‘हरभजन सिंह का कॉल इग्नोर, केजरीवाल ने बदला ठिकाना…’, AAP में टूट से पहले हुए ये चौंकाने वाले घटनाक्रम

AAP Political Crisis

AAP Political Crisis: आम आदमी पार्टी (AAP) को पंजाब और राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कई राज्यसभा सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़ने का फैसला किया है। इन नामों में पूर्व क्रिकेटर से राजनेता बने हरभजन सिंह भी शामिल हैं। उनके साथ राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता और विक्रमजीत साहनी जैसे नेताओं के नाम सामने आए हैं। इस घटनाक्रम ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

AAP Political Crisis: हरभजन सिंह का राजनीतिक सफर

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  हरभजन सिंह ने साल 2022 में राजनीति में कदम रखा था। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने आम आदमी पार्टी जॉइन की थी। उसी वर्ष मार्च में पार्टी ने उन्हें पंजाब से राज्यसभा के लिए नामित किया। वे बिना किसी विरोध के चुने गए और 18 जुलाई 2022 को सांसद के रूप में शपथ ली। उनका राजनीति में आना AAP के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना गया था, खासकर पंजाब में।

हरभजन सिंह ने नहीं उठाया फोन

जब पार्टी में टूट की खबर फैलनी शुरू हुई तो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान तुरंत सक्रिय हो गए। जानकारी के मुताबिक, उन्हें दोपहर करीब 12 बजे इस स्थिति का अंदाजा हो गया था। उन्होंने हरभजन सिंह से संपर्क करने की कई बार कोशिश की, लेकिन हरभजन सिंह ने उनका फोन नहीं उठाया। बताया जा रहा है कि उस समय हरभजन सिंह मुंबई में थे और इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के लिए कमेंट्री कर रहे थे।

पहले से था संकट का संकेत

पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी इस टूट का अंदेशा पहले ही हो गया था। बताया जाता है कि उन्होंने सुबह करीब 12:25 बजे एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने अपने नए घर में शिफ्ट होने की बात कही। उस समय इस ट्वीट का मतलब साफ नहीं था, लेकिन बाद में इसे पार्टी में चल रहे घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया।

दरअसल, केजरीवाल जिस घर में रह रहे थे, वह अशोक मित्तल का था। जैसे ही उन्हें पता चला कि मित्तल पार्टी छोड़ रहे हैं, उन्होंने तुरंत वह घर खाली कर दिया। इस कदम को भी पार्टी में अंदरूनी हलचल का संकेत माना गया।

भगवंत मान का तीखा हमला

AAP से सांसदों के इस्तीफे के बाद भगवंत मान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं को “गद्दार” बताया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाए। मान ने कहा कि BJP पंजाब में चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है, इसलिए वह तोड़फोड़ और जोड़-तोड़ की राजनीति कर रही है।

उन्होंने इसे “वॉशिंग मशीन राजनीति” करार दिया, जहां अन्य दलों के नेताओं को अपने साथ मिलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जाती है। मान का कहना था कि यह कदम पंजाब के लोगों के साथ विश्वासघात है।

BJP पर लगाए आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भगवंत मान ने कहा कि BJP लगातार AAP को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उनके खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं मिला तो पार्टी को तोड़ने की साजिश रची गई। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ सांसदों के जाने से पार्टी कमजोर नहीं होगी। मान ने जनता को भरोसा दिलाया कि AAP अभी भी मजबूत है और पंजाब के लोग पार्टी के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति से बड़ी होती है और कुछ नेताओं के जाने से पूरी पार्टी की पहचान नहीं बदलती।

इस पूरे घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में हलचल मचा दी है। एक साथ कई सांसदों का इस्तीफा देना AAP के लिए एक बड़ा संकट माना जा रहा है। वहीं, विपक्षी दल इस स्थिति को अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि AAP इस नुकसान की भरपाई कैसे करती है और क्या पार्टी अपने संगठन को फिर से मजबूत कर पाती है या नहीं। फिलहाल, यह मामला राजनीति के केंद्र में बना हुआ है और सभी की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रम पर टिकी हैं।

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