National Epilepsy Day 2023: मिर्गी का इलाज संभव, जानें इसके लक्षण और बचाव के उपाय

जब मिर्गी का दौरा पड़ता है तो बहुत से लोग अंधविश्वास में पड़ जाते हैं लेकिन यदि इस बीमारी का सही तरीके से इलाज कराया जाए तो इसका इलाज संभव है। मिर्गी का दौरा किसी भी उम्र के मरीज को पड़ सकता है। यह समस्या उन लोगों में होने के ज्यादा चांस रहते हैं जो नशा करने के आदि होते हैं, जिनको सिर में गहरी चोट लगी हो, ब्रेन ट्यूमर या दिमाग में फोड़ा, डेमेंशिया या अल्जाइमर या फिर किसी चीज का गहरा सदमा लगा हो। प्रत्येक वर्ष में इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एपिलेप्सी फाउंडेशन द्वारा 17 नवम्बर को नेशनल एपिलेप्सी डे या राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है, ताकि लोग मिर्गी का दौरा पड़ने वाले को गन्दा जूता या मौजा न सुंघाएं बल्कि उसे सही समय पर डॉक्टर के पास इलाज के लिए ले जाएं। यदि मरीज को इस बीमारी का इलाज समय पर मिलता है तो वह इससे रोग से मुक्ति पा सकता है। इसके अलावा पूरे विश्व में 50 मिलियन से ज्यादा लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं जिनमें से 10 मिलियन मरीज भारत के हैं।

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कैसे पड़ता है मिर्गी का दौरा

हेल्थ एक्पर्ट्स के मुताबिक मिर्गी एक दिमागी बीमारी है जो सीधे व्यक्ति के ब्रेन सेल्स पर अटैक करती है, जिससे व्यक्ति बेहोश होता है। जब मरीज को मिर्गी का दौरा पड़ता है तो उसका खुद पर नियंत्रण नहीं रहता है उसका दिमागी संतुलन बिगड़ने लगता है और वह अपने पैरों से काबू खो देता है जिस वजह से वह जमीन पर गिर जाता है। जिसके बाद वह 5 या 7 मिनट बेहोशी की हालत में रहता है और जिसके बाद उसका उसे अपने शरीर में अकड़न महसूस होती है।

ज्यादा समय तक दौरा पड़ने से डॉक्टर से सम्पर्क करें

यदि मिर्गी का दौरा 5 या 6 मिनट से ज्यादा समय तक पड़ता है तो घर पर न रुकें। मरीज को तुरंत ही हॉस्पिटल लेकर जाए। मिर्गी के मरीज को पूरी तरह से आराम लगने में आधे घंटे का टाइम लग सकता है। लम्बा दौरा पड़ने पर मरीज को मुँह से नहीं बल्कि नाक से दवा दी जाती है।

मिर्गी के लक्षण

अचानक से बेहोशी आना, शरीर में तेज झटके आना जिसके तुरंत बाद मुँह से झाग आना, पुरे शरीर में चुभन होना, शरीर का अकड़ना, ये सभी लक्षण मिर्गी के होते हैं यदि आपको ऐसा महसूस होता है तो तुरंत ही डॉक्टर से सम्पर्क करें।

मिर्गी आने पर क्या करें?

किसी को मिर्गी आने पर उसके नीचे से कोई भी मोटा कपडा हटा दें जिससे वह आसानी से सांस ले पाए इसके बाद उसे साइड करवट से लिटा दें जिससे उसके मुँह से निकले झाग बाहर निकल जाएं। उसके पास कोई भी नुकीली चीज या हथियार न रहने दें। ध्यान दें की मरीज के पास कोई न कोई रहे। मरीज को आग वाली और पानी वाली चीजों के पास न जाने दें।

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई गई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें. Punjabkesari.com इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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