देशभर में 20 लाख रजिस्टर्ड वकील, फर्जी वकीलों पर कसेगा शिकंजा: SC ने केंद्र से मांगा जवाब

Summary :

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में फर्जी वकीलों की बढ़ती संख्या पर कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से जवाब मांगा है, जिसमें फर्जी वकीलों के खिलाफ सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है।

Supreme Court Fake Lawyers Case : देशभर में फर्जी वकीलों की बढ़ती तादाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने फर्जी वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है।

याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) को सौंपा जाए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताया। कोर्ट ने माना कि वकालत जैसे गरिमामय पेशे में फर्जी लोगों की मौजूदगी न्यायिक व्यवस्था और संस्था की साख को सीधा नुकसान पहुंचाती है।

याचिका में योग्यता पर सवाल

यह याचिका वकील राजा चौधरी की ओर से दाखिल की गई है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने तर्क दिया कि कई लोग बिना सही योग्यता के कानून के पेशे का गलत फायदा उठा रहे हैं। कई जगहों पर वकील के नाम पर उगाही और माफियागर्दी का खेल चल रहा है।

याचिका में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के उस पुराने बयान का भी प्रमुखता से जिक्र किया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश भर के बार में करीब 30 से 40 फीसदी तक वकील फर्जी हो सकते हैं। जून 2026 में बार काउंसिल के वकीलों ने भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस चिंताजनक आंकड़े को रखा था और इस पर तुरंत सख्त कदम उठाने की जरूरत जताई थी।

20 लाख रजिस्टर्ड वकील

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश और खासतौर पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का जिक्र आया। हाल ही में कफील खान से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस पेशे में माफिया तत्वों की एंट्री पर कड़ा एतराज जताया था। यूपी पुलिस अब तक बार काउंसिल की सिफारिश पर 68 फर्जी वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चुकी है, जबकि आने वाले दिनों में करीब 100 और केस दर्ज होने की उम्मीद है।

कानून मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 20 लाख रजिस्टर्ड वकील हैं और हर साल 80 हजार नए छात्र इस पेशे से जुड़ते हैं। नियम के मुताबिक एलएलबी की डिग्री के बाद बार काउंसिल की परीक्षा पास करना और हर 5 साल में प्रैक्टिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना जरूरी होता है।

इसके बावजूद फर्जी डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन के सहारे अदालतों में प्रैक्टिस करने वालों का दायरा बढ़ता जा रहा है, जिस पर अब सीबीआई जांच की तलवार लटक रही है।

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Rohit Singh

रोहित सिंह पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। राजनीति, समाज, अंतर्राष्ट्रीय, अपराध और शैक्षणिक लेख लिखने में दिलचस्पी रखते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से पोलिटिकल साइंस में ग्रेजुएशन और जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है। वर्तमान में पंजाब केसरी दिल्ली में हिन्दी सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं।