प्राकृतिक आपदाओं और सड़क एवं रेलमार्ग बाधित होने के समय निजी विमानन कंपनियों द्वारा किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी किए जाने को लेकर कांग्रेस एवं कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने गुरुवार को लोकसभा में हंगामा किया। दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान बीजू जनता दल (बीजद) के पिनाकी मिश्रा ने सवाल किया कि हरियाणा में जाट आंदोलन के समय दिल्ली-चंडीगढ़ हवाई मार्ग का किराया 90 हजार रुपये तक कर दिया गया था।
हाल ही में फोनी चक्रवात के समय ओडिशा जाने वाली उड़ानों का किराया 60 हजार रुपये तक वसूला गया। क्या ऐसी परिस्थितियों में किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए सरकार कोई कदम उठा रही है? इसके जवाब में नागर विमानन मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि न्यूनतम और अधिकतम हवाई किरायों की सीमा होती है।

सदस्य ने जिन परिस्थितियों की बात की है उनमें विमानन कंपनियां अधिकतम दर कर देती हैं और लोग टिकट लेते हैं। अभी मंत्री का जवाब पूरा नहीं हुआ था कि कांग्रेस के मनीष तिवारी खड़े हो गए और पूछा कि क्या मंत्री हवाई किरायों में बढ़ोतरी को सही ठहरा रहे हैं? इसके बाद कांग्रेस और द्रमुक के कई सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री के पास कोई जवाब नहीं है। पुरी ने कहा कि विपक्षी सदस्य उनकी पूरी बात सुनकर संतुष्ट हो जाएंगे। बहरहाल, शोर-शराबा नहीं थमा। इसी बीच, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल पूरा हो गया है।
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इससे पहले बीजेपी सांसद हेमा मालिनी और कुछ अन्य सदस्यों के जवाब में पुरी ने कहा कि ‘उड़ान’ योजना का बहुत सकारात्मक असर रहा है और सरकार आम लोगों तक हवाई सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


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