AAP Political Crisis Update: आम आदमी पार्टी (AAP) के 7 राज्यसभा सांसदों के अचानक बगावत कर भाजपा में जाने से सियासी माहौल गरमा गया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर Raghav Chadha को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ा सवाल उनके सरकारी आवास को लेकर भी जुड़ा हुआ है। बता दें, कि उनके दिल्ली के पंडारा रोड स्थित इस AB-5 बंगले को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह बंगला राघव चड्ढा को राज्यसभा सांसद बनने के बाद आवंटित किया गया था। हालांकि बाद में इस आवंटन पर सवाल उठे और इसे उनकी पात्रता से अधिक बताया गया। इसके बाद उन्हें बंगला खाली करने का नोटिस दिया गया और मामला अदालत तक पहुंच गया। ऐसे में अब यह कयास लगाए जा रहे हैं कि कहीं यह पूरा घटनाक्रम उनकी राजनीतिक स्थिति और आवास बचाने से तो जुड़ा नहीं है।
AAP Political Crisis Update: केजरीवाल से मुलाकात के बाद बदला रुख
दिलचस्प बात यह है कि बगावत से ठीक पहले कई सांसदों ने Arvind Kejriwal से मुलाकात की थी। संदीप पाठक ने 23 अप्रैल को, विक्रम साहनी ने 22 अप्रैल को और अशोक मित्तल ने 19 अप्रैल को उनसे मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद पार्टी नेतृत्व के संपर्क में थे और अंतिम समय तक बातचीत जारी थी।
‘पार्टी छोड़ने का दबाव’ की चर्चा
सूत्रों के अनुसार, इन सांसदों ने Arvind Kejriwal को बताया था कि उन पर पार्टी छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि वे पार्टी नहीं छोड़ेंगे। लेकिन घटनाक्रम ने अचानक मोड़ लिया और सभी सातों सांसदों ने एक साथ पार्टी से अलग होने का फैसला कर लिया।
जानकारी के मुताबिक, यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। सभी सातों सांसद लगातार एक-दूसरे के संपर्क में थे और इस पूरी रणनीति को Raghav Chadha द्वारा समन्वित किया जा रहा था। सभी सांसदों ने अलग-अलग पत्र तैयार किए और एक तय समय के अनुसार उन्हें सभापति को सौंप दिया गया।
चार सांसद सार्वजनिक रूप से क्यों नहीं दिखे?
इस पूरे घटनाक्रम वाले दिन में तीन सांसद भाजपा मुख्यालय पहुंचते नजर आए, लेकिन बाकी चार सांसद सामने नहीं आए। इसके पीछे अलग-अलग कारण बताए जा रहे हैं। राजिंदर गुप्ता विदेश में हैं, स्वाति मालीवाल संसदीय कार्य के चलते बाहर थीं, विक्रमजीत साहनी स्वास्थ्य कारणों से नहीं आ सके और हरभजन सिंह अपने IPL से जुड़े कार्यों में व्यस्त थे। हालांकि बताया जा रहा है कि ये सभी सांसद इस फैसले में शामिल हैं।
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी और बीजेपी दोनों ही दलों में हलचल बढ़ा दी है। आने वाले समय में इसका असर संसद और राजनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
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