प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब नेशनल बैंक घोटाला के प्रमुख आरोपी मेहुल चोकसी मामले के संबंध में मुंबई की एक अदालत में एक जवाबी हलफनामा दायर किया है। इस शपथपत्र में कहा गया है, “कानूनी कारणों से देरी करने के लिए चिकित्सा कारणों और शर्तों को स्पष्ट रूप से अदालत को गुमराह करने के लिए किए जा रहे हैं ताकि मामले की सुनवाई को टाला जा सके।”
ईडी रिजोइंडर ने कहा है कि चोकसी को जांच में शामिल होने के कई अवसर दिए गए थे, लेकिन उसने पूछताछ करना छोड़ दिया। बता दें कि मेहुल चोकसी का दावा है कि 6129 करोड़ रुपये की उनकी संपत्ति जब्त की गई है, यह गलत है क्योंकि जांच के दौरान ईडी ने 2100 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है।
वही, प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत को सूचित किया कि वह मेहुल चोकसी को एंटीगुआ से भारत लाने और उसे भारत में सभी आवश्यक उपचार प्रदान करने के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ एक एयर एम्बुलेंस प्रदान करने के लिए तैयार है।

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि उन्होंने (मेहुल चोकसी) ने कभी भी जांच में सहयोग नहीं किया। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। इंटरपोल द्वारा एक रेड नोटिस जारी किया गया था। उन्होंने लौटने से इनकार कर दिया, इसलिए वह एक हैं भगोड़ा और एक फरार।
आपको बता दें कि इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट में मेहुल चोकसी ने कहा था कि उसने पीएनबी घोटाले में अभियोजन से बचने के लिए नहीं बल्कि इलाज के लिए देश छोड़ा है।हलफनामे में कहा गया था कि मैंने संदिग्ध हालात में देश नहीं छोड़ा था। चोकसी ने अपने वकील विजय अग्रवाल के जरिए हलफनामा दायर किया जिसमें कहा गया कि विदेश में चिकित्सा जांच और इलाज करवाने के लिए उसने जनवरी 2018 में देश छोड़ा था। हलफनामे में चोकसी ने कहा था, ‘मैंने देश को संदिग्ध परिस्थितियों में नहीं छोड़ा है।’
मेहुल चोकसी ने अदालत में उसके द्वारा दायर दो याचिकाओं के संबंध में हलफनामा दायर किया था। उन याचिकाओं में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा एक विशेष अदालत में दायर एक आवेदन को रद्द करने का अनुरोध किया था। चोकसी ने अपनी याचिका में कहा है कि वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण भारत लौटने में असमर्थ था।


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