैक्स और कई तरह के प्रोसेस्ड फूड में किया जाता है।
खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत कुछ रंगों को सीमित मात्रा में उपयोग की अनुमति दी जाती है। इन रंगों को फूड ग्रेड माना जाता है, लेकिन यह भी जरूरी होता है कि उनका इस्तेमाल तय मात्रा से अधिक न हो। कई बार छोटे दुकानदार या अनियमित उत्पादन करने वाले लोग इस सीमा का ध्यान नहीं रखते, जिससे समस्या पैदा हो सकती है।
अधिक सेवन से जुड़ी संभावित स्वास्थ्य चिंताएं
फूड कलर्स के अत्यधिक सेवन को लेकर समय-समय पर कई तरह की स्वास्थ्य चिंताएं सामने आती रही हैं। कुछ शोधों में यह चर्चा हुई है कि अधिक मात्रा में इन रंगों का सेवन करने से बच्चों में स्वास्थ संबंधी समस्या हो सकती है। हालांकि इस विषय पर अलग-अलग अध्ययन अलग परिणाम भी बताते हैं।
इसके अलावा कुछ लोगों में इन रंगों के कारण एलर्जी या त्वचा से जुड़ी प्रतिक्रिया भी देखी जा सकती है। संवेदनशील लोगों में सिरदर्द, त्वचा पर खुजली या पेट से जुड़ी असहजता की शिकायत भी सामने आ सकती है। इसलिए विशेषज्ञ अक्सर सलाह देते हैं कि कृत्रिम रंगों वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए।
प्रोसेस्ड फूड के बढ़ते चलन का असर
पिछले कुछ वर्षों में पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे कई उत्पादों में स्वाद के साथ-साथ रंग को भी आकर्षक बनाने पर ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि कई तैयार खाद्य पदार्थों में रंग शामिल होते हैं।
बच्चों के लिए बनाए गए कई स्नैक्स और कैंडी में रंग काफी चमकीले होते हैं, जो देखने में आकर्षक लगते हैं। लेकिन नियमित रूप से ऐसे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना स्वास्थ्य के संतुलित नहीं माना जाता है। संतुलित आहार में ताजे फल, सब्जियां और प्राकृतिक रूप से तैयार भोजन को अधिक महत्व दिया जाता है।
लेबल पढ़ने की बढ़ती जरूरत
आजकल कई पैकेज्ड फूड में इस्तेमाल किए गए रंगों और एडिटिव्स की जानकारी लेबल पर दी जाती है। ऐसे में ग्राहक के लिए यह समझना उपयोगी हो सकता है कि वे कौन से चीजों को नियमित रूप से खा रहे हैं और उनमें क्या-क्या सामग्री शामिल है।
संतुलित भोजन और सीमित मात्रा में प्रोसेस्ड फूड का सेवन करना आमतौर पर बेहतर माना जाता है। चमकीले रंग वाले खाद्य पदार्थों की बजाय प्राकृतिक रंग और साधारण सामग्री से बने भोजन को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।


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